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Telangana Tiger News: प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि जब तक यह पुष्टि न हो जाए कि बाघ इलाके से निकल गया है, तब तक वे सुबह-सुबह अकेले खेतों में न जाएं और पूरी सतर्कता बरतें. बताया जा रहा है कि यह बाघ पड़ोसी जंगाओं जिले से सिद्धिपेट में दाखिल हुआ है. जिन स्थानों पर मवेशियों का शिकार हुआ है, वहां कैमरा ट्रैप लगाए जा रहे हैं.

तेलंगाना वन विभाग ने बाघ को पकड़ने के लिए अभियान तेज कर दिया है.
हैदराबाद. तेलंगाना के सिद्धिपेट जिले में दहशत का दूसरा नाम ‘बाघ’ बन गया है. कोहेडा मंडल के गांवों में सन्नाटा पसरा है और किसान अपने घरों से निकलने में भी कांप रहे हैं. पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र से भटककर आए एक बाघ ने यहां ‘खूनी खेल’ शुरू कर दिया है. एक ही झटके में 5 बछड़ों का शिकार करने के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है. वन विभाग ने सर्च ऑपरेशन तेज कर दिया है और ग्रामीणों को साफ चेतावनी दी है कि ‘जान प्यारी है तो खेतों में अकेले न जाएं.’
अरेपल्ली में मौत का मंजर: किसान की मेहनत पर फिरा पानी
बाघ का सबसे भयानक रूप कोहेडा मंडल के अरेपल्ली गांव में देखने को मिला. चंद्रनाइक थांडा के पास बाघ ने किसान मलोत रमेश के 5 बछड़ों को अपना निवाला बना लिया. खून से लथपथ शव देखकर ग्रामीणों के होश उड़ गए. इससे पहले घनापुर गांव में किसान बाल रेड्डी की पशुशाला में घुसकर बाघ ने एक बछड़े को मार डाला और दूसरे को अधमरा कर दिया. अक्केनपल्ली और बसवापुरम में भी यही खौफनाक कहानी दोहराई गई है.
प्रशासन का ‘रेड अलर्ट’: बच्चे और बुजुर्ग घरों में रहें
बाघ की मौजूदगी की पुष्टि होने के बाद वन विभाग और पुलिस प्रशासन ने इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया है. अधिकारियों ने बाघ के पंजों के निशान (Pugmarks) बरामद किए हैं और उसके रास्ते को ट्रैक किया जा रहा है. जिन जगहों पर शिकार हुआ है, वहां अत्याधुनिक कैमरा ट्रैप लगाए जा रहे हैं. वन विभाग ने मुनादी करा दी है कि सुबह और शाम के वक्त कोई भी किसान खेत में न जाए. मवेशियों को खुले में बांधने पर रोक लगा दी गई है. महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया है.
महाराष्ट्र से तेलंगाना… अब कहां जाएगा यह शिकारी?
वन विभाग का मानना है कि यह बाघ महाराष्ट्र के जंगलों से निकलकर तेलंगाना में दाखिल हुआ है. पहले यह जंगाओं जिले के अम्मापुर और वेलदंडा में शिकार कर रहा था, अब यह सिद्धिपेट में तबाही मचा रहा है. धूलमिट्टा, बैरनपल्ली और कूटिगल गांवों में भी इसके पंजों के निशान मिले हैं. एक हफ्ते के अंदर तेलुगु राज्यों में यह दूसरी बड़ी घटना है. अभी शुक्रवार को ही आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी में एक बाघ पकड़ा गया था, जो इसी तरह महाराष्ट्र-छत्तीसगढ़ रूट से आया था. अब सवाल यह है कि सिद्धिपेट वाला बाघ कब पिंजरे में कैद होगा?
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राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें

