Published on: 25-Oct-2025
Updated on: 25-Oct-2025
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पोल्ट्री फार्मिंग – किसानों के लिए अतिरिक्त आय और स्थायी रोजगार का सफल माध्यम
आज के समय में किसानों का ध्यान केवल परंपरागत खेती तक सीमित नहीं रह गया है। बदलते बाजार, बढ़ती मांग और रोजगार के नए अवसरों के कारण किसान अब विविध व्यवसायों की ओर कदम बढ़ा रहे हैं।
इन्हीं में से एक है पोल्ट्री फार्मिंग यानी मुर्गी पालन। यह एक ऐसा क्षेत्र है जहां कम पूंजी में व्यवसाय शुरू किया जा सकता है और लगातार आय प्राप्त की जा सकती है।
खास बात यह है कि भारत में प्रोटीन की बढ़ती खपत और लोगों की जीवनशैली में हुए बदलाव के कारण अंडों और चिकन मांस की मांग तेजी से बढ़ रही है, जिससे यह व्यवसाय और भी लाभदायक हो गया है।
गांवों के किसान इस व्यवसाय को बड़े उत्साह के साथ अपना रहे हैं क्योंकि इससे उन्हें खेती पर निर्भरता कम करने, खाली समय का सदुपयोग करने और अपनी आय में स्थिरता लाने में मदद मिलती है।
विशेषकर छोटे और मध्यम स्तर के किसान पोल्ट्री फार्मिंग को एक अच्छा विकल्प मान रहे हैं, जहां नियमित आय के साथ भविष्य में विस्तार की संभावनाएँ भी बनी रहती हैं।
पोल्ट्री फार्मिंग में मुख्य खर्च
पोल्ट्री फार्म चलाते समय किसानों को तीन मुख्य तरह के खर्चों पर ध्यान देना होता है –
- 1. फीड (चारा) खर्च
- 2. दवाइयाँ और टीकाकरण
- 3. प्रबंधन व बिजली-पानी खर्च
सामान्यतः पूरी लागत का लगभग 65% से 70% भाग फीड पर खर्च होता है।
इसलिए यह जरूरी है कि किसान फीड प्रबंधन को सही तरीके से अपनाएं। अगर फार्म में साफ-सफाई अच्छी हो और बायो-सिक्योरिटी नियमों का पालन किया जाए, तो बीमारियों की संभावना कम होती है और दवाइयों पर खर्च भी घट जाता है। इससे किसानों का लाभ बढ़ जाता है।
सही फीडिंग का महत्व
मुर्गियों के स्वास्थ्य और तेज़ विकास के लिए सही फीड बेहद आवश्यक है। किसान निम्न बातों का ध्यान रखें:
- चूजों को पहले 15 दिन तक बारीक दलिया (स्टार्टर फीड) दें।
- उम्र के अनुसार स्टार्टर, ग्रोअर और फिनिशर फीड अवश्य बदलें।
- फीड में विटामिन, मिनरल्स और प्रोटीन की संतुलित मात्रा होनी चाहिए।
- संभव हो तो किसान अपने खेत की सामग्री (मक्का, चना, बाजरा आदि) का उपयोग करके फीड तैयार कर सकते हैं। इससे लागत काफी कम हो जाती है।
चूजों की देखभाल – सबसे महत्वपूर्ण चरण
पोल्ट्री फार्मिंग में शुरुआती 15 से 20 दिन चूजों के लिए सबसे संवेदनशील समय होता है। इस दौरान ध्यान देने योग्य बातें –
- फार्म में डिसइंफेक्शन (कीटाणु-नाशन) करें।
- ब्रूडर में उचित तापमान बनाए रखें ताकि चूजे ठंड या गर्मी से प्रभावित न हों।
- चूजों को शुरुआत में चिक-गार्ड में रखें और 8-10 दिन बाद धीरे-धीरे हटाएं।
- हवा, नमी और रोशनी का संतुलन रखें ताकि चूजों का विकास सही तरीके से हो सके।
सरकारी योजनाएँ और सब्सिडी
केंद्र और राज्य सरकारें मुर्गी पालन को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाएँ चला रही हैं:
- समेकित मुर्गी विकास योजना – मुर्गी पालन के लिए 50% तक अनुदान मिलता है।
- राष्ट्रीय पशुधन मिशन – शेड निर्माण व उपकरण खरीद पर 50% सब्सिडी मिलती है।
इन योजनाओं के लिए किसान अपने जिले के पशुपालन विभाग, वेटनरी अस्पताल या कृषि विभाग कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं।
सफल पोल्ट्री फार्मिंग के लिए महत्वपूर्ण टिप्स
- हमेशा स्वस्थ और टीकाकृत चूजे ही खरीदें।
- फार्म की साफ-सफाई और बायो-सिक्योरिटी में कोई समझौता न करें।
- टीकाकरण की तारीखों का सही पालन करें।
- नियमित रूप से पशु चिकित्सक से सलाह लेते रहें।
- अंडे और चिकन की बिक्री के लिए स्थानीय बाजार, होटल, रेस्टोरेंट और थोक विक्रेताओं से संपर्क बढ़ाएं।
पोल्ट्री फार्मिंग किसानों के लिए एक ऐसा व्यवसाय है जिसे छोटे स्तर से शुरू करके बड़े स्तर तक आसानी से विस्तार किया जा सकता है।
इसमें लागत कम, जोखिम नियंत्रित और नियमित आय की संभावना अधिक होती है। अगर सही प्रबंधन, स्वच्छता और फीडिंग पर विशेष ध्यान दिया जाए, तो किसान कम समय में अच्छा लाभ कमा सकते हैं।
यह न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करता है, बल्कि उन्हें कृषि से परे एक स्थायी और सुरक्षित आय स्रोत भी प्रदान करता है।

