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राफेल, Su-30MKI का बाप, मुंह ताकते रह जाएंगे रडार, पाकिस्‍तान में जहां मन वहां अटैक, कुछ नहीं कर पाएगा चीन – india indigenous 5th generation fighter jet AMCA Prototypes Roll Out Every 9 Month Chinese radar fail Pakistan attack


India 5th Generation Fighter Jet: पाकिस्‍तान ने चीन से पांचवीं पीढ़ी का विमान खरीदने की योजना बनाई है. आने वाले 4 से 5 साल में पाकिस्‍तान को 5th जेनरेशन फाइटर जेट की खेप मिलने की उम्‍मीद जताई जा रही है. ऐसा होने पर दक्षिण एशिया का सुरक्षा संतुलन बदल सकता है और यह चीन-पाकिस्‍तान के पक्ष में झुक सकता है. इसे देखते हुए भारत ने एयरफोर्स के बेड़े में अल्‍ट्रा मॉडर्न टेक्‍नोलॉजी से लैस फाइटर जेट जोड़ने का फैसला किया है. फ्रांस से 114 राफेल फाइटर जेट की खरीद इसी मिशन का हिस्‍सा है. एचएएल को तेजस MK-1 विमान के प्रोडक्‍शन को गति देने का निर्देश दिया गया है. इसके अलावा एयरफोर्स 5th जेनरेशन जेट खरीदने के विकल्‍प पर भी विचार कर रहा है. इसमें रूस का Su-57 और अमेरिका का F-35 फाइटर जेट रेस में है. रूसी जेट की चर्चा इन दिनों कुछ ज्‍यादा तेज है. वहीं, देसी टेक्‍नोलॉजी से 5th जेनरेशन फाइटर जेट डेवलप करने पर भी तेजी से काम चल रहा है. रक्षा मंत्रालय ने इसको ध्‍यान में रखते हुए AMCA प्रोजेक्‍ट लॉन्‍च किया है. इसके लिए शुरुआती तौर पर ₹15000 करोड़ का फंड भी जारी किया गया है, ताकि पांचवीं पीढ़ी के देसी लड़ाकू विमान का प्रोटोटाइप डेवलप किया जा सके. आने वाले अधिकतम 10 साल में देसी 5th जेन जेट के प्रोडक्‍शन का लक्ष्‍य रखा गया है. इसी AMCA प्रोजेक्‍ट को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है. 2028-31 से सेलेक्‍टेड कंपनियों (या कंसोर्टियम) को हर 9 महीने में एक प्रोटोटाइप रोल-आउट करना होगा, जबकि साल 2034 से इसका प्रोडक्‍शन घरेलू स्‍तर पर करने का लक्ष्‍य रखा गया है.

भारत के स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) कार्यक्रम को लेकर पहली बार विस्तृत टाइमलाइन सामने आई है. एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, यदि असेंबली और सिस्टम इंटीग्रेशन से जुड़े माइलस्टोन तय समय पर पूरे होते हैं, तो AMCA का पहला प्रोटोटाइप 2028 के अंत तक रोल-आउट किया जा सकता है. इसके बाद 2028 से 2031 के बीच हर 9 महीने में एक नया प्रोटोटाइप सामने आने की योजना है, जिससे कुल 5 प्रोटोटाइप तैयार होंगे. प्रोग्राम के स्‍ट्रक्‍चर को इस तरह डिजाइन किया गया है कि प्रत्येक प्रोटोटाइप की भूमिका अलग-अलग होगी. शुरुआती तीन विमान फ्लाइट एनवेलप विस्तार, एयरोडायनामिक वेरिफिकेशन और फेज-वाइज एवियोनिक्स इंटीग्रेशन पर केंद्रित रहेंगे. वहीं, अंतिम दो प्रोटोटाइप वेपंस के इंटीग्रेशन और फायरिंग ट्रायल के लिए डेडिकेटेड होंगे. इस चरणबद्ध मॉडल का उद्देश्य विकास चक्र को छोटा करना और समानांतर परीक्षण को संभव बनाना है, जो आजकल उन्नत फाइटर प्रोग्रामों में अपनाई जा रही आधुनिक कार्यप्रणाली मानी जाती है.

5th जेनरेशन और 4th जेनरेशन फाइटर जेट में क्‍या अंतर?
5th जेनरेशन जेट 4th जेनरेशन जेट
स्टील्थ क्षमता: 5th जेनरेशन फाइटर जेट (जैसे F-35, Su-57) रडार से बचने के लिए विशेष डिजाइन और कोटिंग से लैस होते हैं. 4th जेनरेशन जेट (जैसे Su-30MKI, F-16, तेजस, राफेल) में स्टील्थ फीचर सीमित या नहीं के बराबर होते हैं.
सेंसर फ्यूजन और नेटवर्किंग: 5th जेनरेशन विमानों में एडवांस सेंसर फ्यूजन होता है, जिससे पायलट को युद्धक्षेत्र की रियल-टाइम तस्वीर मिलती है. 4th जेनरेशन जेट्स में सेंसर मौजूद होते हैं, लेकिन डेटा इंटीग्रेशन उतना उन्नत नहीं होता है.
5th जेनरेशन फाइटर अपने हथियार अंदर छुपाकर ले जाते हैं, जिससे रडार सिग्नेचर कम रहता है. 4th जेनरेशन जेट आमतौर पर बाहरी पाइलॉन पर हथियार ले जाते हैं, जिससे उनकी पहचान आसान हो जाती है.
कई 5th जेनरेशन जेट बिना आफ्टरबर्नर के सुपरसोनिक गति से उड़ सकते हैं, जिसे सुपरक्रूज कहा जाता है. 4th जेनरेशन के विमानों में यह क्षमता सीमित या नहीं होती है.
5th जेनरेशन जेट्स में अत्याधुनिक डिजिटल कॉकपिट, AI सपोर्टेड सिस्टम और मजबूत इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सूट होते हैं. 4th जेनरेशन विमानों में ये सिस्टम अपेक्षाकृत कम उन्नत होते हैं, जिस वजह से इस कैटेगरी के फाइटर जेट टेक्‍नोलॉजी के मामले में पीछे हो जाते हैं.

