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प्रेमानंद महाराज से मिले ‘महाभारत के युधिष्ठिर’, लिया आशीर्वाद, बोले- राष्ट्र से ऊपर कुछ नहीं… – mahabharat Yudhishthir aka gajendra chauhan meets premanand maharaj dharma vrindavan tmovb


हर रोज तमाम बड़ी हस्तियां प्रेमानंद महाराज के दर्शन करने के लिए वृंदावन जाती रहती हैं. अब महाभारत में युधिष्ठिर का रोल अदा करने वाले गजेंद्र चौहान प्रेमानंद महाराज से मिलने पहुंचे. एक्टर ने वृंदावन पहुंचकर प्रेमानंद महाराज को प्रणाम किया, उनका आशीर्वाद लिया और उनसे कई बातें कीं. 

वृंदावन पहुंचे महाभारत के युधिष्ठिर 
गजेंद्र चौहान अपने बारे में बताते हुए प्रेमानंद महाराज से कहते हैं कि मैंने महाभारत में युधिष्ठिर का किरदार निभाया था. प्रेमानंद महाराज उनसे कहते हैं कि आपका स्वागत है. आपने हमारे बहुत बड़े धर्म के जो स्वरूप हैं, उनका अभिनय किया है. युधिष्ठिर धर्म का अवतार थे, इसीलिए उनका अवतार हुआ था.

एक्टर ने कहा कि आपको महाभारत का एक संवाद सुना दूं. ये अटल बिहारी बाजपेयी जी का भी फेवरेट था. प्रेमानंद महाराज ने कहा कि हां. गजेंद्र चौहान कहते हैं कि कोई भी पुत्र, कोई भी पिता, कोई भी परिवार, कोई भी प्रतिज्ञा, कोई भी परंपरा, राष्ट्र से ऊपर नहीं हो सकती. प्रेमानंद महाराज ने कहा कि बहुत सुंदर. राष्ट्र से ऊपर नहीं होती… बहुत सुंदर. 

भीष्म ने भीष्म प्रतिज्ञा ली थी ना, तो उसको सुनाते हुए युधिष्ठिर ने कहा था कि कोई भी प्रतिज्ञा राष्ट्र के ऊपर नहीं होती. जहां राष्ट्र की बात आएगी, तो प्रतिज्ञा भी तोड़नी पड़ेगी आपको. 

श्रीराम ने काटा 14 वर्षों का वनवास 
महाभारत के युधिष्ठिर ने एक किस्सा सुनाते हुए कहा कि महाराज जी ये उस समय का है, जब महाभारत में पांचाली ने वनवास जाने से मना कर दिया था. युधिष्ठिर ने पांचाली को समझाते हुए कहा था कि श्री राम ये जानते थे कि मृग सोने का नहीं होता. फिर भी वो उसके आखेट पर चले गए, तो क्या ये लोभ था. क्या स्वंय सीता जी नहीं जानती थीं कि मृग सोने का नहीं होता है. 

इसलिए जो होने वाला है, वो हमारे कर्मों का फल है. युधिष्ठिर ने कहा था ना मैं रोक सकता हूं, ना तुम, ना भीम का गदा रोक सकता है, ना अर्जुन के बाण रोक सकते हैं. इसलिए जो लिखा है वो तो कर्म करना ही पड़ेगा उसी का फल मिलेगा. जेष्ठ पिता श्री को प्रतीक्षा करवाना मर्यादा का उल्लंघन होगा. इसलिए वनवास पर चलना ही पड़ेगा.

गजेंद्र चौहान के करियर की बात करें, तो उन्होंने महाभारत के अलावा कई फिल्मों में भी काम किया, लेकिन उन्हें लोग आज भी युधिष्ठिर के किरदार के लिए जानते हैं. वो आखिरी बार 2006 में मेरे जीवन साथी फिल्म में नजर आए थे.

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