केंद्र सरकार के नशीले पदार्थों के प्रति ज़ीरो टॉलरेंस के दृष्टिकोण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) और राजस्थान पुलिस ने राजस्थान के सिरोही जिले के एक सुदूर गांव में एक गुप्त लैब का भंडाफोड़ किया है। सैकड़ों किलोग्राम केमिकल ज़ब्त किए गए हैं, जो लगभग 100 किलोग्राम मेफेड्रोन बनाने के लिए पर्याप्त थे। इनकी अनुमानित बाज़ार कीमत 40 करोड़ रुपये है। लैब के मास्टरमाइंड और 4 अन्य को गिरफ्तार कर लिया गया है। राजस्थान, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र राज्यों में मेफेड्रोन का इस्तेमाल साइकोट्रोपिक ड्रग्स के तौर पर तेज़ी से बढ़ रहा है।
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने राजस्थान में, विशेष रूप से जिला पुलिस को संवेदनशील बनाने के लिए मासिक जिला स्तरीय एनसीओआरडी तंत्र का इस्तेमाल करते हुए कई बैठकें की। राज्य पुलिस को इस विषय के प्रति जागरूक किया गया और उन्होंने रसायनों और प्रयोगशाला उपकरणों से भरे ड्रम की उपस्थिति की सूचना एनसीबी के स्थानीय कार्यालय को दी। ये संभावना जतायी गई कि ऐसी जगह मेफेड्रोन जैसी सिंथेटिक दवाओं के निर्माण का एक गुप्त केंद्र हो सकती है।
एनसीबी ने देशभर की जिला पुलिस के साथ गुप्त लैब्स की उपस्थिति के बारे में जानकारी साझा की। इनमें, ढकी हुई या काली खिड़कियां, अत्यधिक वेंटिलेशन/डक्टिंग, दीवारों, फर्श, इमारतों या शेड्स पर धातु के क्षरण या रासायनिक दाग के निशान, जो पहले आवासीय थे लेकिन प्रयोगशालाओं के रूप में उपयोग किए जाते थे, असामान्य स्थानों पर रसायनों या उपकरणों का भंडारण आदि, शामिल हैं।
ऐसे ही एक मामले में, राजस्थान की सिरोही पुलिस को 06 नवंबर, 2025 को सिरोही के धनत्राई गाँव में एक फार्म हाउस में लैब उपकरणों के साथ-साथ रसायनों से भरे ड्रम और पैकेट मिले। पुलिस ने तुरंत यह जानकारी एनसीबी, जोधपुर को दी, जिसके बाद अधिकारी तुरंत घटनास्थल पर पहुँचे और उन्हें एक गुप्त प्रयोगशाला के संकेत मिले। वहां सैकड़ों किलोग्राम रसायन मिले जो लगभग 100 किलोग्राम मेफेड्रोन बनाने के लिए पर्याप्त थे। इसकी अनुमानित बाजार कीमत 40 करोड़ रुपये है। राष्ट्रीय फॉरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय, गांधीनगर की टीम को निरीक्षण के लिए बुलाया गया। उन्होंने घटनास्थल से बरामद प्रयोगशाला उपकरणों में इस्तेमाल किए जा रहे अग्रिम पदार्थों की मौजूदगी की पुष्टि की है।
मामले की जांच के दौरान, लैब चलाने वाले लोगों की पहचान की गई और उनमें से पांच को राजस्थान पुलिस की सहायता से एनसीबी, जोधपुर द्वारा राजस्थान और गुजरात के विभिन्न हिस्सों से गिरफ्तार किया गया। जांच के बाद मास्टरमाइंड, वाला राम, निवासी जिला – जालौर, राजस्थान को गिरफ्तार कर लिया गया है। पूछताछ में पता चला कि वह स्नातक है और सिविल सेवा परीक्षा सहित विभिन्न परीक्षाओं में असफल होने के बाद, उसने जल्दी पैसा कमाने के लिए मेफेड्रोन निर्माण का व्यवसाय शुरू कर दिया। उसने अपने सहयोगी, भूरा राम, निवासी गांव – धनत्राई, जिला – बलतोरा के नाम पर फार्म हाउस पट्टे पर लिया।
The Narcotics Control Bureau (NCB) and Rajasthan Police has busted a clandestine lab in a remote village in Sirohi district of Rajasthan. Hundreds of kgs of chemicals has been seized which was sufficient to manufacture about 100 kgs of Mephedrone, having an approximate street… pic.twitter.com/YSGgBNsSW3
— ANI (@ANI) November 15, 2025
उसने सिंडिकेट के अन्य सदस्यों के साथ बात करने के लिए वर्चुअल सिम का इस्तेमाल किया और ड्रग बनाने की प्रक्रिया सीखने के लिए डार्कनेट का इस्तेमाल किया। उसने गुजरात के अंकलेश्वर से रसायन और लैब उपकरण हासिल किए। वह मेफेड्रोन तस्करी के एक सीबीएन मामले में भी वांछित था। रसायनों और उपकरणों के परिवहन में प्रयुक्त वाहन को जब्त कर लिया गया है। जांच से यह भी पता चला है कि उन्होंने 8 किलो मेफेड्रोन बनाया था, जिसमें से 2 किलो सीबीएन ने 28 अक्टूबर 2025 को उनके एक सहयोगी से जब्त कर लिया था। मामले में आगे की जांच जारी है।
यह कार्रवाई, ड्रग्स के खिलाफ लड़ाई में राजस्थान पुलिस और एनसीबी के बीच सहयोग का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है, जहां उन्होंने संयुक्त रूप से तलाशी और जांच की, जिसके परिणामस्वरूप 5 दिनों में ही इस गुप्त लैब और इसके पीछे के सिंडिकेट का भंडाफोड़ हो सका। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो नागरिकों से अनुरोध करता है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना स्थानीय पुलिस या एनसीबी को एमएएनएएस हेल्पलाइन नंबर 1933 पर दें, जहां रसायनों और प्रयोगशाला उपकरणों का गुप्त तरीके से उपयोग किया जा रहा हो, क्योंकि इसका उपयोग सिंथेटिक दवाओं के निर्माण के लिए किया जा सकता है।