अगले 3 महीने AMCA के लिए बेहद अहम

उद्योग भागीदारी के मोर्चे पर भी कार्यक्रम निर्णायक चरण में पहुंच रहा है. उम्मीद है कि अगले तीन महीनों के भीतर AMCA के लिए अंतिम उत्पादन साझेदार की घोषणा कर दी जाएगी. इसके बाद लॉन्ग-लीड मैन्युफैक्चरिंग तैयारी और सप्लाई चेन सेटअप की प्रक्रिया तेज होगी. इंडियन एयरफोर्स पहले ही AMCA MkI संस्करण के लिए 40 विमानों की शुरुआती खरीद प्रतिबद्धता जता चुका है. यह पहला संस्करण अमेरिकी जनरल इलेक्ट्रिक के F414 इंजन से लैस होगा, जिसकी थ्रस्ट क्षमता लगभग 98 किलो न्यूटन होगी. मौजूदा योजना के अनुसार, इसका सीरियल प्रोडक्शन 2034 के आसपास शुरू होने की उम्मीद है. AMCA कार्यक्रम की महत्वाकांक्षा केवल पहले संस्करण तक सीमित नहीं है. इसके बाद आने वाला AMCA MkII वर्जन अधिक शक्तिशाली इंडो-फ्रेंच इंजन से लैस होगा, जिसकी कैटेगरी 120 किलो न्यूटन के आसपास बताई जा रही है. इस इंजन से बेहतर प्रदर्शन मार्जिन, अधिक पेलोड क्षमता और भविष्य के अपग्रेड्स की संभावनाएं जुड़ी होंगी. MkII चरण के तहत लगभग 80 अतिरिक्त विमानों की खरीद का लक्ष्य रखा गया है और इसके उत्पादन की शुरुआत 2036 के बाद होने की संभावना जताई जा रही है. कार्यक्रम से जुड़े अधिकारी इसे भारत के लॉन्‍ग-टर्म एयरो-इंजन इकोसिस्टम के लिए एक कॉर्नरस्टोन प्रोजेक्ट के रूप में देख रहे हैं, जिसका प्रभाव अन्य सैन्य और नागरिक विमान कार्यक्रमों तक फैलेगा.

India 5th Generation Fighter Jet: भारत साल 2034 से स्‍वदेशी फिफ्थ जेनरेशन जेट का प्रोडक्‍शन करने लगेगा. रेंज और स्‍पीड के मामले में यह चौथी पीढ़ी के लड़ाकू विमान से कहीं ज्‍यादा उन्‍नत होगा. राफेल और तेजस जैसे जेट पीछे छूट जाएंगे. (फाइल फोटो/Reuters)

अग्रेसिव टार्गेट

AMCA के प्रोटोटाइप विकास में सबसे अहम पहलू इसकी फेज्ड इंटीग्रेशन फिलॉसफी है. एवियोनिक्स, सेंसर और मिशन सिस्टम को एक साथ एक ही प्लेटफॉर्म पर पूरी तरह से जोड़ने के बजाय इन्हें चरणबद्ध तरीके से शुरुआती प्रोटोटाइप्स में शामिल किया जाएगा. इससे इंजीनियरों को प्रत्येक सब-सिस्टम को नियंत्रित माहौल में परखने और जोखिम को कम करने में मदद मिलेगी. वेपन ट्रायल को अंतिम प्रोटोटाइप्स तक सीमित रखने का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कॉम्बैट कैपेबिलिटी वेरिफिकेशन एयरोडायनामिक और सिस्टम परीक्षणों के समानांतर आगे बढ़ सके और कार्यक्रम के अंतिम चरण में किसी बड़े बॉटलनेक यानी बाधा की आशंका कम हो. विशेषज्ञों का मानना है कि 2028 से 2031 के बीच केवल तीन वर्षों में पांच प्रोटोटाइप्स का रोल-आउट किसी भी देश के लिए एक अग्रेसिव लक्ष्य है. हालांकि, ADA और इसके औद्योगिक साझेदार मॉड्यूलर डिजाइन, डिजिटल ट्विन्स और कॉन्करेंट इंजीनियरिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर इस गति को बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं. इन प्रक्रियाओं से न केवल डिजाइन और परीक्षण समय घटता है, बल्कि उत्पादन तैयारी की प्रक्रिया भी पहले से ही शुरू हो जाती है.

इंडियन टेक्‍नोलॉजी की परीक्षा

भारत के एयरोस्पेस क्षेत्र के लिए AMCA केवल एक नया लड़ाकू विमान नहीं है, बल्कि यह स्वदेशी डिजाइन, उन्नत मैन्युफैक्चरिंग और सिस्टम इंटीग्रेशन क्षमताओं की परीक्षा भी है. यदि तय समयसीमा के अनुसार प्रोटोटाइप रोलआउट और उत्पादन चरण पूरे होते हैं, तो आने वाला दशक भारतीय वायुसेना के बेड़े में न केवल एक आधुनिक पांचवीं पीढ़ी का फाइटर जोड़ेगा, बल्कि देश को भविष्य की कॉम्बैट एविएशन परियोजनाओं के लिए एक मजबूत और टिकाऊ विकास पारिस्थितिकी तंत्र भी प्रदान करेगा.

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