दीपक सामल, भुवनेश्वर: ओडिशा की एक अदालत ने भारत में अवैध रूप से दाखिल होने वाले 9 बांग्लादेशी नागरिकों को बड़ी सजा सुनाई है. सब-डिवीजनल ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट की अदालत ने इन सभी को 2 साल के कठोर कारावास की सजा दी है. यह ओडिशा में अपनी तरह का पहला मामला माना जा रहा है जहां अवैध घुसपैठियों को इस तरह औपचारिक रूप से सजा दी गई है. सजा पाने वालों में तीन महिलाएं भी शामिल हैं.
भारी जुर्माने के साथ मिली जेल की सजा
विशेष अभियोजक रश्मिरंजन ब्रह्मा ने बताया कि जेल के साथ-साथ इन सभी पर 10,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है. यदि कोई अपराधी जुर्माना देने में विफल रहता है तो उसे दो महीने की अतिरिक्त जेल काटनी होगी. इन सभी के खिलाफ विदेशी अधिनियम, 1946 की धारा 14 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था. यह कानून भारत में अवैध रूप से रहने या वीजा की शर्तों का उल्लंघन करने वालों पर लागू होता है.
कैसे पकड़े गए ये विदेशी नागरिक?
इन बांग्लादेशी नागरिकों को 8 मार्च 2025 को भुवनेश्वर रेलवे स्टेशन से एसटीएफ (STF) ने पकड़ा था. गिरफ्तारी के समय पुलिस को इनके पास से बांग्लादेशी करेंसी, भारतीय रुपये और मोबाइल फोन मिले थे. पूछताछ के दौरान इन्होंने बताया कि ये असम के रास्ते जंगल के जरिए छिपकर भारत में आए थे. इनके पास भारत आने के लिए पासपोर्ट, वीजा या कोई भी वैध दस्तावेज नहीं था. ये सभी पुलिस को गुमराह करने और भागने की कोशिश भी कर रहे थे.
बांग्लादेश ने वापस लेने से किया इनकार
इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि बांग्लादेश हाई कमीशन ने भुवनेश्वर कोर्ट और क्राइम ब्रांच को लिखित में जानकारी दी है. उन्होंने स्पष्ट कहा है कि वे इन गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों को वापस बांग्लादेश में स्वीकार नहीं करेंगे. इसका मतलब है कि सजा काटने के बाद भी इनकी वापसी को लेकर कानूनी पेच फंस सकता है. ओडिशा पुलिस ने जांच के बाद 5 मई 2025 को इन सभी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी.
सजा पाने वालों की पहचान
कोर्ट ने जिन लोगों को सजा सुनाई है उनमें मोहम्मद हासिम (46), साजिब खान (24), अल्लाम शायका (41), मोहम्मद अजीम (40), दिलारा शेख (45), मोहम्मद सोहा तालुकदार (36), करीमा बेगम (25), मोनिरा बेगम (30) और सहाना बेगम (45) शामिल हैं. राज्य की सुरक्षा और अवैध घुसपैठ रोकने के लिहाज से इस फैसले को बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

