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Surya Grahan 2026 Live:आज इतने देर तक चलेगा सूर्य ग्रहण,दुनिया के कई हिस्सों में दिखा रिंग ऑफ फायर – Surya Grahan 2026 In India Date Timings Sutak Kaal Time Solar Eclipse Effects Surya Grahan Kitne Baje Lagega


07:18 PM, 17-Feb-2026

सूर्य ग्रहण के बाद करें दान 

सूर्य ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान कर पूजा-अर्चना करें। श्रद्धा अनुसार गरीब लोगों को चना, गेहूं, गुड़ और दाल का दान करें। इसके अलावा केले, बेसन के लड्डू और पेड़े का भी दान करना चाहिए।  लाल रंग के वस्त्र, दूध और चावल का भी दान कर सकते हैं।

07:07 PM, 17-Feb-2026

Surya Grahan 2026: कब खत्म होगा सूर्य ग्रहण ?

दुनिया के कई देशों में सूर्य ग्रहण के दौरान वलयाकार सूर्य ग्रहण का नजारा दिखाई दिया, जिसे रिंग ऑफ फायर के नाम से जाना जाता है। सूर्य ग्रहण का चरम काल अब समाप्त हो चुका है और यह ग्रहण शाम 07 बजकर 57 मिनट पर खत्म होगा।

06:44 PM, 17-Feb-2026

साल का पहला सूर्य ग्रहण और रिंग ऑफ फायर

अंटार्कटिका में दिखा रिंग ऑफ फायर का नजारा

 

06:41 PM, 17-Feb-2026

Solar Eclipse 2026: इस सूर्य ग्रहण का सूतक काल 

भारत में इस सूर्य ग्रहण को नहीं देखा जा सका है, इस कारण से इसका सूतक काल मान्य नहीं है। सूर्य ग्रहण में सूतक काल 12 घंटे पहले और जबकि चंद्र ग्रहण में 9 घंटे पहले सूतक काल लग जाता है। सूतक काल को अशुभ माना जाता है। 

 

06:32 PM, 17-Feb-2026

Surya Grahan 2026: दुनिया के कई हिस्सों में दिखा रिंग ऑफ फायर

दुनिया के कई देशों में आज साल का पहला सूर्य ग्रहण देखा गया। इस दौरान कई जगहों पर रिंग ऑफ फायर का नजारा देखने को मिला। इस घटना को वलयाकार सूर्य ग्रहण कहा जाता है। जिसमें यह नजारा तब बनता है जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य की बीच पहुंचकर  सूर्य के बीच वाले हिस्सों को ढक लेता है। जिसमें केवल सूर्य का बाहरी चमकदार आकृति दिखाई देती है। 

 

06:23 PM, 17-Feb-2026

Surya Grahan 2026 Timing: कब खत्म होगा सूर्य ग्रहण?

  • सूर्य ग्रहण आज दोपहर में 3:26 बजे शुरू हुआ था।
  • इस दौरान शाम 5.42 बजे ग्रहण अपने चरम पर रहा
  • एक घंटे बाद यह ग्रहण समाप्त होने वाला है। 
  • शाम 07: 57 बजे सूर्य ग्रहण समाप्त हो जाएगा।

06:11 PM, 17-Feb-2026

Annular Solar Eclipse 2026: कंकण सूर्य ग्रहण

जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच सूर्य की रोशनी आंशिक या पूर्ण रूप से लगती है, तब सूर्य ग्रहण बनता है। लेकिन हर सूर्य ग्रहण वैसा नहीं होता। यदि ग्रहण के समय चंद्रमा पृथ्वी से अधिक दूरी पर हो, तो वह आकार में छोटा तथा सूर्य में दिखाई देता है

ऐसी स्थिति में सूर्य का मध्य भाग चंद्रमा से ढका हुआ है, जबकि उसकी बाहरी चमक दिखाई देती है। यह दृश्य अग्नि की अंगूठी या चमकती हुई वस्तु जैसा प्रतीत होता है। इसी कारण से इसे कंकण सूर्य ग्रह, वलयाकार सूर्य ग्रह कहा जाता है।

