Thu. Feb 12th, 2026

इमरान लगभग अंधे हुए! PAK में विपक्षियों को ‘निपटाने’ का लंबा ट्रेंड, नवाज-मुशर्रफ को फांसी देने की थी साजिश – Imran khan 15 percent vision almost blind how Pakistan finishes opposition leader ntcppl


‘इमरान खान की आंखों में खून का थक्का जमा हुआ है, इससे उनकी आंखों में काफी नुकसान पहुंचा है, उनकी दाहिनी आंखों में मात्र 15 प्रतिशत ही रोशनी बची है.’ गुरुवार को पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट में जब पाकिस्तान के पूर्व पीएम इमरान खान के वकील ने ये खुलासा किया तो लोग हतप्रभ रह गए. जेल में बंद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री रहे इमरान खान की ये गति हो गई है कि उनकी एक आंख खराब होने को हैं, अगर स्थिति ऐसी ही रही तो वे अंधे भी हो सकते हैं. 

रिपोर्ट्स के अनुसार अडियाला जेल में बद खान को सेंट्रल रेटिनल वेन ऑक्लूजन नाम की गंभीर आंख की बीमारी हो गई है, जिससे उनके दाहिने आंख में करीब 85% दृष्टि हानि हो चुकी है. उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफका दावा है कि जेल प्रशासन द्वारा उचित इलाज न दिए जाने से यह स्थायी अंधेपन का कारण बन सकता है. अपने भाई की हालत बताते बताते इमरान खान की बहन मीडिया के सामने फूट फूट कर रोने लगी. बता दें कि इमरान खान 30 महीने से जेल में बंद हैं.

वो इमरान खान जिन्हें पाकिस्तान की आवाम कभी सिर आंखों पर बिठाकर रखती थी, जिन्होंने पाकिस्तान के लिए क्रिकेट का इकलौता वर्ल्ड कप जीता था, जो पाकिस्तान में सियासत की नई बयार लेकर आए और फिर पीएम बने, उनकी ये हालत पाकिस्तान के इतिहास में विपक्षी नेताओं के साथ होने वाले दमन की एक और कड़ी है, जहां फांसी, निर्वासन और न्यायिक उत्पीड़न जैसे हथकंडे अपनाए जाते हैं. 

नवाज शरीफ, परवेज मुशर्रफ और जुल्फिकार अली भुट्टो जैसे नेताओं के उदाहरण इस पैटर्न को स्पष्ट करते हैं. पाकिस्तान में सत्ता किसी की भी हो अमूमन विपक्ष के नेता का टॉर्चर एक स्थापित परिपाटी है.

कोई भी प्रधानमंत्री यहां अपना पूरा कार्यकाल नहीं पूरा कर सका है. तानाशाहों की भी यहां बुरी गति हुई है. 

लटका दिए गए भुट्टो, बेनजीर को लगी गोली

जुल्फिकार अली भुट्टो 1970 के दशक में पाकिस्तान के लोकप्रिय नेता थे. वे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री भी रहे. लेकिन 1977 में जनरल जिया-उल-हक के तख्तापलट के बाद उन्हें हत्या के झूठे आरोप में गिरफ्तार किया गया और 1979 में फांसी दे दी गई.  

यह फांसी न केवल भुट्टो के राजनीतिक सफाए का प्रतीक थी, बल्कि सैन्य शासन की क्रूरता का उदाहरण भी. जुल्फिकार अली भुट्टो की बेटी बेनजीर भुट्टो को भी कई बार गिरफ्तार किया गया, निर्वासन भेजा गया और आखिरकार 2007 में हत्या कर दी गई. इस दौरान पाकिस्तान में तानाशाह परवेज मुशर्रफ का शासन था. 

यह दिखाता है कि पाकिस्तान में विपक्ष को ‘निपटाने’ के लिए राज्य प्रायोजित हिंसा, आतंकवाद और कानूनी हथियार सभी का इस्तेमाल होता है. 

नवाज को फांसी की सजा सुनाई गई, फिर सौदेबाजी…

पीएमएल-एन के नेता और पूर्व पीएम नवाज शरीफ का मामला और भी जटिल है. 1990 के दशक में तीन बार प्रधानमंत्री बने शरीफ को 1999 में जनरल परवेज मुशर्रफ के तख्तापलट के आरोप में गिरफ्तार किया गया. पाकिस्तान की कंगारू कोर्ट ने नवाज को फांसी की सजा सुनाई गई. लेकिन जबर्दस्त सौदेबाजी के बाद नवाज शरीफ को सऊदी अरब निर्वासन भेज दिया गया. 

2017 में पनामा पेपर्स घोटाले में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें अयोग्य ठहराया और आजीवन राजनीति से प्रतिबंधित कर दिया. शरीफ की पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज का कहना है कि यह सैन्य प्रतिष्ठान की साजिश थी. 

मुशर्रफ का शासन ‘उदार तानाशाही’ का मुखौटा था, लेकिन विपक्ष को कुचलने में उन्होंने भी कोई कसर नहीं छोड़ी. 

मुशर्रफ को भी मौत की सजा, लेकिन निर्वासन में गए…

पाकिस्तान में एक समय काफी लोकप्रिय रहे मुशर्रफ का भी पाकिस्तान में नंबर आया. मुशर्रफ को देशद्रोह के आरोप में मौत की सजा सुनाई गई, लेकिन यहां एक बार फिर से सौदेबाजी हुई. मुशर्रफ की जान तभी बची जब उन्होंने पाकिस्तान छोड़ना कबूल किया. मुशर्रफ निर्वासन में चले और दुबई को अपना ठिकाना बनाया. दुबई में ही गुमनामी में 5 फरवरी  2023 को उनकी मृत्यु हो गई. 

PAK सेना के खिलाफ बोलते ही इमरान के बुरे दिन

इमरान खान का वर्तमान संकट इस चक्र की नवीनतम कड़ी है. 2022 में अविश्वास प्रस्ताव से हटाए गए खान को 2023 से कई मामलों में जेल में रखा गया है. दरअसल इमरान खान ने सत्ता में रहते हुए पाकिस्तान की सबसे ताकतवर एजेंसी पाक सेना से दुश्मनी ले ली थी. इसके बाद उनके बुरे दिन शुरू हो गए.

इमरान की पार्टी पीटीआई का मानना है कि ये सरकार जनमत चुराकर बनाई गई है. उनकी पार्टी का आरोप है कि पाकिस्तान की मौजूदा सरकार सैन्य समर्थित सरकार की रणनीति है, जहां न्यायपालिका का दुरुपयोग कर विपक्ष को कमजोर किया जाता है. 

पाकिस्तान में सैन्य प्रतिष्ठान की भूमिका सर्वोच्च रही है. चार तख्तापलटों ने लोकतंत्र को कमजोर किया, और विपक्षी नेता अक्सर भ्रष्टाचार या देशद्रोह के आरोपों में फंसाए जाते हैं. यह दमन न केवल व्यक्तिगत नेताओं को प्रभावित करता है, बल्कि लोकतंत्र की जड़ों को कमजोर करता है. 

—- समाप्त —-



Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *