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Live in Partner File Dowry Case | Supreme Court News- क्या लिव इन में रह रही पार्टनर दहेज का कर सकती है केस? सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला, पढ़ें जज साहब ने क्या किया


नई दिल्ली: लिव इन रिलेशनशिप को लेकर कई तरह के सवाल उठते रहते हैं. लेकिन सुप्रीम कोर्ट में इस बार ऐसा केस आया है जिसने लिव इन रिलेशनशिप को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है. दरअसल एक शादीशुदा व्यक्ति का अपनी पत्नी के जिंदा रहते हुए लिव इन में रहने का मामला है. शख्स जिस महिला के साथ लिव इन में रह रहा था उसी महिला ने दहेज प्रताड़ना (IPC की धारा 498A) का मामला दर्ज कराया है. इसके बाद सवाल उठने लगा है कि क्या लिव इन रिलेशनशिप में रह रही महिला दहेज प्रताड़ना का मामला दर्ज करा सकती है. क्योंकि भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498A (अब भारतीय न्याय संहिता) में यह साफ कहा गया है कि सिर्फ पत्नी ही अपनी पति और उसके रिश्तेदार के खिलाफ मामला दर्ज करा सकती है. अब जब सुप्रीम कोर्ट में यह मामला आया है तब कोर्ट ने केंद्र सरकार से इस मुद्दे पर जवाब मांगा है.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार यह मामला डॉक्टर लोकेश बी.एच. से जुड़ा है. लोकेश ने साल 2000 में नवीना से शादी की थी. आरोप है कि लोकेश ने साल 2010 में तीर्थ नाम की महिला से दूसरी शादी कर ली, जो कानूनन अवैध मानी जाती है. तीर्थ ने आरोप लगाया कि लोकेश ने दहेज की मांग की और उसे जलाने की कोशिश की. इसके बाद तीर्थ ने घरेलू हिंसा का मामला भी दर्ज कराया. लोकेश ने कोर्ट में कहा कि तीर्थ के साथ उनका कोई वैध वैवाहिक संबंध नहीं है और इस संबंध को लेकर पारिवारिक कोर्ट में मामला लंबित है. सर्वोच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति एन के सिंह की पीठ ने डॉक्टर लोकेश द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई की.

सुप्रीम कोर्ट ने क्या किया? 

इस मामले में पहले कर्नाटक हाईकोर्ट ने लोकेश की याचिका खारिज कर दी थी. इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. कोर्ट ने केंद्र सरकार से इस मुद्दे पर जवाब मांगा है. साथ ही कोर्ट ने इस मामले की कानूनी जटिलता को देखते हुए वरिष्ठ वकीलों से भी राय मांगी है. इसके अलावा कोर्ट ने मामले की जटिलता को देखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता नीना नरिमन को ‘एमिकस क्यूरी’ (अदालत का मित्र) नियुक्त किया है. वह इस कानूनी मुद्दे पर निष्पक्ष राय प्रदान करेंगी. साथ ही ने कोर्ट ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी को इस मामले में सहयोग करने के लिए कहा है. कोर्ट का मानना है कि यह केवल एक व्यक्ति का मामला नहीं बल्कि सामाजिक और कानूनी रूप से बेहद अहम मुद्दा है.

दहेज प्रताड़ना कानून किसे शिकायत का अधिकार देता है?

दहेज प्रताड़ना से जुड़े कानून के अनुसार केवल कानूनी पत्नी ही अपने पति या उसके परिवार के खिलाफ शिकायत दर्ज करा सकती है. कानून की भाषा में पति-पत्नी का वैध संबंध होना जरूरी है. इसी वजह से लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर कानूनी विवाद खड़ा हुआ है.

लिव-इन पार्टनर का कानूनी दर्जा क्या होता है?

भारत में लिव-इन रिलेशनशिप को पूरी तरह अवैध नहीं माना गया है. कुछ मामलों में अदालतों ने लिव-इन पार्टनर को घरेलू हिंसा कानून के तहत सुरक्षा दी है. लेकिन दहेज कानून के तहत अधिकार देने का मुद्दा अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है.

इस मामले में आरोपी का क्या तर्क है?

लोकेश का कहना है कि तीर्थ के साथ उनका कोई वैध विवाह नहीं हुआ. इसलिए दहेज कानून लागू नहीं हो सकता. उन्होंने यह भी कहा कि कथित घटना के समय वह अस्पताल में ड्यूटी पर थे. इस दावे को उनके नियोक्ता ने भी समर्थन दिया है.

सुप्रीम कोर्ट का फैसला क्यों महत्वपूर्ण माना जा रहा है?

अगर सुप्रीम कोर्ट लिव-इन पार्टनर को दहेज कानून के तहत पत्नी का दर्जा देता है, तो यह भारत के पारिवारिक कानूनों में बड़ा बदलाव होगा. इससे हजारों मामलों में नई कानूनी मिसाल बन सकती है और लिव-इन रिलेशनशिप को नया अधिकारिक दर्जा मिल सकता है.

मामले पर आगे क्या हो सकता है?

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से विस्तृत जवाब मांगा है और कानूनी विशेषज्ञों की राय भी ली जा रही है. अदालत का अंतिम फैसला यह तय करेगा कि लिव-इन रिलेशनशिप में रह रही महिलाओं को दहेज कानून के तहत सुरक्षा मिल सकती है या नहीं. यह फैसला आने वाले समय में वैवाहिक कानूनों और सामाजिक संबंधों की दिशा तय कर सकता है.

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