06:02 PM, 17-Feb-2026

Surya Grahan 2026: ग्रहण के समय ध्यान रखने योग्य बातें

  • ग्रहण काल में बाहर निकलने से बचें, भले ही यह भारत में दिखाई न दे।
  • गर्भवती महिलाएं सुई, कैंची या अन्य धारदार वस्तुओं का उपयोग न करें।
  • ग्रहण शुरू होने के बाद भोजन न करें।
  • सकारात्मक ऊर्जा के लिए “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” या गायत्री मंत्र का जाप करें।

05:51 PM, 17-Feb-2026

Surya Grahan Mantra: सूर्य ग्रहण के दौरान करें इन 5 मंत्रों का जाप

सूर्य गायत्री मंत्र

ॐ भास्कराय विद्महे महातेजाय धीमहि तन्नो सूर्य: प्रचोदयात्।

सूर्य बीज मंत्र

ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः।

सूर्य का तांत्रिक मंत्र

ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः।

सूर्य का वैदिक मंत्र

ॐ आकृष्णेन रजसा वर्तमानो निवेशयन्नमृतं मर्त्यञ्च।

हिरण्ययेन सविता रथेन देवो याति भुवनानि पश्यन्।।

सूर्य का सरल मंत्र

ॐ सूर्याय नमः।

05:41 PM, 17-Feb-2026

Surya Grahan 2026 Katha: सूर्य ग्रहण की पौराणिक कथा

हिंदू पुराणों में राहु और केतु को असुर शक्तियों का प्रतीक माना गया है। सूर्य ग्रहण से जुड़ी कथा समुद्र मंथन की घटना से संबंधित मानी जाती है। मान्यता के अनुसार जब देवता और दानवों ने मिलकर क्षीरसागर का मंथन किया, तब उसमें से अमृत कलश प्रकट हुआ। अमृत प्राप्त करने के लिए दोनों पक्षों के बीच विवाद उत्पन्न हो गया, क्योंकि जो भी अमृत पी लेता, वह अमर हो जाता।

स्थिति को संभालने के लिए भगवान विष्णु ने मोहिनी का रूप धारण किया। मोहिनी रूप में उन्होंने चतुराई से अमृत का वितरण शुरू किया और केवल देवताओं को ही अमृत पिलाने लगे। दानवों को इस बात का आभास नहीं हुआ कि उनके साथ छल हो रहा है।

इसी दौरान राहु नामक एक असुर ने देवता का वेश बना लिया और चुपके से देवताओं की पंक्ति में जाकर बैठ गया। उसने भी अमृत की कुछ बूंदें ग्रहण कर लीं। तभी सूर्य देव और चंद्र देव ने राहु को पहचान लिया और इसकी जानकारी भगवान विष्णु को दे दी।

भगवान विष्णु ने तुरंत सुदर्शन चक्र से राहु का सिर उसके धड़ से अलग कर दिया। हालांकि, अमृत का स्पर्श हो जाने के कारण उसका सिर अमर हो चुका था। कहा जाता है कि राहु का कटा हुआ सिर आकाश में स्थापित हो गया, जबकि धड़ केतु के रूप में जाना गया।

पौराणिक मान्यता है कि राहु सूर्य और चंद्रमा से क्रोधित रहता है, क्योंकि उनकी वजह से उसका भेद खुला था। यही कारण है कि वह समय-समय पर सूर्य और चंद्रमा को निगलने का प्रयास करता है। जब वह सूर्य को ग्रसता है, तब सूर्य ग्रहण होता है और जब चंद्रमा को ग्रसता है, तब चंद्र ग्रहण लगता है।

इस प्रकार सूर्य ग्रहण की यह कथा धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष महत्व रखती है।



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