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क्या आरजेडी में बदल जाएंगे चेहरे? तेजस्वी यादव की बैठक में रोहिणी आचार्य के सवालों का साया, भीतरघातियों पर गिरेगी गाज


पटना. बिहार की राजनीति में राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) इन दिनों उथल-पुथल से गुजर रहा है. बिहार चुनाव में पार्टी का महज 25 सीटों पर सिमट जाने से पार्टी और लालू यादव परिवार, दोनों ही स्तरों पर गहरा असंतोष उभरकर सामने आया है. इसको लेकर लगातार मंथन का दौर भी जारी है कि आखिर आगामी रणनीति क्या हो जिससे पार्टी फिर उठ खड़ी हो. खास बात यह कि जब से चुनाव परिणाम आए हैं तब से ही लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य लगातार पार्टी के भीतर काफी कुछ गड़बड़ होने की बात उठाती आ रही हैं. अब खबर है कि आरजेडी के कार्यकारी प्रमुख तेजस्वी यादव ने आगामी 25 जनवरी को कार्यसमिति की अहम बैठक बुलाई है. इस मीटिंग में जिला से राष्ट्रीय स्तर तक बड़े संगठनिक बदलाव होने की बात कही जा रही है. इसके साथ ही बिहार विधानसभा चुनाव में पार्टी के भीतर आपसी असहयोग और भीतरघात करने वालों पर भी सख्त कार्रवाई की योजना है. ऐसे में अब सवाल यह है कि क्या इस फैसले पर लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य का असर है?

बता दें कि रोहिणी आचार्य ने हाल ही में परिवार और पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए थे, जिससे राजनीतिक हलकों में हलचल मची हुई है. पार्टी सूत्र बताते हैं कि विधानसभा चुनाव 2025 में मिली करारी हार के बाद RJD नेतृत्व ने हार-जीत के कारणों का विश्लेषण शुरू किया है. दरअसल, जो आरजेडी 2020 के चुनाव में 75 सीटें जीतकर बिहार की सबसे बड़ी पार्टी बनी थी, वही पार्टी 25 सीटों पर कैसे और क्यों सिमट गई.पार्टी के लिहाज से तेजस्वी यादव की इस बैठक को नई रणनीति और संगठनात्मक मजबूती के लिए निर्णायक क्षण माना जा रहा है, क्योंकि बैठक में यह भी तय होगा कि किन नेताओं पर भ्रष्ट कार्य या भीतरघात के आरोपों पर औपचारिक कार्रवाई की जाएगी. इतना ही नहीं पार्टी के अंदर असंतोष और मतभेद पर नियंत्रण के लिए सख्त निर्णय लेने की तैयारी की खबर है.

बैठक का असल मकसद?

तेजस्वी यादव ने बैठक का ऐलान करते हुए कहा कि पार्टी को मजबूत बनाने के लिए बड़े बदलाव जरूरी हैं. जिला स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक पदाधिकारियों में फेरबदल हो सकता है. बिहार चुनाव में पार्टी को नुकसान पहुंचाने वालों को बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है. सूत्रों के मुताबिक, यह बैठक चुनावी हार की समीक्षा पर केंद्रित होगी. भीतरघात करने वालों को बाहर निकालने की कार्रवाई के साथ बैठक में नए पदाधिकारियों की नियुक्ति पर भी चर्चा होने की बात सामने आ रही है.

रोहिणी आचार्य का विवाद

रोहिणी आचार्य ने चुनाव हार के बाद परिवार से नाता तोड़ लिया और राजनीति छोड़ने का ऐलान किया. उन्होंने तेजस्वी यादव और उनके सहयोगियों संजय यादव एवं रमीज खान पर अपमान, गाली देने और घर से निकालने का आरोप लगाया. रोहिणी ने कहा कि उन्हें करोड़ों रुपये और लोकसभा टिकट के बदले उन्हें ‘गंदी किडनी’ देने का ताना मारा गया. यहां यह बता दें कि रोहिणी आचार्य ने वर्ष 2022 में पिता लालू प्रसाद यादव को अपनी एक किडनी दान की थी. लेकिन, तेजस्वी यादव के करीबियों पर रोहिणी आचार्य के प्रतिक्रियात्मक बयान से लालू परिवार में दरार साफ दिखी. हाल में ही रोहिणी आचार्य ने एक बार फिर सोशल मीडिया पर ‘गिद्धों’ का जिक्र किया जो पार्टी की विरासत को नष्ट कर रहे हैं. तेज प्रताप यादव ने रोहिणी का समर्थन किया और ‘जयचंदों’ पर कार्रवाई की बात कही.

