नई दिल्ली: एअर इंडिया (Air India) के गलियारों से एक ऐसी सनसनीखेज खबर सामने आई है, जिसने विमानन जगत (Aviation Industry) में हड़कंप मचा दिया है. यह कहानी किसी तकनीकी गड़बड़ी की नहीं, बल्कि ‘लिखी हुई’ चेतावनी को नजरअंदाज कर सैकड़ों यात्रियों की जान दांव पर लगाने की है. जो सबूत सामने आए हैं, वे सीधे तौर पर एअर इंडिया के मैनेजमेंट और सेफ्टी प्रोटोकॉल की धज्जियां उड़ाते हैं. पायलट की ओर से भरी गई ‘सेक्टर लॉग’ (Sector Log) की एक्सक्लूसिव तस्वीर ने इस पूरे मामले में ‘धमाका’ कर दिया है.
लॉग शीट का खौफनाक खुलासा
एअर इंडिया की फ्लाइट AI 132 जो लंदन (LHR) से बेंगलुरु (BLR) के लिए उड़ान भरने वाली थी, उसके टेक-ऑफ से पहले ही खतरे के सायरन बज चुके थे. पायलट ने अपनी लॉग शीट पर साफ-साफ अक्षरों में दर्ज किया था कि विमान का लेफ्ट फ्यूल कंट्रोल स्विच (Left Fuel Control Switch) गंभीर रूप से खराब है.

लॉग शीट के मुताबिक, स्विच अपनी निर्धारित पोजीशन पर लॉक नहीं हो रहा था. पायलट ने लिखा कि “लेफ्ट फ्यूल कंट्रोल स्विच ‘RUN’ पोजीशन से ‘CUTOFF’ में स्लिप हो रहा है.” स्विच इतना ढीला था कि उसे “हल्के से छूने” (Slightly touched) भर से वह कट-ऑफ मोड में चला जा रहा था. यह महज एक स्विच की खराबी नहीं थी, यह आसमान में इंजन के ‘डेड’ होने का सीधा न्योता था.
टेक्निकल डेंजर: ‘RUN’ से ‘CUT-OFF’ का मतलब?
विमानन विशेषज्ञों (Aviation Experts) की मानें तो यह तकनीकी गड़बड़ी किसी ‘डिजास्टर’ से कम नहीं है. फ्यूल कंट्रोल स्विच वह चाबी है जो विमान के इंजन को ईंधन (Fuel) की सप्लाई जारी रखती है. अगर उड़ान के दौरान वाइब्रेशन या हल्के झटके से यह स्विच ‘RUN’ से ‘CUTOFF’ पर स्लिप हो जाए, तो इंजन को तेल मिलना तुरंत बंद हो जाता है और चलते हुए इंजन ‘सीज’ हो जाते हैं. बोइंग 787 जैसे विमानों में अगर एक इंजन फेल होता है, तो सारा दबाव दूसरे पर आता है. इस स्थिति में एक मामूली गड़बड़ी भी पूरे विमान को ‘पत्थर’ बनाकर जमीन पर गिरा सकती है.
हीथ्रो पर ‘क्रिमिनल नेग्लिजेंस’? क्यों नहीं किया गया AOG!
एविएशन प्रोटोकॉल के तहत, जब लंदन के हीथ्रो एयरपोर्ट पर स्टार्ट-अप के दौरान ही यह समस्या दिख गई थी, तो विमान को तत्काल AOG (Aircraft on Ground) घोषित किया जाना चाहिए था. AOG का मतलब है कि विमान तकनीकी रूप से अनफिट है और जब तक उसे पूरी तरह ठीक नहीं किया जाता, वह उड़ान नहीं भर सकता.
विशेषज्ञों का कहना है कि यह खराबी इलेक्ट्रिकल सिस्टम की एक गहरी बीमारी की ओर इशारा करती है. इसके बावजूद, पायलट की लिखित चेतावनी के बाद भी विमान को बेंगलुरु के लिए क्लीयरेंस दिया जाना न सिर्फ लापरवाही है, बल्कि यात्रियों की जान के साथ जानबूझकर किया गया खिलवाड़ (Criminal Negligence) लग रहा है.
अहमदाबाद क्रैश की यादें: क्या एयर इंडिया ने सबक नहीं लिया?
यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि इसी कैटेगरी के विमान (बोइंग 787) में पूर्व में भी ऐसी दिक्कतें देखी गई हैं. अहमदाबाद क्रैश में भी ‘फ्यूल कंट्रोल स्विच’ की भूमिका जांच के घेरे में रही थी. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या एअर इंडिया ने पुरानी गलतियों से कोई सबक नहीं सीखा?
महत्वपूर्ण सवाल जो खड़े होते हैं
जब पायलट ने लॉग बुक पर खराबी दर्ज कर दी थी, तो इंजीनियरिंग टीम ने उसे ‘उड़ने के लिए फिट’ कैसे बताया? क्या विमान के शेड्यूल को बचाने के लिए सेफ्टी मानकों को ताक पर रख दिया गया? हीथ्रो जैसे वर्ल्ड-क्लास एयरपोर्ट पर प्रोटोकॉल का पालन क्यों नहीं हुआ?
निष्कर्ष: भरोसे की ‘क्रैश लैंडिंग’
पायलट की यह लॉग शीट अब एअर इंडिया के खिलाफ सबसे बड़ा ‘डेथ वारंट’ बनती दिख रही है. यह सीधे तौर पर निर्णय लेने वाली प्रक्रिया और सुरक्षा मानकों में लगी सेंध को उजागर करती है. विमानन सुरक्षा मानकों (Aviation Safety Standards) को लेकर अब नई बहस छिड़ गई है. अगर एअर इंडिया जैसे नामी करियर में ‘मौत के स्विच’ के साथ विमान उड़ाने की इजाजत दी जा रही है, तो यात्रियों के भरोसे की ‘क्रैश लैंडिंग’ होना तय है. अब नजरें DGCA की जांच पर हैं – क्या इन जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी या एक बार फिर बड़े हादसे का इंतजार किया जाएगा?

