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चिकन नेक की क‍िलेबंदी, नापाक मंसूबा रखने वाला चीन सुन ले हुंकार, इनका भी हो गया पक्‍का इलाज – northeast assam first Highway Landing Strip close china border rafale su30mki s400 chicken neck muhammad yunus bangladesh


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चिकन नेक की क‍िलेबंदी, नापाक मंसूबा रखने वाला चीन सुन ले हुंकार

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India-China Border News: भारत बॉर्डर इलाकों में इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर को लगातार मजबूत कर रहा है. रोड से लेकर एयरस्ट्रिप तक डेवलप किए जा रहे हैं. लेह-लद्दाख से लेकर चिकन नेक और तवांग तक में मॉडर्न इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर को डेवलप किया जा रहा है. इसी क्रम में भारत ने एक बड़ा कदम उठाया है, जिससे जरूरत पड़ने पर चीन और बांग्‍लादेश को एकसाथ माकूल जवाब दिया जा सकेगा.

चिकन नेक की क‍िलेबंदी, नापाक मंसूबा रखने वाला चीन सुन ले हुंकारZoom

India-China Border News: भारत-चीन बॉर्डर पर असम के मोरन में हाईवे लैंडिंग स्ट्रिप डेवलप किया गया है. यहां राफेल से लेकर Su-30MKI और C-130 जैसे जेट लैंड कर सकेंगे. (फाइल फोटो)

India-China Border News: चीन और बांग्‍लादेश की सीमा से लगते नॉर्थईस्‍ट में इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर का लगातार विकास किया जा रहा है. खासकर एयरपोर्ट और हाईवे पर ज्‍यादा फोकस किया जा रहा है. अब पूर्वोत्‍तर को एक और तोहफा मिला है. असम के मोरन में पहला हाईवे लैंडिंग स्ट्रिप डेवलप किया गया है. यह इलाका चीन बॉर्डर से तकरीबन 240 किलोमीटर की दूरी पर है. म्‍यांमार की सीमा भी मोरन से कोई ज्‍यादा दूर नहीं है. इस इमर्जेंसी स्ट्रिप का जरूरत पड़ने पर बांग्‍लादेश के लिए भी इस्‍तेमाल किया जा सकता है. बता दें कि मोरन में एयर स्ट्रिप के डेवलपमेंट के काम को उस वक्‍त और रफ्तार दी गई, जब बांग्‍लादेश के मोहम्‍मद यूनुस ने सिलीगुड़ी कॉरिडोर यान चिकन नेक के साथ ही पूर्वोत्‍तर के राज्‍यों का उल्‍लेख किया था. शेख हसीना सरकार के तख्‍तापलट के बाद पिछले कुछ महीनों में बांग्‍लादेश से कई बार चिकन नेक को तोड़ने की बात सामने आ चुकी है. वहीं, चीन की नजर साल 1962 के युद्ध के वक्‍त से ही चिकन नेक पर टिकी है. ऐसे में भारत ने अब मुर्गे की गर्दन की सुरक्षा को लेकर किलेबंदी पूरी मजबूती के साथ शुरू कर दी है. मोरन में हाईवे लैंडिंग स्ट्रिप इसका ही उदाहरण है.

भारत-चीन सीमा पर बढ़ते सामरिक तनाव और पूर्वी सेक्टर में तेजी से बदलते सैन्य समीकरणों के बीच भारत पूर्वोत्तर क्षेत्र में अपनी पहली हाईवे एयरस्ट्रिप को ऑपरेशनल करने जा रहा है. असम के डिब्रूगढ़ जिले में नेशनल हाईवे-2 के मोरन बाइपास पर तैयार की गई 4.2 किलोमीटर लंबी इमर्जेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ELF) अब किसी भी आपात या युद्धकालीन स्थिति में सैन्य विमान संचालन के लिए इस्तेमाल की जा सकेगी. यह सुविधा देश के उत्तर-पूर्वी सीमांत इलाके में अपनी तरह की पहली व्यवस्था है, जहां सामान्य दिनों में यह 4 लेन नेशनल हाईवे के रूप में काम करेगी, लेकिन जरूरत पड़ने पर इसे कुछ ही घंटों में रनवे में बदला जा सकेगा. सैटेलाइट इमेजरी से पता चलता है कि इस परियोजना का निर्माण मार्च 2024 में शुरू हुआ. दिसंबर 2024 की तस्वीरों में राजमार्ग का ढांचा निर्माणाधीन दिखा, जबकि पिछले वर्ष जून से इसे पूर्ण रूप से हाईवे रनवे में बदलने के लिए सहायक और सपोर्ट भवनों का निर्माण तेज हुआ. हाल ही में ट्रायल रन सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है, जिससे यह सुविधा अब पूरी तरह ऑपरेशनल मानी जा रही है.

India-China Border News: भारत-चीन बॉर्डर पर असम के मोरन में हाईवे लैंडिंग स्ट्रिप डेवलप किया गया है. यहां राफेल से लेकर Su-30MKI और C-130 जैसे जेट लैंड कर सकेंगे. (फाइल फोटो)

चीन बॉर्डर के पास, चिकन नेक की किलेबंदी

मोरान स्थित यह ELF भारत-चीन सीमा से लगभग 240 से 300 किलोमीटर और म्यांमार सीमा से करीब 200 किलोमीटर की दूरी पर है. रणनीतिक दृष्टि से यह स्थान बेहद अहम माना जा रहा है. यह रनवे राफेल और Su-30MKI जैसे लड़ाकू विमानों के साथ ही C-17 ग्लोबमास्टर और C-130 जैसे भारी ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट की आपात लैंडिंग और टेक-ऑफ को संभालने में सक्षम है. एयरफोर्स ने मार्च 2022 में देशभर में 28 इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी चिन्हित की थीं. इनमें से 5 असम, 4 पश्चिम बंगाल और 2 बिहार में प्रस्तावित हैं. यानी पूर्वी क्षेत्र में कुल 9 हाईवे एयरस्ट्रिप विकसित किए जाने की योजना है. इसे चिकन नेक की किलेबंदी के तौर पर भी देखा जा रहा है. यह पहल सीमावर्ती इलाकों में त्वरित सैन्य तैनाती, राहत एवं बचाव अभियानों और आपदा प्रबंधन को मजबूती देगी.



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