Sat. Feb 7th, 2026

मिसाइल, हेलिकॉप्टर, ड्रोन… पहाड़ों की ‘आंख’ से कुछ नहीं बचेगा, LoC हो या LAC पर दुश्मन मांगेंगे जान की भीख


नई दिल्ली. अगर सब कुछ ठीक रहा तो भारत के पास जल्द ही ‘लो लेवल लाइट वेट रडार’ होंगे, जो कि सेना के एयर डिफेंस मैकेनिज्म को मजबूत करने के लिए एक सर्विलांस सिस्टम के रूप में काम करेंगे. भारतीय सेना की एयर डिफेंस ताकत को निर्णायक बढ़त दिलाने वाला लो-लेवल लाइट वेट रडार (LLLWR) दुश्मनों के लिए बड़ा सिरदर्द साबित हो सकता है.

रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, यह रडार जमीन के बेहद करीब उड़ने वाले ड्रोन, हेलिकॉप्टर और क्रूज़ मिसाइलों को समय रहते पकड़ने में सक्षम है, जिससे दुश्मन की छिपकर वार करने की रणनीति बेअसर हो जाएगी. सूत्रों के अनुसार, LLLWR की सबसे बड़ी खासियत इसका लाइट वेट और मोबाइल होना है. इसे पहाड़ी इलाकों, रेगिस्तान और सीमावर्ती क्षेत्रों में तेजी से तैनात किया जा सकता है. एलओसी और एलएसी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में यह रडार चीनी और पाकिस्तानी ड्रोन घुसपैठ पर प्रभावी अंकुश लगा सकता है.

ड्रोन और मिसाइलों को पकड़ने में सक्षम
रक्षा जानकार बताते हैं कि यह रडार छोटे रडार क्रॉस सेक्शन वाले लक्ष्यों, जैसे कामिकाज़े ड्रोन और लो-फ्लाइंग मिसाइलों, को भी पकड़ने में सक्षम है. यदि इसे आकाश, VSHORAD और अन्य एयर डिफेंस सिस्टम से जोड़ा गया, तो भारतीय सेना को रियल-टाइम टारगेटिंग और तेज प्रतिक्रिया की क्षमता मिलेगी. विशेषज्ञों का मानना है कि LLLWR के शामिल होने से भारत का एयर डिफेंस सिस्टम और अधिक मजबूत होगा और दुश्मन के लिए यह साफ संदेश होगा कि अब नीची उड़ान भी सुरक्षित नहीं रही.

दुश्मनों के सरप्राइज अटैक का अंत
चीन और पाकिस्तान अक्सर पहाड़ी इलाकों का फायदा उठाकर छोटे ड्रोन या हेलीकॉप्टर के जरिए घुसपैठ की कोशिश करते हैं. LLLWR के तैनात होने से दुश्मन का कोई भी विमान या यूएवी (UAV) भारतीय सीमा में ‘अदृश्य’ होकर नहीं घुस पाएगा. यह रडार आकाश मिसाइल सिस्टम या मैन-पोर्टेबल एयर डिफेंस सिस्टम (MANPADS) के साथ मिलकर काम करता है. जैसे ही रडार दुश्मन को देखता है, वह तुरंत मिसाइल सिस्टम को डेटा भेजता है और दुश्मन के हमले से पहले ही उसे हवा में नष्ट कर दिया जाता है.

30 रडार खरीदने की तैयारी
सूत्र के मुताबिक, “लगभग 725 करोड़ रुपये की लागत से” 30 एलएलएलआर की खरीद के लिए आरएफपी जारी किया गया है और यह खरीद त्वरित खरीद प्रक्रिया के तहत की जाएगी. सूत्र ने कहा कि विक्रेता ‘मौजूदा वायु रक्षा नियंत्रण और रिपोर्टिंग प्रणाली के साथ एलएलएलआर (आई) का एकीकरण सुनिश्चित करेगा.”

लो लेवल लाइट वेट रडार की 5 बड़ी ताकतें
निचली उड़ान पकड़ने में माहिर: बड़े रडार अक्सर अधिक ऊंचाई पर उड़ने वाले विमानों को पकड़ते हैं, लेकिन दुश्मन के हेलीकॉप्टर, क्रूज मिसाइलें और ड्रोन रडार से बचने के लिए ‘Nap-of-the-earth’ (जमीन से सटकर) उड़ान भरते हैं। LLLWR विशेष रूप से इसी खतरे को पकड़ने के लिए बना है.

3D निगरानी क्षमता: यह रडार ‘3D’ होता है, यानी यह न केवल लक्ष्य की दिशा और दूरी बताता है, बल्कि उसकी सटीक ऊंचाई (Altitude) भी बताता है. यह 360 डिग्री में घूमकर दुश्मन पर नजर रखता है।

पहाड़ों की ‘आंख’: पहाड़ी इलाकों में घाटियों और वादियों की वजह से ‘शैडो जोन’ (Shadow Zones) बन जाते हैं, जहां बड़े रडार की तरंगे नहीं पहुंच पातीं. यह रडार उन घाटियों में भी दुश्मन की गतिविधियों को देख सकता है.

हर मौसम में कारगर: चाहे लद्दाख की कड़ाके की ठंड हो या अरुणाचल के घने जंगल और बारिश, यह रडार -30 डिग्री से लेकर +55 डिग्री तापमान तक काम करने में सक्षम है.

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