रोहिणी ने जिस रमीज का जिक्र किया है, उस पर हत्या का बड़ा आरोप लगा है.

क्या रोहिणी का असर है?

राजनीति के जानकारों का मानना है कि तेजस्वी की बैठक पर रोहिणी के आरोपों का सीधा असर है. दो दिन पहले ही हुई तेजस्वी की समीक्षा बैठक पर रोहिणी ने तंज कसते हुए कहा कि पहले ‘गिद्धों’ को हटाओ तब मंथन सार्थक होगा. जानकारों की नजर में उनका यह इशारा संजय यादव और नेमत रमी जैसे सहयोगियों की तरफ था जिनके पार्टी में बढ़ते प्रभाव को रोहिणी राजद की हार जिम्मेदार मानती हैं. दरअसल, बिहार चुनाव में हार के बाद रोहिणी आचार्य का विद्रोह आरजेडी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. तब तो लालू यादव ने इसे पारिवारिक मामला बताया था, लेकिन पार्टी विधायकों की बैठक में तेजस्वी यादव ने संजय यादव का बचाव किया तो इस मामले ने तूल पकड़ लिया. अब एक बार फिर आगामी 25 जनवरी की बैठक में भीतरघातियों पर कार्रवाई की खबर रोहिणी आचार्य के तेजस्वी यादव के करीबियों की ओर इशारा करने वाले आरोपों से प्रेरित लगती है. रोहिणी ने पार्टी में ‘नए बने अपनों’ को षड्यंत्रकारी बताया था.

पार्टी में आत्मचिंतन का दौर

दरअसल, आरजेडी में जहां रोहिणी आचार्य के विद्रोह के बाद तनाव बढ़ा है, वहीं लालू यादव ने विधायकों, सांसदों और अपने नेताओं से कहा है कि परिवारिक झगड़े पार्टी पर असर न डालें. दूसरी ओर तेजस्वी यादव ने हार की जिम्मेदारी तो ली है, लेकिन अपने करीबी सहयोगियों को दोषी नहीं माना है. अब जब तेजस्वी यादव की बैठक में संगठन को मजबूत करने पर जोर होगा. कुछ सदस्यों को बाहर करने की योजना कही जा रही है तो इस रणनीति पर रोहिणी का असर साफ-साफ दिख रहा है, क्योंकि उनके बयानों ने पार्टी में आंतरिक समस्याओं को सार्वजनिक कर दिया है. अब सवाल है कि क्या यह बैठक परिवारिक कलह को दबा पाएगी या और बढ़ाएगी?

आत्मचिंतन की ओर आरजेडी

इस सवाल का जवाब देते हुए जानकार कहते हैं कि तेजस्वी यादव की 25 जनवरी की बैठक आरजेडी के लिए टर्निंग पॉइंट हो सकती है. रोहिणी आचार्य के आरोपों ने पार्टी में बहस छेड़ दी है. अगर कार्रवाई निष्पक्ष होगी तो पार्टी मजबूत हो सकती है. लेकिन परिवारिक दरार बनी रही तो बिहार राजनीति में आरजेडी की चुनौतियां बढ़ेंगी. इसके साथ ही यह भी कि अगर पार्टी इन व्यक्तिगत मतभेदों को समय रहते सुलझा नहीं पाती है तो यह संगठनात्मक मजबूती और विपक्षी रणनीति पर असर डाल सकता है. बैठक का उद्देश्य इन मतभेदों को पब्लिक के बीच की बहस से हटाकर संगठन के भीतर समाधान ढूंढना होना चाहिए. बहरहाल, रोहिणी आचार्य के सवालों और आरोपों का असर साफ दिख रहा है जो कम से कम पार्टी को आत्मचिंतन की ओर ले जा रहा है.

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