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Assam Chunav: होली बाद असम चुनाव की घोषणा, राज्य में NDA का पलड़ा कितना भारी?


Assam Chunav: असम की 126 सदस्यीय विधानसभा का कार्यकाल 30 मई को समाप्त हो रहा है. सूत्रों की माने तो चार मार्च को होली के बाद से आठ मार्च के बीच निर्वाचन आयोग असम विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर सकता है. चुनाव तारीखों के ऐलान और वोटिंग के दिन में कम से कम 25 दिनों का अंतराल रखा जाएगा. ऐसे में मार्च के पहले हफ्ते में असम में चुनाव आदर्श चुनाव संहिता लागू हो सकती है. असम में विधानसभा चुनाव एक ही चरण में कराए जाएंगे. जानकारी के मुताबिक ऐसे में असम विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग अप्रैल के पहले हफ्ते यानी तीन से सात अप्रैल के बीच में हो सकती है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर असम चुनाव के लिए पार्टी की ओर से स्टार प्रचारक रहेंगे. असम बीजेपी ने चुनाव तारीखों के ऐलान के बाद पीएम मोदी से आठ से 10 रैलियों के लिए समय मांगा है.

मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा के नेतृत्व में सत्ताधारी बीजेपी ने असम में तीसरी बार सत्ता बरकरार रखने के लिए कमर कस ली है. चुनाव में लगातार तीसरी बार जीत सुनिश्चित करने के लिए जरूरी तीन सबसे महत्वपूर्ण बातें भी लगभग तय है. पहला, नेतृत्व का मसला जो बीजेपी आलाकमान के लिए साफ है यानी मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व में ही असम का चुनाव लड़ा जाएगा.

दूसरा मसला ये है कि दस साल की एंट इकंबेंसी के बाद कितने विधायकों के टिकट काटे जा सकते हैं. सूत्रों के मुताबिक जिस विधायक के खिलाफ थोड़ी भी एंटी इनकंबेंसी होगी, उसका टिकट काट दिया जाएगा. संकेत इस बात के भी आ रहे हैं कि बीजेपी इस बार 25 से 30 नए उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतार सकती है.

आखिर में तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण मसला है चुनाव जीतने के लिए जरूरी मुद्दे को जनता के सामने उठाना. असम में बीजेपी की राज्य ईकाई ने चुनाव जिताने वाले मुद्दों को दो कैटेगरी में बांटा है. पहली कैटेगरी में वो बड़े मुद्दे हैं जिनका असम समेत देश भर में असर है. इसमें अवैध घुसपैठ, असम सरकार की विकास योजनाएं, मोदी सरकार द्वारा प्रदेश में चलाई गईं विकास योजनाएं, कांग्रेस के प्रदेश नेतृत्व खासकर गौरव गोगोई के पाकिस्तान से लिंक, हिंदुत्व और महिलाओं के सशक्तिकरण से जुड़े मुद्दे है.

जमीनी मुद्दों पर भी जोर

वहीं दूसरी तरफ माइक्रो लेवल यानी लोकल और जमीनी मुद्दों पर भी जोर शोर से काम हो रहा है. इसके लिए हिमंता सरकार ने गांव, ब्लॉक, जिले स्तर की लगभग 100 मुद्दों को चिन्हित कर उसका हल निकाला है. इसमें आंगनबाड़ी, चाय बागान , सरकारी कर्मचारी आदि हैं जिनके लिए किए गए काम पर वोट मांगे जाएंगे.

पार्टी नेतृत्व को भरोसा है कि इस बार एनडीए को असम में 90 से 100 सीटें जीतेगी. पिछले विधानसभा चुनावों में बीजेपी के नेतृत्व वाले गठबंधन ने 126 में से 75 सीटें जीतीं थीं. बीजेपी को जीत का भरोसा इसलिए भी है कि कांग्रेस ने 2021 में बदरुद्दीन अजमल की एआईयूडीएफ और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट के साथ अपना महाजोत तोड़ दिया था. अब गौरव गोगोई के नेतृत्व में असम कांग्रेस का हाल ये है कि अंदरुनी कलह और शीर्ष नेताओं के पार्टी छोड़ कर जाने की नौबत आ गई है. बदरुद्दीन अजमल चुनाव तो लडेंगे लेकिन अब उनके वोट बैंक में पहले जैसी विश्वसनियता बरकरार नहीं रह पायी है. अजमल ने असदउद्दीन औवेसी को भी असम चुनावों में गठनबंधन बना कर लड़ने का प्रस्ताव दिया था लेकिन वो भी नकार दिया गया.

जाहिर है असम में एनडीए की लोकप्रियता का कारण है मोदी सरकार और राज्य सरकार की समाज कल्याण योजनाओं का दूर दराज के इलाकों में समाज के हर तबके तक पहुंचना. छात्रों को भत्ता, गरीबों को कैश ट्रांसफर, वंचितों और शोषितों को पेंशन, चाय बागान के मजदूरों को आर्थिक सहायता मिलने के कारण ग्रामीण परिवारों खास कर महिलाओं और कम आमदनी वाले तबकों को खासी राहत मिलने लगी है.

मिशन वसुंधरा के तहत गरीब आदिवासियों को जमीन का मालिकाना हक देने का काम भी कई इलाकों में एनडीए को मजबूत कर रहा है. मुख्मंत्री हिमंता बिस्वा सरमा का घुसपैठियों के खिलाफ अभियान भी रंग लाने लगा है. इसलिए माना ये जा रहा है कि एनडीए को इस विधानसभा चुनाव में बढ़त पहले से ही नजर आ रही है.

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