बस्तर। छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में आस्था और परंपराओं का अनोखा संगम देखने को मिलता है। इन्हीं में से एक है दंतेवाड़ा जिले में स्थित मुकड़ी मावली माता मंदिर, जिसे प्रेम को मिलाने वाली देवी का दरबार माना जाता है। यहां केवल प्रेमी युवक ही प्रवेश कर सकते हैं, जबकि लड़कियों और महिलाओं का आना पूरी तरह वर्जित है।
यह मंदिर छिंदनार से बारसूर जाने वाले मुख्य मार्ग से लगभग 100 मीटर अंदर पहाड़ी पर स्थित है। मान्यता है कि जो प्रेमी अपनी अधूरी प्रेम कहानी लेकर यहां आते हैं, माता उनकी मुराद पूरी करती हैं। परंपरा के अनुसार युवक अपनी प्रेमिका की तस्वीर, पत्र या कोई प्रतीकात्मक वस्तु देवी के चरणों में अर्पित करते हैं। इन तस्वीरों और पत्रों को पत्थरों के नीचे सुरक्षित रखा जाता है, जिनकी देखरेख पुजारी करते हैं।
मंदिर का ढांचा बेहद साधारण है—चार खंभों पर टिका छोटा सा पत्थर का गर्भगृह, जिसमें देवी विराजमान हैं। यहां सिंदूर, नारियल और अगरबत्ती चढ़ाने की परंपरा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है और दूर-दराज से युवा यहां पहुंचते हैं। कई श्रद्धालुओं का दावा है कि मन्नत मांगने के बाद उनका बिछड़ा प्यार वापस मिला।
मंदिर 24 घंटे खुला रहता है और छिंदनार के पुजारी परिवार पीढ़ियों से पूजा-अर्चना करते आ रहे हैं। वैलेंटाइन डे जैसे अवसरों पर यहां विशेष रूप से युवाओं की भीड़ बढ़ जाती है। रहस्य, आस्था और प्रेम की अनोखी मान्यता के कारण यह मंदिर अब क्षेत्र में खास पहचान बना चुका है।

