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भारत में गरजेंगे देसी राफेल और हैमर मिसाइलें; मोदी-मैक्रों के बीच 5 डिफेंस डील ने बढ़ाई चीन-पाक की धड़कनें


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देसी राफेल से हैमर तक: मोदी-मैक्रों की इन 5 डील ने बढ़ाई चीन-पाक की धड़कनें

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India France Defense Pact: आज मुंबई में पीएम मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों ने रक्षा क्षेत्र में ऐतिहासिक सौदों पर मुहर लगाई. इसके तहत 114 नए राफेल विमानों की खरीद और हैमर मिसाइलों के स्वदेशी निर्माण का रास्ता साफ हो गया है. साथ ही, टाटा-एयरबस की हेलीकॉप्टर असेंबली लाइन का उद्घाटन कर मेक इन इंडिया को नई ऊंचाई दी गई. यह साझेदारी अब जेट इंजन तकनीक और अंतरिक्ष सुरक्षा के क्षेत्र में भारत को वैश्विक शक्ति बनाएगी. इन सभी डिफेंस डील पर पड़ोसी मुल्‍क चीन और पाकिस्‍तान की भी पैनी नजरें हैं.

India France Defense Deal

1. राफेल-एम लड़ाकू विमान (Rafale-M): भारतीय नौसेना की ताकत बढ़ाने के लिए 26 राफेल-एम (समुद्री संस्करण) विमानों का सौदा सबसे महत्वपूर्ण है. अप्रैल 2025 में हुए इस अंतर-सरकारी समझौते का मुख्य उद्देश्य आईएनएस विक्रांत जैसे विमानवाहक पोतों को आधुनिक मारक क्षमता प्रदान करना है. ये विमान हवा से हवा और हवा से सतह पर मिसाइल दागने में सक्षम हैं. इस डील में विशेष ‘टेक्नोलॉजी ट्रांसफर’ शामिल है, जिससे भारतीय इंजीनियर इन विमानों के रखरखाव में सक्षम होंगे. साथ ही, इसमें स्वदेशी मिसाइल प्रणालियों को एकीकृत किया जाएगा. यह विमान नौसेना को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन जैसी शक्तियों के खिलाफ रणनीतिक बढ़त दिलाएगा.

project p-75 scorpion submarine

2. स्कॉर्पीन पनडुब्बी (Project P-75): प्रोजेक्ट-75 के तहत भारत और फ्रांस ने मिलकर छह स्कॉर्पीन श्रेणी की पनडुब्बियों का निर्माण किया है. जनवरी 2025 में छठी पनडुब्बी ‘आईएनएस वाग्शीर’ को भारतीय नौसेना में कमीशन किया गया. ये पनडुब्बियां अपनी ‘स्टील्थ’ तकनीक (दुश्मन के रडार से बचने की क्षमता) के लिए जानी जाती हैं. मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) में बनी ये पनडुब्बियां टॉरपीडो और एंटी-शिप मिसाइलों से लैस हैं. अब दोनों देश अतिरिक्त तीन स्कॉर्पीन पनडुब्बियों के निर्माण पर चर्चा कर रहे हैं, जिनमें ‘एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन’ (AIP) सिस्टम लगाया जाएगा, जिससे वे पानी के भीतर अधिक समय तक रह सकेंगी.

HAMMER Weapon System

3. हैमर मिसाइल (HAMMER Weapon System): ‘हैमर’ (Highly Agile Modular Munition Extended Range) एक सटीक निशाना लगाने वाली फ्रांसीसी मिसाइल है. साफरान और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) के बीच हुए नए समझौते के तहत अब इसका निर्माण पूरी तरह भारत में होगा. यह मिसाइल राफेल और तेजस जैसे विमानों को किसी भी मौसम में बंकरों या दुश्मन के ठिकानों को लंबी दूरी से ध्वस्त करने की शक्ति देती है. मेक इन इंडिया के तहत इसका घरेलू उत्पादन न केवल लागत कम करेगा बल्कि भारतीय वायुसेना के लिए मिसाइलों की निरंतर आपूर्ति भी सुनिश्चित करेगा. यह हथियार पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों में सर्जिकल स्ट्राइक के लिए सर्वोत्तम माना जाता है.

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Safran MRO & Jet Engines

4. एम88 और लीप इंजन (Safran MRO & Jet Engines): फ्रांसीसी कंपनी साफरान ने हैदराबाद में भारत का पहला डीप-लेवल इंजन मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहाल (MRO) केंद्र स्थापित किया है. नवंबर 2025 में शुरू हुआ यह केंद्र सालाना 300 LEAP इंजनों की सर्विसिंग करेगा. इसके अतिरिक्त, राफेल के M88 जेट इंजन की मरम्मत भी अब भारत में ही होगी. सबसे महत्वपूर्ण बातचीत 110kN क्षमता वाले नए लड़ाकू विमान इंजन के सह-विकास (Co-development) पर चल रही है. फ्रांस अपनी शत-प्रतिशत तकनीक साझा करने को तैयार है, जिससे भारत के भावी लड़ाकू विमानों (जैसे AMCA) के लिए स्वदेशी इंजन बनाना संभव हो सकेगा. यह रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में सबसे बड़ा कदम है.

tata airbus h125

5. टाटा-एयरबस H125 हेलीकॉप्टर: भारत और फ्रांस ने नागरिक और सैन्य उपयोग के लिए H125 हेलीकॉप्टरों की एक नई असेंबली लाइन शुरू की है. टाटा और एयरबस के इस साझा प्रोजेक्ट का उद्देश्य भारत को हेलीकॉप्टर निर्माण का वैश्विक केंद्र बनाना है. 2026 में हुए समझौते के तहत, ये हेलीकॉप्टर कर्नाटक स्थित यूनिट में तैयार किए जाएंगे. यह भारत की पहली निजी क्षेत्र की हेलीकॉप्टर निर्माण इकाई है. ये हेलीकॉप्टर उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में रसद पहुंचाने, निगरानी करने और आपदा प्रबंधन में बेहद प्रभावी हैं. इस डील से न केवल सैन्य क्षमता बढ़ेगी, बल्कि रक्षा निर्यात (Export) के नए रास्ते भी खुलेंगे.

Modi Macron Meeting

पीएम ने इस मौके पर कहा कि इसी विश्वास और साझा विजन के आधार पर आज हम अपने संबंधों को विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी के रूप में स्थापित कर रहे हैं. हमें गर्व है कि भारत और फ्रांस मिलकर माउंट एवरेस्ट की ऊंचाइयों तक उड़ान भरने वाला विश्व का एकमात्र हेलीकॉप्टर भारत में बनाएंगे और पूरे विश्व को निर्यात करेंगे.

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