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Kurnool Bus Fire: त्‍योहार मनाकर लौटने की खुशी, आंखों में सुबह वाली पक्‍की नींद…फिर धधकती ज्‍वाला और चीखते लोग – kurnool bus fire tragedy how people escape hair raising horrible incident inside story


Agency:एजेंसियां

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Kurnool Bus Fire: हैदराबाद से बेंगलुरु जा रही बस में आग लगने से 41 में से सिर्फ 21 यात्री बच सके. प्रत्‍यक्षदर्शियों ने बर्निंग बस से खुद और परिवार को बचाने की रोंगटे खड़ी करने वाली कहानी बताई है.

आंखों में सुबह वाली पक्‍की नींद...फिर धधकती ज्‍वाला और चीखते लोगकुरनूल बस हादसे में 20 लोगों की जिंदा जलने से मौत हो गई. (फोटो: पीटीआई)

Kurnool Bus Fire: त्योहार की खुशियों से भरा वीकेंड खत्म कर घर लौट रहे यात्रियों के लिए 24 अक्‍टूबर 2025 की रात एक ऐसी दहशत बनकर आई, जिसे वे शायद जिंदगी भर भूल न पाएं. हैदराबाद से बेंगलुरु जा रही एक प्राइवेट बस अचानक आग की भयंकर लपटों में घिर गई. गहरी नींद में सोए लोगों की आंख खुली तो सामने मौत नाच रही थी. बस के अंदर चीख-पुकार, धुआं और आग की लपटें थीं. हर तरफ अफरातफरी मच गई. हर कोई जान बचाने के लिए बस से बाहर आने की जद्दोजहद में जुटा था. बस में 41 लोग सवार थे, जिनमें 21 खुशनसीबों की जान ही बच सकी.

किसी ने मोबाइल चलाकर, किसी ने लैपटॉप से, तो किसी ने अपनी कोहनियों और घुटनों से खिड़कियो के शीशे तोड़े. बस से बाहर निकलने की जंग में हर पल भारी पड़ रहा था. दम घोंटता धुआं और जलती पलकों के बीच सिर्फ एक ही ख्याल था – किसी तरह जान बचा लो. ‘जब नींद खुली तो सिर्फ आग थी… पीली-नारंगी… बस मरने का डर…’ एन. रमेश (36) अपनी पत्नी श्रीलक्ष्मी और दो बच्चों के साथ रिश्तेदारों से मिलकर लौट रहे थे. हादसे को याद कर उनकी आवाज अभी भी कांपती है. ‘टाइम्‍स ऑफ इंडिया’ के अनुसार, रमेश ने बताया, ‘आंख खुलते ही सिर्फ आग की लपटें दिखीं. सांस लेना मुश्किल था. सबसे पहले दिमाग में पत्नी-बच्चों का ख्याल आया. मैंने पीछे की खिड़की को मुट्ठियों से तोड़ा और परिवार को बाहर धक्का दिया. उसके बाद हम बस से जितनी दूर भाग सकते थे भागे. उसके बाद फिर जब आंख खुली तो अस्पताल में था.’

दरवाजा जाम था…

बहादुरपल्ली के 26 वर्षीय घंटसाल सुब्रमण्यम को साथी पैसेंजर ने झकझोर कर जगाया.
उन्‍होंने बताया कि सामने आग की लपटें अपने आगोश में लेने के लिए मचल रही थी. दरवाजा खोलने की कोशिश की, लेकिन वो जाम था. तभी देखा कि कोई लैपटॉप से खिड़की तोड़ रहा है. बस फिर बिना सोचे उस रास्ते से कूद गया. एक अजनबी ड्राइवर ने हमें अस्पताल तक छोड़ दिया… आज भी उसका चेहरा याद नहीं, लेकिन जिंदगी भर उसका एहसान रहेगा. विद्यानगर निवासी जयंत कुशवाल बताते हैं – चारों तरफ लोग भाग रहे थे. कोई पीछे की खिड़की तोड़ रहा था, कोई बगल की. हर तरफ कांच के टुकड़े और चीखें थीं. बहुत डरावना मंजर था.

कुछ कर नहीं सका

हयातनगर निवासी नवीन कुमार घटना के बारे में बताते-बताते रुक जाते हैं. उन्‍होंने कहा, ‘सबकुछ सेकंडों में हुआ. किसी को सोचने का मौका ही नहीं मिला. मैं पीछे की तरफ भागा जहां इमरजेंसी एग्जिट तोड़ा गया था. इसी अफरातफरी में मेरा बायां पैर टूट गया. आसपास लोग फंसे थे. मदद करना चाहता था, पर कुछ कर नहीं पाया.’ इस भीषण हादसे में लोगों ने जितना खोया है, उसकी भरपाई शायद कभी न हो पाए. लेकिन उनके साहस, हिम्मत और जिंदगी बचाने की जद्दोजहद की ये कहानियां हमेशा गवाह रहेंगी कि मौत के बिल्कुल सामने खड़े होकर भी इंसान जीने की लड़ाई कैसे लड़ता है.

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Manish Kumar

बिहार, उत्‍तर प्रदेश और दिल्‍ली से प्रारंभिक के साथ उच्‍च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्‍ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्‍लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें

बिहार, उत्‍तर प्रदेश और दिल्‍ली से प्रारंभिक के साथ उच्‍च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्‍ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्‍लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु… और पढ़ें

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आंखों में सुबह वाली पक्‍की नींद…फिर धधकती ज्‍वाला और चीखते लोग

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