पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक गुणा-गणित और आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है. तृणमूल कांग्रेस से निकाले गए विधायक और जनत उन्नयन पार्टी के प्रमुख हुमायूं कबीर ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर सीधा हमला बोलते हुए कहा है कि वह अब टीएमसी की मुस्लिम वोटों की राजनीति नहीं चलने देंगे. कबीर का कहना है कि इस बार अल्पसंख्यक समुदाय ‘अपने विकास के लिए अल्पसंख्यकों को ही वोट देगा’ और इसी मकसद से उनकी पार्टी लेफ्ट, आईएसएफ और एआईएमआईएम जैसी ताकतों से बातचीत कर रही है.
हुमायूं कबीर ने दावा किया है कि यदि ये राजनीतिक दल एक मंच पर आते हैं तो वे आगामी बंगाल विधानसभा चुनाव में वे 100 से ज्यादा सीटें जीत सकते हैं. उनके इस बयान को तृणमूल कांग्रेस के लिए एक बड़ी राजनीतिक चुनौती के तौर पर देखा जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब बंगाल की राजनीति में मुस्लिम वोट बेहद अहम भूमिका निभाता रहा है.
हुमायूं कबीर से क्यों मिले लेफ्ट के सलीम?
इस बीच हुमायूं कबीर और सीपीएम के पश्चिम बंगाल राज्य सचिव मोहम्मद सलीम के बीच हुई बैठक ने गठबंधन की अटकलों को और हवा दे दी है. सलीम ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल कोई औपचारिक गठबंधन तय नहीं हुआ है और लेफ्ट फ्रंट ही उनकी प्राथमिक गठबंधन संरचना है. उन्होंने कहा कि भाजपा और तृणमूल की ‘विभाजनकारी राजनीति’ का विरोध करने वाली ताकतों से बातचीत जरूर हो रही है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि चुनाव साथ ही लड़ा जाएगा.
वहीं हुमायूं कबीर ने इस बैठक को सकारात्मक बताया और कहा कि उनका लक्ष्य तृणमूल कांग्रेस और भाजपा दोनों को सत्ता से बाहर करना है. उन्होंने यह भी संकेत दिए कि आईएसएफ और एआईएमआईएम से बातचीत की संभावनाएं खुली हुई हैं और फरवरी के मध्य तक तस्वीर साफ हो सकती है.
बाबरी मस्जिद निर्माण का क्या है प्लान?
इसी बीच मुर्शिदाबाद में आज से बाबरी मस्जिद का भी निर्माण शुरू होने वाला है. हुमायूं कबीर ने दावा किया कि 11 फरवरी को दोपहर 12 बजे बाबरी मस्जिद के निर्माण का काम औपचारिक रूप से शुरू किया जाएगा. उनके मुताबिक, सुबह 10 बजे से ही करीब 1000 से 1200 मौलाना, मुफ्ती और धर्मगुरु कुरान की तिलावत शुरू कर देंगे. उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम में किसी भी वीआईपी को आमंत्रित नहीं किया गया है और केवल धार्मिक विद्वान ही इसमें शामिल होंगे.
कबीर का कहना है कि मस्जिद का निर्माण करीब दो साल में पूरा करने का लक्ष्य है और इस पर लगभग 300 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है, हालांकि अब तक सिर्फ करीब 6 करोड़ रुपये का चंदा ही जुट पाया है, जिससे फंडिंग को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं.
हुमायूं कबीर ने ममता बनर्जी पर क्या आरोप लगाए हैं?
हुमायूं कबीर का कहना है कि ममता बनर्जी मुस्लिम वोटों की राजनीति कर रही हैं और वह अब इसे जारी नहीं रहने देंगे. उनके मुताबिक इस बार अल्पसंख्यक समुदाय अपने विकास के लिए अल्पसंख्यक नेताओं को ही वोट देगा.
हुमायूं कबीर किन दलों के साथ गठबंधन की बात कर रहे हैं?
हुमायूं कबीर लेफ्ट पार्टियों, इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) और एआईएमआईएम के साथ बातचीत कर रहे हैं. उनका दावा है कि अगर ये दल साथ आते हैं तो बंगाल में बड़ा राजनीतिक उलटफेर हो सकता है.
क्या लेफ्ट और हुमायूं कबीर के बीच गठबंधन तय हो गया है?
नहीं. सीपीआई(एम) नेता मोहम्मद सलीम ने साफ किया है कि फिलहाल सिर्फ बातचीत हुई है, कोई औपचारिक गठबंधन तय नहीं हुआ है.
बाबरी मस्जिद को लेकर हुमायूं कबीर ने क्या दावा किया है?
उन्होंने कहा है कि 11 फरवरी को दोपहर 12 बजे बाबरी मस्जिद के निर्माण का काम औपचारिक रूप से शुरू किया जाएगा.
मस्जिद निर्माण से पहले क्या कार्यक्रम होगा?
सुबह 10 बजे से करीब 1000 से 1200 मौलाना, मुफ्ती और धर्मगुरु कुरान की तिलावत करेंगे. इस कार्यक्रम में किसी भी वीआईपी को आमंत्रित नहीं किया गया है.
मस्जिद निर्माण में कितना खर्च आने का अनुमान है?
जवाब: हुमायूं कबीर के मुताबिक निर्माण पर करीब 300 करोड़ रुपये खर्च होंगे, हालांकि अब तक सिर्फ लगभग 6 करोड़ रुपये का चंदा ही जुट पाया है.
हुमायूं कबीर के परिवार पर पुलिस का एक्शन
इस पूरे घटनाक्रम के बीच हुमायूं कबीर के परिवार पर कार्रवाई ने भी सियासी रंग ले लिया है. पश्चिम बंगाल पुलिस ने उनकी बेटी के ससुर शरीफुल इस्लाम की 10.73 करोड़ रुपये की संपत्तियों को एनडीपीएस मामले में जब्त करने की प्रक्रिया शुरू की है.
पुलिस का आरोप है कि शरीफुल इस्लाम पिछले सात वर्षों से ड्रग तस्करी में शामिल थे और उन्होंने अवैध तरीके से बड़ी संपत्ति बनाई. हुमायूं कबीर ने इस कार्रवाई को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया है और कहा है कि उनके परिवार और रिश्तेदारों को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है.
कबीर ने यह भी कहा कि उन्हें एनआईए से कोई डर नहीं है और सवाल उठाया कि ममता बनर्जी एनआईए का विरोध क्यों कर रही हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि एक तरफ एनआईए का विरोध किया जा रहा है और दूसरी तरफ अप्रत्यक्ष रूप से उन्हें जांच से जोड़ने की कोशिश हो रही है.

