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IAS Story: आईएएस अफसर बनने के लिए छोड़ दी बैंक की नौकरी, बीटेक के बाद किया था MBA


नई दिल्ली (Aaditya Pandey IAS Story). पटना की गलियों से निकलकर देश की सबसे प्रतिष्ठित सेवा यानी सिविल सर्विस के टॉप पायदान तक पहुंचना कोई मामूली उपलब्धि नहीं है. आईएएस आदित्य पांडे की कहानी उन युवाओं के लिए शानदार उदाहरण है, जो लीक से हटकर चलने का साहस रखते हैं. पटना के ‘विशुनपुर पाकरी’ जैसे छोटे से गांव में जन्मे आदित्य ने केंद्रीय विद्यालय से स्कूली शिक्षा और LPU से इलेक्ट्रॉनिक्स में इंजीनियरिंग की. लेकिन, करियर के प्रति उनकी स्पष्टता तब दिखी जब उन्होंने इंजीनियरिंग में रुचि न होने के कारण MBA चुना और IIT रुड़की जैसे प्रतिष्ठित संस्थान से डिग्री हासिल की.

इसके बाद उन्हें ICICI बैंक में नौकरी मिली. वहां वह Apple और Samsung जैसे ग्लोबल दिग्गजों के को हैंडल करने वाली स्ट्रैटजी एंड मार्केटिंग टीम से जुड़े थे. लेकिन इस बीच उन्होंने IAS अफसर बनने का फैसला किया और नौकरी छोड़ दी. करियर के इस मोड़ पर सिविल सेवा की अनिश्चित राह चुनना बड़ा जोखिम था. 2019 में इस्तीफा देने के बाद आदित्य पांडे ने अपनी पूरी एनर्जी यूपीएससी परीक्षा की तैयारी में झोंक दी. उनका यह सफर केवल किताबों तक सीमित नहीं था, बल्कि ‘सेल्फ-स्टडी’, अटूट इच्छाशक्ति और प्रभु सियाराम में उनकी अगाध श्रद्धा की ऐसी महागाथा है, जिसने उन्हें 3 सालों के कठिन संघर्ष के बाद AIR 48 के गौरवशाली शिखर तक पहुंचाया.

असफलता से आत्मविश्वास का सफर

आदित्य की यूपीएससी यात्रा उतार-चढ़ाव भरी रही. पहले प्रयास (2020) में सिलेबस की जानकारी सही नहीं होने और कोविड के कारण 25 अंकों से चूक गए थे. दूसरे प्रयास में भी सफलता हाथ नहीं लगी, जिससे उन्हें थोड़ा डर लगा. इसमें वह महज 2.5 अंकों से असफल हुए थे. लेकिन दोस्तों और ईश्वर के प्रति उनकी आस्था ने उन्हें टूटने नहीं दिया. तीसरे प्रयास (2022) में 6-8 घंटे की लगातार पढ़ाई ने उनके इरादों को फौलाद बना दिया, जिसके परिणामस्वरूप उन्होंने अंतिम सूची में अपनी जगह बनाई.

प्रारंभिक परीक्षा: विषयों पर मजबूत पकड़

आदित्य पांडे ने यूपीएससी प्रीलिम्स के लिए ‘लिमिटेड रिसोर्सेज’ का पालन किया:

1- पॉलिटी: पूरी तरह लक्ष्मीकांत पर निर्भर रहे और खुद नोट्स बनाए.

2- इकोनॉमी: मृणाल पटेल के लेक्चर्स और रमेश सिंह के चुनिंदा टॉपिक्स.

3- भूगोल और पर्यावरण: कक्षा 11-12 की NCERTs और शंकर IAS की किताब. मैपिंग के लिए सुदर्शन गुर्जर के वीडियो का सहारा लिया.

4- CSAT: कैट (CAT) पृष्ठभूमि के कारण वे इसमें सहज थे, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि यहां केवल 67 अंक लाना ही उनका मुख्य लक्ष्य था.

मुख्य परीक्षा और दर्शनशास्त्र

दर्शनशास्त्र को वैकल्पिक विषय के तौर पर चुनना आदित्य के लिए गेम-चेंजर रहा. उन्होंने इसके लिए ‘मित्रा आईएएस’ से कोचिंग ली और बाकी 40% सिलेबस खुद तैयार किया. जीएस पेपर्स के लिए उन्होंने अपने प्रीलिम्स के नोट्स को ही आधार बनाया और इंटरनेट (गूगल/विकिपीडिया) का गहन इस्तेमाल किया. एथिक्स (GS4) में उनके वैकल्पिक विषय ने उनकी काफी मदद की.

मॉक टेस्ट और टाइम मैनेजमेंट

आदित्य पांडे ‘लोन वुल्फ’ की तरह तैयारी करते थे. उन्होंने प्रीलिम्स के लिए कोई फॉर्मल टेस्ट सीरीज जॉइन नहीं की, बल्कि इंटरनेट से फ्री पीडीएफ डाउनलोड कर घर पर ही परीक्षा जैसा माहौल बनाया. मेन्स के लिए उन्होंने आंसर राइटिंग की जमकर तैयारी की. उनका मानना है कि ‘टाइम-बाउंड’ तरीके से प्रेक्टिस करना ही परीक्षा हॉल का स्ट्रेस झेलने का एकमात्र तरीका है.

इंटरव्यू के लिए जरूरी है दृढ़ता

यूपीएससी इंटरव्यू के लिए आदित्य पांडे ने ‘वन-ऑन-वन’ सेशन को अधिक प्रभावी माना. तनाव और बोरियत से बचने के लिए वे अपने माता-पिता और चुनिंदा दोस्तों से बात करते थे. मानसिक शांति के लिए वे रामकथा और भजनों का सहारा लेते थे, जिसने उन्हें अंतिम समय तक प्रेरित रखा.

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