नई दिल्ली। यूपी के उन्नाव जिले में हिरासत में मौत के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने आज पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को लेकर एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। कोर्ट ने अब सेंगर की दोषसिद्धि के खिलाफ दायर मुख्य अपील पर रोजाना सुनवाई करने का फैसला किया है।
न्यायमूर्ति रविंदर डूडेजा की पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए इसे रोजाना आधार पर लिस्ट करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने माना कि चूंकि सेंगर की सजा को निलंबित करने की याचिका पहले ही खारिज की जा चुकी है और अपील के निपटारे में देरी हो रही है, इसलिए न्याय के हित में मुख्य अपील पर रोजाना सुनवाई करना जरूरी है। रोजाना सुनवाई की प्रक्रिया 11 फरवरी 2026 से औपचारिक रूप से शुरू होगी। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि उसकी 10 साल की सजा पर कोई रोक नहीं है। सेंगर फिलहाल जेल में ही रहेगा।
इससे पहले 19 जनवरी 2026 को दिल्ली हाई कोर्ट ने कुलदीप सिंह सेंगर की उस अर्जी को खारिज कर दिया था, जिसमें उसने अपनी 10 साल की सजा को निलंबित करने और जमानत देने की मांग की थी। सेंगर ने कोर्ट में कहा था कि वह करीब साढ़े सात साल की जेल काट चुका है और अब उसकी केवल 11 महीने की सजा बाकी है। साथ ही उसने डायबिटीज और आंखों की बीमारियों का हवाला देते हुए इलाज की मांग की थी।
पीड़िता के वकील महमूद प्राचा ने जमानत का कड़ा विरोध करते हुए कहा था कि सेंगर के बाहर आने से परिवार की सुरक्षा को खतरा हो सकता है। कोर्ट ने तब कड़ी टिप्पणी की थी कि “एक परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य की हिरासत में हत्या के मामले में कोई नरमी नहीं बरती जा सकती। यह मामला 2017 की उन्नाव बलात्कार पीड़िता के पिता की मौत से जुड़ा है।
पीड़िता के पिता को अवैध हथियार रखने के आरोप में (सेंगर के दबाव में) गिरफ्तार किया गया था। पुलिस हिरासत में मारपीट और गंभीर चोटों के कारण उनकी मृत्यु हो गई। ट्रायल कोर्ट ने कुलदीप सिंह सेंगर, उसके भाई अतुल सेंगर और अन्य को ‘गैर इरादतन हत्या’ और साजिश का दोषी मानते हुए 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी।

