- जिम्मेदार तकनीक पर साझा प्रतिबद्धता
नई दिल्ली। इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के समानांतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूरोप के चार देशों-क्रोएशिया, सर्बिया, स्पेन और फिनलैंड-के शीर्ष नेतृत्व से अलग-अलग द्विपक्षीय वातार्एं कर यह संकेत दे दिया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता अब भारत की विदेश नीति का नया रणनीतिक स्तंभ बन चुकी है। इन बैठकों का केंद्र केवल तकनीकी सहयोग नहीं, बल्कि व्यापार, निवेश, जलवायु कार्रवाई और शिक्षा तक फैला व्यापक एजेंडा रहा। क्रोएशिया के प्रधानमंत्री आंद्रेज प्लेंकोविच के साथ हुई वार्ता में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी, नवाचार और स्वच्छ ऊर्जा जैसे उभरते क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाने पर विस्तार से चर्चा हुई।
दोनों देशों ने यह माना कि डिजिटल परिवर्तन और हरित ऊर्जा भविष्य की वैश्विक प्रतिस्पर्धा के निर्णायक क्षेत्र हैं। भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते को शीघ्र अंतिम रूप देने की दिशा में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनी। प्रधानमंत्री मोदी ने क्रोएशिया में भारतीय संस्कृति, योग और आयुर्वेद के प्रति बढ़ती रुचि को दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक सेतु बताया।
सर्बिया के राष्ट्रपति एलेक्जेंडर वुसिक के साथ बैठक में पारंपरिक मित्रता को नई तकनीकी साझेदारी में बदलने पर जोर दिया गया। व्यापार और निवेश के साथ-साथ एआई, वित्तीय प्रौद्योगिकी, शिक्षा, कृषि और पर्यटन में सहयोग को विस्तार देने की संभावनाओं पर चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि उभरती प्रौद्योगिकियां केवल आर्थिक विकास का माध्यम नहीं, बल्कि लोगों के जीवन की गुणवत्ता सुधारने का साधन भी हैं। क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर समन्वय बढ़ाने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया।
स्पेन के राष्ट्रपति पेड्रो सांचेज के साथ हुई बातचीत में आर्थिक सहयोग के साथ स्वास्थ्य, शिक्षा, नवाचार और जलवायु परिवर्तन पर क्रियान्वयन आधारित साझेदारी को प्राथमिकता दी गई। दोनों देशों ने हरित प्रौद्योगिकी और सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता दोहराई। प्रधानमंत्री मोदी ने भारत-यूरोपीय संघ संबंधों को मजबूत बनाने में स्पेन की सक्रिय भूमिका की सराहना की। इससे यह स्पष्ट हुआ कि भारत यूरोप के साथ अपने संबंधों को केवल द्विपक्षीय दायरे में नहीं, बल्कि व्यापक क्षेत्रीय ढांचे में देख रहा है।
फिनलैंड के प्रधानमंत्री पेटेरी ओर्पो के साथ वार्ता में स्थिरता, डिजिटलीकरण और एआई अनुसंधान मुख्य विषय रहे। नैतिक और जिम्मेदार एआई के विकास पर दोनों देशों की सहमति विशेष महत्व रखती है। फिनलैंड को एआई नवाचार का उभरता केंद्र माना जाता है और भारत ने इस क्षेत्र में सहयोग को नई ऊंचाई देने की इच्छा जताई। बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि भारतीय प्रतिभा और फिनलैंड की तकनीकी विशेषज्ञता मिलकर वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी समाधान विकसित कर सकती है।
इन सभी मुलाकातों का साझा संदेश यह रहा कि भारत तकनीक-आधारित साझेदारी के माध्यम से वैश्विक मंच पर अपनी भूमिका को मजबूत करना चाहता है। एआई इम्पैक्ट समिट, जो दुनिया का चौथा ऐसा सम्मेलन है, ने भारत को एक ऐसे मंच के रूप में स्थापित किया है जहां भविष्य की प्रौद्योगिकी, नीति और नैतिकता पर गंभीर विमर्श हो रहा है। इससे पहले 2023 में ब्रिटेन के ब्लेचली पार्क में एआई सुरक्षा शिखर सम्मेलन, 2024 में दक्षिण कोरिया में एआई सोल समिट और 2025 में फ्रांस की राजधानी पेरिस में एआई क्रियान्वयन शिखर सम्मेलन आयोजित हो चुके हैं।
नई दिल्ली में हो रहा यह सम्मेलन ‘पीपल, प्लैनेट और प्रोग्रेस’ के तीन स्तंभों पर आधारित है, जो इस बात को रेखांकित करता है कि तकनीकी विकास केवल आर्थिक वृद्धि तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसे सामाजिक समावेशन और पर्यावरणीय संतुलन से भी जोड़ा जाना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी की यूरोपीय नेताओं से लगातार हो रही मुलाकातों ने यह स्पष्ट किया कि भारत एआई को केवल घरेलू परिवर्तन का साधन नहीं, बल्कि वैश्विक कूटनीतिक पुल के रूप में देख रहा है।
समग्र रूप से देखें तो इन वार्ताओं ने भारत-यूरोप संबंधों को नई ऊर्जा दी है। एआई, हरित ऊर्जा और नवाचार के साझा एजेंडे के माध्यम से भारत ने यह संदेश दिया है कि वह भविष्य की अर्थव्यवस्था में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए तैयार है। तकनीक को केंद्र में रखकर की जा रही यह कूटनीति आने वाले वर्षों में भारत की वैश्विक स्थिति को और मजबूत कर सकती है।

