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बड़े मुनाफे का झांसा देकर ओडिशा में 6.16 करोड़ की ठगी, मास्टरमाइंड आंध्र प्रदेश से गिरफ्तार – odisha online investment fraud arrest ntcpvz


Bhubaneswar Cyber Fraud: भुवनेश्वर में साइबर अपराधियों ने एक बड़ी ठगी की वारदात को अंजाम दे डाला. उन्होंने सोशल मीडिया के ज़रिए एक कारोबारी को अपने जाल में फंसाया और करोड़ों की ठगी कर डाली. ठगी की इस कहानी का आगाज़ सोशल मीडिया पर आए एक मैसेज से शुरू हुआ. खुद को एक प्रतिष्ठित निवेश संस्था से जुड़ा बताने वाले व्यक्ति ने ओडिशा के एक कारोबारी से संपर्क किया. उसके साथ मीठी बातें की. बड़े मुनाफे और भरोसेमंद प्लेटफॉर्म का दावा किया.

इस तरह उस अनजान शख्स ने उस कारोबारी को ऑनलाइन ट्रेडिंग के लिए तैयार कर लिया. शुरुआत में यह सौदा पूरी तरह प्रोफेशनल और सुरक्षित दिख रहा था. कारोबारी को लगा कि उसे एक बड़ा मौका मिल रहा है. उसका यही भरोसा आगे चलकर करोड़ों की ठगी में तब्दील हो गया. 

करोड़ों के ट्रांजैक्शन का खेल
23 मई से 24 जून 2024 के बीच कारोबारी ने अलग-अलग खातों में पैसे ट्रांसफर करना शुरू किया. साइबर ठग गिरोह के निर्देश पर कुल 6.16 करोड़ रुपये भेजे गए. हर बार भरोसा दिलाया गया कि मुनाफा बढ़ रहा है और पैसा सुरक्षित है. ऑनलाइन डैशबोर्ड पर फर्जी आंकड़े दिखाकर उसे और निवेश के लिए उकसाया गया. कारोबारी को लगा कि उसकी रकम कई गुना बढ़ चुकी है. लेकिन हकीकत में वह एक सुनियोजित ठगी का शिकार बन चुका था.

निकासी के नाम पर नया जाल
जब कारोबारी ने अपना पैसा निकालने की बात कही, तब खेल का असली चेहरा सामने आया. ठगों ने खुद को कस्टमर केयर बताकर 20 फीसदी चार्ज की मांग की. दबाव और डर में आकर कारोबारी ने 89 लाख रुपये और जमा कर दिए. इसके बावजूद पैसे जारी नहीं किए गए. कभी तकनीकी दिक्कत, कभी नियमों का बहाना बनाकर टालमटोल शुरू हो गई. यहीं से कारोबारी को ठगी की आशंका होने लगी. भरोसा अब सवालों में बदल चुका था.

ठगी का एहसास होने पर FIR
लगातार बहानों और पैसों की निकासी न होने पर कारोबारी को समझ आ गया कि यह एक बड़ी साजिश है. उसने खुद को अज्ञात साइबर अपराधियों का शिकार महसूस किया. इसके बाद उसने साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज कराई. शिकायत मिलते ही ओडिशा पुलिस की क्राइम ब्रांच हरकत में आ गई. बैंक खातों, ट्रांजैक्शन डिटेल और डिजिटल सबूतों की जांच शुरू हुई. यहीं से इस अंतरराज्यीय ठगी नेटवर्क की परतें खुलने लगीं.

आंध्र प्रदेश से गिरफ्तारी
जांच के दौरान क्राइम ब्रांच ने आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले तक सुराग जोड़े. वहां से वेदगिरी श्रीनिवासराव (39) को गिरफ्तार किया गया. आरोपी पर इस ऑनलाइन निवेश ठगी में अहम भूमिका निभाने का आरोप है. पुलिस के मुताबिक वह गिरोह के लिए खातों और लेनदेन से जुड़ा काम संभालता था. गिरफ्तारी के बाद आरोपी को भुवनेश्वर लाया गया. उससे पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे होने की उम्मीद है.

पहले ही पकड़े जा चुके हैं 6 आरोपी
इस केस में वेदगिरी से पहले छह अन्य आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं. इनमें गुजरात के सूरत से पांच और पंजाब के लुधियाना से एक आरोपी को पकड़ा गया है. यह साफ हो गया कि ठगी का नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ था. अलग-अलग शहरों से जुड़े लोग मिलकर इस साइबर फ्रॉड को अंजाम दे रहे थे. पुलिस अब गिरोह की पूरी चेन और मास्टरमाइंड तक पहुंचने की कोशिश कर रही है. डिजिटल ट्रेल इस जांच का सबसे बड़ा हथियार है.

और भी खुलासों की उम्मीद
क्राइम ब्रांच के मुताबिक मामले की जांच अभी जारी है. पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस ठगी से और कितने लोग प्रभावित हुए हैं. साथ ही यह भी जांच हो रही है कि रकम किन खातों में और कहां-कहां ट्रांसफर की गई. अधिकारियों का मानना है कि आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं. यह मामला ऑनलाइन निवेश के नाम पर बढ़ते साइबर अपराधों की गंभीर चेतावनी है. पुलिस ने लोगों से सतर्क रहने और बिना जांच-पड़ताल निवेश न करने की अपील की है.
 

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