Sat. Feb 7th, 2026

कश्मीर के नाम पर हिंदुस्तान में ‘साजिश’ रचने वाले पाकिस्तान में किसने किया धमाका? – islamabad mosque blast security forces launch probe pakistan opnm2


कश्मीर और धर्म के नाम पर भारत को अस्थिर करने की साजिशें रचने वाला पाकिस्तान अब खुद अपने ही आतंक की आग में झुलस रहा है. राजधानी इस्लामाबाद में एक शिया मस्जिद में हुए आत्मघाती धमाके ने पूरे पाकिस्तान को दहशत में डाल दिया है. यह धमाका उस वक्त हुआ, जब जुमे की नमाज के लिए करीब 700 लोग मस्जिद परिसर में मौजूद थे.

शुक्रवार की दोपहर के वक्त मस्जिद खचाखच भरी हुई थी. तभी एक खुदकुश हमलावर ने खुद को उड़ा लिया. धमाका इतना जबरदस्त था कि सैकड़ों लोग इसकी चपेट में आ गए. चारों तरफ अफरा-तफरी मच गई और लहूलुहान लोग मदद के लिए चीखते नजर आए. करीब दो दर्जन लोग इस हमले में मारे गए हैं. इस हमले की जिम्मेदारी किसी भी संगठन ने नहीं ली है. 

इसी वजह से यह सवाल और गहरा गया है कि इस्लामाबाद में हुए इस आत्मघाती हमले के पीछे आखिर कौन है. शुरुआती आशंका पाकिस्तानी तालिबान या इस्लामिक स्टेट जैसे आतंकी गुटों पर जताई जा रही है, जो पहले भी अल्पसंख्यक शिया समुदाय को निशाना बनाते रहे हैं. धमाके के बाद इस्लामाबाद में इमरजेंसी घोषित कर दी गई है. 

पुलिस अधिकारियों को आशंका है कि मरने वालों और घायलों की संख्या बढ़ सकती है. इससे पहले 11 नवंबर 2025 को भी इस्लामाबाद के G-11 इलाके में जिला और सत्र न्यायालय के बाहर आत्मघाती हमला हुआ था, जिसमें 12 लोगों की मौत हुई थी और 30 से ज्यादा लोग घायल हुए थे. पाकिस्तान खुद आतंकवाद की उस आग में जल रहा है, जिसे वह बरसों से दूसरों के खिलाफ भड़काता रहा है. 

Islamabad Mosque Blast

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद पाकिस्तान में मौजूद 150 से ज्यादा आतंकियों को पहले ही बैन कर चुकी है. पाकिस्तान खुद मानता है कि उसके यहां 46 बड़े आतंकी संगठन सक्रिय हैं, जबकि अमेरिका का दावा है कि दुनिया के 15 सबसे खतरनाक आतंकी संगठन पाकिस्तान में पनप रहे हैं. 

ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स 2025 के मुताबिक पाकिस्तान बुर्किना फासो के बाद दुनिया का दूसरा सबसे ज्यादा आतंक प्रभावित देश बन चुका है. साल 2024 में यह चौथे नंबर पर था. रिपोर्ट बताती है कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान के हमलों में 90 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, जबकि बलूच लिबरेशन आर्मी के हमलों में 60 फीसदी का इजाफा हुआ है.

इस्लामिक स्टेट खुरासान ने अब पाकिस्तानी शहरों को भी निशाना बनाना शुरू कर दिया है. रिपोर्ट के अनुसार खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान पाकिस्तान के सबसे ज्यादा आतंक प्रभावित इलाके हैं. देश भर की कुल आतंकी घटनाओं में से करीब 90 प्रतिशत इन्हीं इलाकों में हुई हैं.

हालात यह हैं कि पाकिस्तान के कोने-कोने में सेना और सरकार के खिलाफ गुस्सा उबाल पर है. बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना की कार्रवाई के खिलाफ बलूच लिबरेशन आर्मी खुलकर मैदान में है, जबकि खैबर पख्तूनख्वा में TTP ने मोर्चा संभाल रखा है. इसके बावजूद पाकिस्तान की सरकार और सेना भारत विरोध की राजनीति से बाहर आने को तैयार नहीं है.

Islamabad Mosque Blast

आंकड़े बताते हैं कि साल 2026 के शुरुआती 40 दिनों में ही पाकिस्तानी सेना के 108 जवान हमलों में मारे जा चुके हैं. करीब 100 हमले हो चुके हैं. पिछले साल पाकिस्तानी सेना पर 1124 हमले हुए थे, जिनमें करीब तीन हजार लोगों की मौत हुई थी. खैबर पख्तूनख्वा में हमलों में 40 फीसदी का उछाल आया है, जबकि बलूचिस्तान में 26 फीसदी ज्यादा हमले और 30 फीसदी ज्यादा मौतें दर्ज की गई हैं. 

सिंध में भी हमलों में 75 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. यहां तक कि इस्लामाबाद भी अब सुरक्षित नहीं रहा. कुल मिलाकर तस्वीर साफ है. आतंकवाद को पालने-पोसने वाला पाकिस्तान अब उसी आतंक का सबसे बड़ा शिकार बन चुका है. लेकिन सेना और सरकार की जिद का खामियाजा वहां की आम जनता को जान देकर चुकाना पड़ रहा है.

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