डंकी रूट का कड़वा सच! US में 3800 भारतीय अवैध, सऊदी-यूएई के आंकड़े डराने वाले
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India illegal Immigrants: राज्यसभा में विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने बताया कि ज़्यादातर विदेशी सरकारें अपने यहां अवैध रूप से रह रहे विदेशियों की जानकारी साझा नहीं करतीं. जानकारी सिर्फ तब दी जाती है, जब किसी व्यक्ति को डिपोर्ट करने का आदेश होता है और उसके ट्रैवल डॉक्यूमेंट या नागरिकता की पुष्टि करनी होती है.

विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने बताया कि हजारों भारतीयों को डिपोर्टेशन का सामना करना पड़ रहा है. (फाइल फोटो)
नई दिल्ली. विदेशों में अवैध तरीके से रहने वाले भारतीयों को लेकर सरकार ने संसद में चौंकाने वाला खुलासा किया है. विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने बताया कि दुनिया भर में हजारों भारतीय या तो डिपोर्टेशन का सामना कर रहे हैं या जेलों और डिटेंशन सेंटर्स में बंद हैं. सबसे डरावने आंकड़े खाड़ी देशों से आए हैं. सऊदी अरब और यूएई में सबसे ज्यादा भारतीय मुश्किल में हैं.
अमेरिका जैसे सुपरपावर देश में भी हजारों भारतीय अवैध घोषित हैं. मंत्री ने साफ किया कि विदेशी सरकारें तब तक जानकारी नहीं देतीं जब तक पानी सिर से ऊपर न चला जाए. यह रिपोर्ट उन लोगों के लिए आंखें खोलने वाली है जो बिना सोचे-समझे विदेश भागते हैं.
सऊदी और दुबई में सबसे बुरा हाल
संसद में पेश किए गए आंकड़े बताते हैं कि खाड़ी देशों में भारतीयों की स्थिति चिंताजनक है.
सऊदी अरब नंबर 1: यहां कुल 13,256 मामले सामने आए हैं. जेद्दा में अकेले 8,921 और रियाद में 4,335 भारतीय फंसे हैं.
यूएई का हाल: संयुक्त अरब अमीरात में कुल 9,558 मामले हैं. इसमें दुबई में 7896 और अबू धाबी में 1662 भारतीय अवैध या डिटेंशन में हैं.
अमेरिका का सपना पड़ा भारी
अमेरिका जाने का ‘डंकी रूट’ या अवैध तरीका अब भारी पड़ रहा है. साल 2025 में अमेरिका (Washington) से 3,806 मामले सामने आए हैं. इनमें से अकेले वॉशिंगटन अधिकार क्षेत्र से 3,414 मामले रिपोर्ट किए गए हैं. यह दिखाता है कि अमेरिकी एजेंसियां अवैध प्रवासियों पर कितनी सख्त हैं.
बिना बताए वापस भेज देते हैं विदेशी मुल्क
मंत्री ने एक और कड़वा सच बताया है. विदेशी सरकारें अवैध भारतीयों की जानकारी आसानी से साझा नहीं करतीं. जब तक किसी को डिपोर्ट करने का आदेश नहीं आता, तब तक दूतावास को खबर नहीं लगती. अगर किसी के पास वैलिड पासपोर्ट या ट्रेवल डॉक्यूमेंट है, तो उसे सीधे भारत भेज दिया जाता है. भारतीय मिशन को इसकी भनक तक नहीं लगती. कई देशों में तो जेल की जगह डिटेंशन सेंटर में रखा जाता है.
म्यांमार से मलेशिया तक शिकंजा
सिर्फ खाड़ी या अमेरिका ही नहीं, पड़ोसी देशों में भी भारतीय कानून के जाल में फंसे हैं.
मलेशिया (कुआलालंपुर): 1,675 मामले.
म्यांमार (यंगून): 1,605 मामले.
चीन में 316 और कनाडा में 246 मामले सामने आए हैं.
इमरजेंसी सर्टिफिकेट (EC) की जरूरत पड़ने पर ही विदेशी सरकारें भारत से संपर्क करती हैं.
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राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें

