बंदर के सिर से मिलता जुलता झबरीले बालों वाला मशरूम कौन सा, कहां मिलता है
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इस मशरूम को मंकी हेड मशरूम कहा जाता है. इसको देखकर आपको यही लगेगा कि ये कोई छोटा सा जीव, जिसके खूब झबरीले बाल हैं.
इसे अंग्रेजी में येलो मंकी हेड मशरूम या आमतौर पर लायन्स मेन मशरूम के नाम से जाना जाता है. इसका वैज्ञानिक नाम हेरिकियम एरिनेसियस है.

ये दुनिया में सबसे अनोखे दिखने वाले मशरूमों में है. इसकी सफेद और रेशेदार बनावट के कारण इसको मंकी हेड या लायंस मेन कहा जाता है. ये खाने में स्वादिष्ट है लेकिन दुर्लभ भी. इसका इस्तेमाल दवाओं में होता रहा है. देखने में ये किसी मशरूम जैसा नहीं बल्कि सफेद बालों वाले किसी छोटे जानवर के सिर या शेर के अयाल जैसा दिखता है.

ये मशरूम दुनिया के विभिन्न हिस्सों में पाया जाता है. ये भारत में हिमाचल के किसान इसकी खेती भी करने लगे हैं. ये आमतौर पर 1500 रुपए से 4000 रुपए किलो तक मिलता है. इसको सूखाकर भी बेचा जाता है तो इसका पाउडर भी खाने में काम आता है. सूखा मंकी हेड मशरूम ज्यादा दामों में बिकता है.

यह मूल रूप से उत्तरी अमेरिका, यूरोप और एशिया का निवासी है. चीन में इसे पारंपरिक रूप से ‘हाउतोगू’ कहा जाता है. ये भारत में मिलता है, लेकिन यह आम बटन मशरूम की तरह सब्जी मंडियों में आसानी से नहीं दिखता.
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भारत के हिमालयी क्षेत्रों और उत्तर-पूर्वी राज्यों में यह कभी-कभी ऊंचे पेड़ों के तनों पर प्राकृतिक रूप से उगता हुआ मिल जाता है. ये आमतौर पर पुराने, मृत या कमजोर पेड़ों की लकड़ी पर उगता है. खासतौर पर चौड़ी पत्ती वाले पेड़ों के तनों या गिरी हुई शाखाओं पर पाया जाता है.

ये एक सैप्रोफाइट है यानी यह मृत लकड़ी को गलाकर अपना भोजन बनाता है. इस तरह जंगल के पारिस्थितिकी तंत्र को साफ रखने में मदद करता है. ये आमतौर पर गर्मियों के अंत से लेकर अगस्त से दिसंबर तक दिखाई देता है.

यूरोप के कई देशों में यह मशरूम दुर्लभ हो गया है. इसे संरक्षित प्रजातियों की सूची में शामिल किया गया है. इसका मुख्य कारण इसके प्राकृतिक आवास यानि पुराने जंगलों का लगातार घटता जाना है.

ये ताजा होने पर बिल्कुल झक सफेद दिखता है. पुराना होने या सूखने पर पीले से भूरे रंग में बदल जाता है. ये आमतौर पर 5 से 40 सेंटीमीटर तक के व्यास का हो सकता है. ये मुलायम और लचीला होता है. ताजा होने पर हल्की सुगंध लेकिन पुराना होने पर तीखी अप्रिय गंध.

इस मशरूम को एशिया में इसे एक स्वादिष्ट व्यंजन माना जाता है. इसका स्वाद कुछ-कुछ समुद्री भोजन जैसे केकड़ा या झींगा मछली जैसा बताया जाता है. पारंपरिक चीनी चिकित्सा में इसका इस्तेमाल सदियों से पेट की बीमारियों, कमजोरी और कैंसर जैसी बीमारियों के इलाज के लिए किया जाता रहा है.

आधुनिक शोध बताते हैं कि इसमें ऐसे यौगिक पाए जाते हैं, जो मस्तिष्क की कोशिकाओं के विकास को प्रोत्साहित कर सकते हैं. इसीलिए इसे याददाश्त बढ़ाने, अल्जाइमर और डिप्रेशन जैसी समस्याओं में लाभकारी माना जाता है.

