राजिम। छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान बन चुके राजिम कुंभ कल्प की ख्याति अब देश की सीमाओं को पार कर विदेशों तक पहुंचने लगी है। इटली से आए 8 से 10 विदेशी पर्यटकों के दल ने राजिम कुंभ मेला क्षेत्र में पहुंचकर भारतीय सनातन परंपरा और संत संस्कृति का सजीव अनुभव किया।
विदेशी पर्यटक पहले कुंभ कल्प के संत समागम परिसर पहुंचे, जहां उन्होंने विभिन्न अखाड़ों के संत-महात्माओं से भेंट कर आशीर्वाद लिया। संतों के सान्निध्य में उन्होंने ध्यान, साधना और भारतीय जीवन दर्शन के विषय में जानकारी प्राप्त की। इस दौरान विदेशी श्रद्धालु भारतीय संस्कृति की गहराई और आध्यात्मिक ऊर्जा से विशेष रूप से प्रभावित नजर आए।
पर्यटकों ने मेला क्षेत्र का भ्रमण करते हुए त्रिवेणी संगम, साधु-संतों के शिविर, यज्ञ मंडप, सांस्कृतिक मंच और शासकीय स्टॉल का भ्रमण किया। उन्होंने राजिम कुंभ के सुव्यवस्थित आयोजन, स्वच्छता, सुरक्षा व्यवस्था और लोकसंस्कृति की विविधता की खुलकर प्रशंसा की।
इटली से आए पर्यटक गजेंद्र नथावत, फाबियो मुनारी, पेपिनो मुनारी, जिओलियाना मुनारी, मोरेनो मोंटिको एवं रोसान्जेला लोमेंटी ने मीडिया से चर्चा में अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि “राजिम कुंभ केवल एक धार्मिक मेला नहीं, बल्कि यह भारत की आत्मा से जुड़ा एक जीवंत उत्सव है। यहां आध्यात्म, संस्कृति और मानवता का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। संतों का आशीर्वाद, लोगों की सरलता और परंपराओं की भव्यता हमें भीतर तक छू गई। यह अनुभव हमारे लिए अविस्मरणीय रहेगा।”
पर्यटकों ने बताया कि राजिम घूमने के बाद वे रायपुर के लिए रवाना होंगे, इसके बाद जबलपुर होते हुए दिल्ली जाएंगे। मेला परिसर में विदेशी सैलानियों को देख स्थानीय श्रद्धालुओं और दर्शकों में भी उत्सुकता दिखाई दी। कई लोग उनके साथ सेल्फी लेते और टूटी-फूटी अंग्रेजी में संवाद करते नजर आए।
विदेशी पर्यटक नागा साधुओं के साथ भगवान दत्तात्रेय मंदिर भी पहुंचे, जहां पेशवाई के लिए उपस्थित साधु-संतों से भेंट कर वे अत्यंत प्रसन्न दिखे। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व इजराइल से आए विदेशी पर्यटकों ने भी राजिम कुंभ में संगम तट पर पहुंचकर नदी और मेले के हर दृश्य को अपने कैमरे में कैद किया था।

