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पुष्‍पक विमान की स्‍पीड से मंजिल तक पहुंचाएगी, पर जेब कितनी होगी ढीली, आम पैसेंजर्स की होगी मौज या ताकेंगे मुंह – Mumbai Ahmedabad bullet train ticket price railway minister Ashwini Vaishnaw first time tell vande bharat rajdhani express


Mumbai-Ahmedabad Bullet Train: हमारे धर्म ग्रंथों में सैकड़ों-हजारों साल पहले ही एयर ट्रैवल का कॉन्‍सेप्‍ट दिया गया था. हवा में मन की गति से चलने वाले पुष्‍पक विमान में सभी तरह की सुख-सुविधाएं होने की बात कही जाती है. इसकी तुलना आज के ट्रांसपोर्ट सिस्‍टम से भी की जाती है. खैर यह बात धार्मिक कथाओं पर निर्भर है. 21वीं सदी में टेक्‍नोलॉजी ने काफी प्रगति की है. एक तरफ हवा में एक से बढ़कर एक हवाई जहाज लोगों को हजारों किलोमीटर दूर ते ले जा रहे हैं तो दूसरी तरफ जमीन पर बुलेट ट्रेन जैसे सिस्‍टम का जाल बिछ रहा है. चीन, जापान जैसे देशों को इसमें महारात हासिल है. अब भारत भी इस रेस में शामिल हो गया है. मुंबई से अहमदाबाद के बीच बुलेट ट्रेन चलाने की योजना पर काम काफी तेजी से चल रहा है. लेकिन सबके मन में एक ही सवाल है- हजारों करोड़ की लागत से डेवलप हो रहे हाई-स्‍पीड रेल कॉरिडोर यानी बुलेट ट्रेन कॉरिडोर में सफर करने पर कितना किराया चुकाना होगा. रेलमंत्री अश्विनी वैष्‍णव ने बुलेट ट्रेन की ट‍िकट प्राइसिंग को लेकर बड़ी बात कही है.

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना को लेकर केंद्र सरकार ने टिकट दरों पर बड़ा संकेत दिया है. केंद्रीय रेलमंत्री अश्विनी वैष्‍णव ने संसद में लिखित जवाब में कहा कि प्रस्तावित मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन के किराए मौजूदा रेल और हवाई यात्रा विकल्पों के मुकाबले में ही रखे जाएंगे. उन्होंने स्पष्ट किया कि टिकट मूल्य निर्धारण ऐसी संरचना पर आधारित होगा, जिससे यात्रियों को समय की बचत के साथ-साथ किफायती विकल्प भी मिल सके. 11 फरवरी 2026 को लोकसभा में पूछे गए सवालों के जवाब में रेलमंत्री ने परियोजना की प्रगति, संभावित समयसीमा, यात्री क्षमता, किराया रणनीति और वित्तीय व्‍यवस्‍था पर विस्तार से जानकारी दी. सांसद पीसी मोहन, माला रॉय और कलानिधि वीरास्वामी द्वारा उठाए गए प्रश्नों के उत्तर में मंत्री ने बताया कि यह परियोजना दीर्घकालिक दृष्टिकोण से तैयार की गई है और इसकी व्‍यवहारिकता का आकलन अनुमानित यात्री मांग, आर्थिक लाभ, समय की बचत और क्षेत्रीय विकास जैसे पहलुओं को ध्यान में रखकर किया गया है.

508 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर

508 किलोमीटर लंबा Mumbai-Ahmedabad High-Speed Rail Corridor (MAHSR) प्रोजेक्ट इस समय निर्माणाधीन है. इसे जापान सरकार की तकनीकी और वित्तीय सहायता से विकसित किया जा रहा है. यह कॉरिडोर महाराष्ट्र, गुजरात और केंद्र शासित प्रदेश दादरा एवं नगर हवेली से होकर गुजरेगा. परियोजना के तहत कुल 12 स्टेशनों की योजना बनाई गई है, जिनमें मुंबई, ठाणे, विरार, बोइसर, वापी, बिलिमोरा, सूरत, भरूच, वडोदरा, आनंद, अहमदाबाद और साबरमती शामिल हैं. ‘इंडियन एक्‍सप्रेस’ की रिपोर्ट के अनुसार, रेलमंत्री ने बताया कि यह प्रोजेक्‍ट अत्यंत जटिल और टेक्‍नोलॉजी बेस्‍ड है. इसे हाइएस्‍ट सिक्‍योरिटी स्‍टैंडर्ड और कड़े रखरखाव प्रोटोकॉल के अनुरूप डिजाइन किया गया है. जापानी रेलवे के सहयोग से विकसित इस सिस्‍टम को भारतीय जरूरतों और क्‍लाइमेट कंडीशन के अनुसार अनुकूलित किया गया है.

कब चलेगी बुलेट ट्रेन?

अश्विनी वैष्‍णव ने कहा कि प्रोजेक्‍ट कब पूरी तरह से तैयार होगी, इसका आकलन तभी संभव होगा, जब सिविल स्‍ट्रक्‍चर्स, ट्रैक बिछाने, इलेक्ट्रिसिटी, सिग्नलिंग, टेलीकम्‍यूनिकेशन और ट्रेनसेट की सप्‍लाई से जुड़े सभी काम पूरे हो जाएंगे. वर्तमान में विभिन्न खंडों पर पुल, वायाडक्ट और स्टेशन संरचनाओं का निर्माण तेजी से चल रहा है. उन्होंने यह भी बताया कि परियोजना के लिए लगभग 1000 भारतीय इंजीनियरों और कुशल श्रमिकों को जापानी पद्धति के तहत प्रशिक्षित किया गया है. सूरत में एक विशेष ट्रैक प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किया गया है, जहां नियमित प्रशिक्षण और रिफ्रेशर कोर्स आयोजित किए जा रहे हैं. वर्तमान में ट्रैक से जुड़े कार्य इन्हीं प्रशिक्षित पेशेवरों की निगरानी में किए जा रहे हैं.

यात्री क्षमता और आर्थिक प्रभाव

सरकार के अनुसार, यह हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर हाई-फ्रीक्वेंसी ऑपरेशन के लिए डिजाइन किया गया है, जिससे बड़ी संख्या में यात्रियों को कम समय में यात्रा सुविधा मिल सकेगी. मुंबई से अहमदाबाद के बीच यात्रा समय में भारी कमी आने की संभावना है, जिससे व्यापार, उद्योग और क्षेत्रीय संपर्क को बढ़ावा मिलेगा. परियोजना की वित्तीय पहलू का मूल्यांकन दीर्घकालिक लाभों को ध्यान में रखकर किया गया है. सरकार का मानना है कि समय की बचत, रोजगार सृजन, तकनीकी हस्तांतरण और बुनियादी ढांचे के विकास जैसे कारक इसे आर्थिक रूप से मजबूत बनाएंगे. मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना को देश की पहली हाई-स्पीड रेल सेवा के रूप में देखा जा रहा है. किराए को प्रतिस्पर्धी रखने की घोषणा से यह संकेत मिलता है कि सरकार इसे केवल प्रीमियम सेवा तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि मध्यम वर्ग और नियमित यात्रियों के लिए भी सुलभ बनाने की दिशा में काम कर रही है.

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