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Gold Silver Price:सोने का भाव 1.60 लाख रुपये के करीब, चांदी की कीमतों में क्या बदलाव जानिए – Gold Price Today Silver Price Us Fed Rate Cut Bullion Market Kotak Securities Hdfc Securities


शादी-ब्याह के सीजन के बीच सोने की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है, जबकि चांदी के बाजार में भारी अस्थिरता देखने को मिल रही है। कमजोर वैश्विक संकेतों और अमेरिकी अर्थव्यवस्था के मजबूत आंकड़ों ने ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है, जिसका सीधा असर सर्राफा बाजार पर पड़ा है। गुरुवार को दिल्ली में सोने की कीमतें गिर गईं, जबकि चांदी सपाट स्तर पर बनी रही।

400 रुपये टूटा सोने का भाव 

ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन के मुताबिक, राजधानी दिल्ली में 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने का भाव 400 रुपये गिरकर 1,60,900 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। इससे पहले बुधवार को यह 1,61,300 रुपये पर बंद हुआ था। हालांकि, चांदी की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ और यह 2,68,500 रुपये प्रति किलोग्राम पर स्थिर रही।

अमेरिका से आए आंकड़ों ने बिगाड़ा खेल 

बाजार के जानकारों का कहना है कि सोने में आई इस गिरावट की मुख्य वजह अमेरिका से आए रोजगार के आंकड़े हैं। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के कमोडिटी एनालिस्ट सौमिल गांधी के मुताबिक, अमेरिका में उम्मीद से बेहतर लेबर डेटा आने के बाद फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में जल्द कटौती की उम्मीदें कम हो गई हैं।

जनवरी के लिए जारी अमेरिकी ‘नॉन-फार्म पेरोल रिपोर्ट’ में बताया गया है कि वहां की अर्थव्यवस्था में 1.3 लाख नई नौकरियां जुड़ी हैं और बेरोजगारी दर घटकर 4.3 प्रतिशत रह गई है। इस मजबूत आर्थिक डेटा ने निवेशकों को सोने से दूर कर दिया है।

चांदी में 46 साल की सबसे बड़ी उठापटक 

कोटक सिक्योरिटीज की एक रिपोर्ट ने चांदी को लेकर चिंताजनक तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट के अनुसार, चांदी अपने 29 जनवरी के रिकॉर्ड स्तर से करीब एक-तिहाई टूट चुकी है। बाजार में कम लिक्विडिटी और आक्रामक पोजिशनिंग के कारण चांदी में कीमतों का उतार-चढ़ाव 1980 के बाद सबसे चरम स्तर पर पहुंच गया है।

वैश्विक बाजार में भी स्पॉट गोल्ड 0.43% गिरकर 5,062.46 डॉलर प्रति औंस पर आ गया, जबकि चांदी लगभग 2% गिरकर 82.84 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी।

आगे क्या होगा?

विश्लेषकों का मानना है कि भले ही ब्याज दरों में देरी के कारण सोने पर दबाव है, लेकिन भू-राजनीतिक तनाव और सेंट्रल बैंकों द्वारा लगातार की जा रही खरीदारी इसे निचले स्तर पर सहारा देगी। अब बाजार की नजरें अमेरिका के बेरोजगारी के दावों और शुक्रवार को आने वाले उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) के आंकड़ों पर टिकी हैं, जो आगे की दिशा तय करेंगे।

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