भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मैच लाइव न्यूज: भारत और पाकिस्तान के बीच आज टी-20 वर्ल्ड कप का महामुकाबला होने जा रहा है. अब से कुछ ही घंटे के बाद भारत और पाकिस्तान की सड़कें सूनी हो जाएंगी. सभी लोग क्रिकेट मैच का लुत्फ उठाने अपने-अपने घरों में टेलीविजन सेट के सामने आकर बैठ जाएंगे. श्रीलंका के प्रेमदासा स्टेडिएम में होने वाले इस मैच पर पूरी दुनिया की नजर है. टीम इंडिया के विस्फोटक बल्लेबाज अभिषेक शर्मा और पाकिस्तानी मिस्ट्री बॉल उस्मान तारिक को खूब चर्चाएं हो रही हैं. पाकिस्तान के कप्तान सलमान अली आगा और भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव दोनों इस मुकाबले को लेकर तैयार हैं. लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि मैच से पहले और मैच के दौरान कमजोर दिलवाले क्या करें? दोनों देशों के क्रिकेट मैच के रोमांच और उतार-चढ़ाव के वक्त अक्सल गुस्सा, गम और एक्साइमेंट को काबू में रखना पड़ता है, जिससे आपके साथ कोई अनहोनी न हो जाए. ऐसे में भारत-पाक क्रिकेट मैच के लिए डॉक्टरों और मनोवैज्ञानिक कमजोर दिलवालों के लिए क्या सलाह दे रहे हैं?
भारत-पाकिस्तान मैच के दौरान क्या करें?
भारत और पाकिस्तान के बीच जब भी क्रिकेट का मुकाबला होता है, तो मैदान पर केवल खिलाड़ी नहीं भिड़ते, बल्कि दोनों देशों के करोड़ों प्रशंसकों की धड़कनें भी दांव पर लगी होती हैं. खेल का रोमांच जब अपनी चरम सीमा पर होता है, तो शरीर में ‘एड्रेनालिन’ (Adrenaline) हार्मोन का स्तर अचानक बढ़ जाता है. डॉक्टरों के अनुसार, यह स्थिति एक सामान्य व्यक्ति के लिए तो रोमांचक हो सकती है, लेकिन ‘कमजोर दिल’ वालों के लिए यह ‘साइलेंट किलर’ साबित हो सकती है.
एक्सइटमेंट और सदमा में दोनों में जा सकती है जान!
जब मैच का आखिरी ओवर चल रहा हो और जीत-हार का फैसला एक गेंद पर टिका हो तो हमारा दिमाग ‘फाइट या फ्लाइट’ मोड में चला जाता है. हृदय रोग विशेषज्ञों का कहना है कि अत्यधिक उत्तेजना या हार के सदमे से दिल की धड़कनें (Heart Rate) और रक्तचाप (Blood Pressure) अचानक अनियंत्रित हो जाते हैं. इससे दिल की धमनियों में रुकावट आ सकती है या पहले से मौजूद कोई छोटा सा ब्लॉकेज फट सकता है, जिससे तत्काल ‘कार्डियक अरेस्ट’ या ‘हार्ट अटैक’ का खतरा बढ़ जाता है. इसे मेडिकल भाषा में ‘स्ट्रेस-इंड्यूस्ड कार्डियोमायोपैथी’ भी कहा जाता है.
भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मैच अगर टीवी पर देख रहे हैं तो डॉक्टरों की ये विशेष सलाह जरूर मानें
अकेले मैच न देखें– यदि आपको दिल की बीमारी है, तो कभी भी बंद कमरे में अकेले मैच न देखें. परिवार के साथ बैठें ताकि किसी भी असहजता की स्थिति में तुरंत मदद मिल सके.
दवाओं का समय- मैच के रोमांच में अक्सर लोग अपनी नियमित दवाएं लेना भूल जाते हैं. डॉक्टरों का कहना है कि मैच शुरू होने से पहले अपनी बीपी और दिल की दवाएं जरूर लें.
लगातार स्क्रीन न देखें- हर 15-20 मिनट में टीवी से नजरें हटाएं और गहरी सांस लें. विज्ञापनों के दौरान कमरे में थोड़ा टहलें.
लक्षणों को न पहचानना भारी पड़ेगा- यदि मैच के दौरान सीने में भारीपन, पसीना आना, बाएं हाथ में दर्द या अचानक बहुत ज्यादा घबराहट हो, तो तुरंत मैच देखना बंद कर दें और डॉक्टर से संपर्क करें.
मैच के दौरान मन को शांत रखने के क्या है अचूक उपाय?
मैच के दौरान खुद को भावनात्मक रूप से स्थिर रखने के लिए ’20-20-20′ का नियम अपनाएं. हर 20 मिनट में 20 सेकंड के लिए आंखें बंद करें और लंबी सांस लें. इसके अलावा, यह याद रखें कि यह केवल एक खेल है. हार या जीत से आपके निजी जीवन की वास्तविकता नहीं बदलती. मैच देखते समय हल्का भोजन करें और कैफीन चाय-कॉफी का सेवन कम करें, क्योंकि कैफीन धड़कनों को और तेज कर देता है.
क्या मैच देखना चाहिए या नहीं?
डॉक्टरों का मानना है कि यदि आपकी हाल ही में कोई हार्ट सर्जरी हुई है या आप गंभीर हृदय रोग से जूझ रहे हैं, तो लाइव मैच देखने के बजाय बाद में केवल स्कोर अपडेट या हाइलाइट्स देखना बेहतर है. लाइव मैच का अनिश्चित तनाव आपके शरीर को संकट में डाल सकता है.
गुस्सा और तनाव कैसे कम करें?
मैच के दौरान अपने पसंदीदा खिलाड़ी के आउट होने पर या टीम की हार पर गुस्सा आना स्वाभाविक है, लेकिन इस गुस्से को खुद पर हावी न होने दें. जब भी गुस्सा आए, पानी पिएं और वहां से उठकर दो मिनट के लिए बाहर चले जाएं. याद रखें, आपकी सेहत उस मैच के परिणाम से कहीं ज्यादा कीमती है. खेल का आनंद लें, उसे अपनी जान का दुश्मन न बनाएं.

