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तमिलनाडु में दर्दनाक सड़क हादसा, आमने-सामने टकराईं दो बसें, 8 महिलाओं सहित 12 ने मौके पर ही तोड़ा दम


चेन्नई. तमिलनाडु के शिवगंगा जिले में रविवार को ऐसा हादसा हुआ, जिसने पूरे इलाके को हिला कर रख दिया. कराइकुडी के पास दो बसें आमने-सामने टकरा गईं और टक्कर इतनी भीषण थी कि सड़क पर चीख-पुकार मच गई. इस हादसे में मौके पर ही 12 लोगों की मौत हो गई और 40 से ज्यादा लोग घायल हुए. कई यात्री बस में फंस गए थे, जिन्हें बाहर निकालने में पुलिस और स्थानीय लोगों को काफी मशक्कत करनी पड़ी.

घटना रविवार शाम तब हुई, जब दोनों बसें एक संकरी सड़क पर विपरीत दिशाओं से आ रही थीं. अचानक दोनों बसों की आमने-सामने से टक्कर हो गई, जिससे दोनों बसें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं. आसपास के लोग तेज आवाज सुनकर दौड़कर मौके पर पहुंचे और खिड़कियां एवं दरवाजे तोड़कर घायलों को बाहर निकालना शुरू किया. कुछ यात्री बेहोश पड़े थे, कुछ दर्द से चिल्ला रहे थे, और पूरा माहौल बेहद दर्दनाक था.

पुलिस के मुताबिक, यह साफ नहीं है कि हादसा ओवरस्पीडिंग, कम दृश्यता या ड्राइवर की थकान की वजह से हुआ, लेकिन शुरुआती संकेत इन्हीं कारणों की ओर इशारा करते हैं. घायलों को तुरंत शिवगंगा और कराईकुडी के अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां कई यात्रियों की हालत अब भी गंभीर बनी हुई है. कई लोगों को फ्रैक्चर, सिर में चोट और गंभीर चोटें आई हैं.

इस हादसे ने एक बार फिर तमिलनाडु में बढ़ते रोड एक्सीडेंट्स की गंभीर समस्या को सामने ला दिया है. पिछले कुछ महीनों में त्रिची, सलेम और विल्लुपुरम जैसे जिलों में सड़क हादसों के मामले लगातार बढ़े हैं. अभी कुछ दिन पहले ही तेनकासी में दो प्राइवेट बसों की टक्कर में छह लोगों की मौत हो गई थी. यही वजह है कि लोग अब सवाल उठा रहे हैं कि आखिर सड़कों पर इतनी मौतें कब रुकेंगी?

आंकड़ों की मानें तो तमिलनाडु में 2023 में 67,000 से ज्यादा सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं, जो भारत के किसी भी राज्य के लिए सबसे ज्यादा है और देश की कुल दुर्घटनाओं का लगभग 14 प्रतिशत हिस्सा है. सड़क सुरक्षा को लेकर राज्य में समय-समय पर अभियान चलाए जाते हैं. 2025 में भले ही हादसों की संख्या में कमी आई है, फिर भी हादसों का सिलसिला रुकता नहीं दिख रहा है.

पिछले महीने सबरीमाला जा रही एक बस भी इसी तरह रेलिंग से टकरा गई थी, जिसमें कई यात्री घायल हुए थे. शिवगंगा के इस ताजा हादसे के बाद फिर से मांग उठ रही है कि सरकारी बसों की निगरानी बढ़ाई जाए, ड्राइवरों के स्वास्थ्य की नियमित जांच हो, और खराब सड़कों की मरम्मत तुरंत की जाए. पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है.

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