Last Updated:
P-8I Submarine Hunters Deal With America: अमेरिका के साथ ट्रेड डील के बाद दोनों देशों के बीच एक और डील की तैयारी चल रही है. यह डील रक्षा सेक्टर से जुड़ी है. इस पर भारत करीब 36 हजार करोड़ रुपये खर्च कर सकता है. अगर यह डील हो जाती है तो हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की नौसेना काफी ताकतवर हो जाएगी. वह चीनी और पाकिस्तानी नौसेना की तैयारियों पर बारीक नजर रख सकेगी.

भारत अमेरिका से छह और पी-8आई विमान खरीदने की योजना पर काम कर रहा है.
P-8I Submarine Hunters Deal With America: अमेरिका के साथ ट्रेड डील के बाद नई दिल्ली और वाशिंगटन के बीच रिश्ते बुलेट ट्रेन की रफ्तार से आगे बढ़ रहे हैं. ट्रेड डील को दोनों देशों के रिश्तों के लिए एक मील का पत्थर बताया जा रहा है. इससे दोनों मुल्कों के बीच व्यापार में और तेजी आने की उम्मीद है. इस डील के बाद अन्य क्षेत्र में भी कई अन्य डील्स पर गाड़ी सरपट दौड़ने लगी है. इसी कड़ी में भारत अपनी नौसेना को और मजबूत बनाने के लिए अमेरिका से छह अतिरिक्त बोइंग पी-8आई टोही विमान खरीदने की तैयारी में जुटा है. द इंडियन एक्सप्रेस अखबार ने रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के हवाले से लिखा है कि रक्षा खरीद बोर्ड ने 16 जनवरी को इन टोही विमानों की खरीद से जुड़ी फाइल पर अपनी मुहर लगा दी. अब 12 फरवरी को होने वाली रक्षा खरीद परिषद (डीएसी) की बैठक में इस विषय पर चर्चा होगी. डीएसी की मंजूरी के बाद सुरक्षा मामलों की कैबिनेट कमेटी इस सौदे पर अंतिम मुहर लगाएगी.
राफेल से दोगुना है दाम
एक टोही विमान की कीमत 5 से 6 हजार करोड़ रुपये
हालांकि बीते पांच सालों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में हथियारों की कीमत काफी बढ़ी है. ऐसे में इस सौदे की लागत भी बढ़ने की संभावना है. कुछ रिपोर्ट के मुताबिक नए सिरे से चल रही बातचीत में छह विमानों का सौदा करीब तीन से चार बिलियन डॉलर यानी 27 हजार से लेकर 36 हजार डॉलर के बीच हो सकती है. यानी एक टोही विमान की कीमत पांच से छह हजार करोड़ रुपये के बीच आने की संभावना है. आप इस कीमत का अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि भारत आज की तारीख में जो 114 राफेल लड़ाकू विमानों का सौदा करने जा रहा है उसमें एक विमान की कीमत करीब 2800 करोड़ रुपये है. यानी अमेरिकी टोही विमान राफेल से भी दोगुना महंगे हैं. इन अमेरिकी टोही विमानों को आसमान का आंख कहा जाता है. यह समंदर की गहराइयों में छिपी चीनी और पाकिस्तानी पनडुब्बियों को डिटेक्ट करने में सक्षम हैं. जहां तक चीन की बात है तो उसके पास भी पी-8आई जैसे टोही विमान नहीं है.
डोकलाम और गलवान के वक्त LAC पर हुई थी तैनाती
निगरानी के मामले में ये दुनिया के सबसे उन्नत विमान हैं. इसमें कोई शक नहीं है. बीते एक दशक में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में निगरानी के लिए ये विमान 44 हजार घंटे से अधिक की उड़ान भर चुके हैं. ये केवल समुद्री नहीं बल्कि जमीनी निगरानी में उस्ताद हैं. 2020 में चीन के साथ डोकलाम और गलवान घाटी में हुए संघर्ष के वक्त वास्तविक नियंत्रण रेखा के चीनी साइड की गतिविधियों की जानकारी लेने के लिए इन विमानों को तैनात किया गया था. इन विमानों की सेवा मानवीय अभियानों को लिए भी ली जा चुकी है. इसको लापता हुए एमएच370 उड़ान की खोज में भी तैनात किया गया था.
चीन के पास क्या है विकल्प?
About the Author

न्यूज18 हिंदी में बतौर एसोसिएट एडिटर कार्यरत. मीडिया में करीब दो दशक का अनुभव. दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, आईएएनएस, बीबीसी, अमर उजाला, जी समूह सहित कई अन्य संस्थानों में कार्य करने का मौका मिला. माखनलाल यूनिवर्स…और पढ़ें

