लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के चेंबर में वीडियो बनाने के मामले पर अब सख्त कार्रवाई की तैयारी है. बताया जा रहा है कि कुछ सांसदों ने स्पीकर के चैंबर के अंदर वीडियो शूट किया, जिसे बाद में मीडिया में चलाया गया. इस बात की जांच हो रही है कि वीडियो किसने बनाया और किसने उसे बाहर भेजा. स्पीकर का कक्ष सदन का ही हिस्सा माना जाता है, इसलिए वहां वीडियो बनाना नियमों के खिलाफ है. अधिकारियों ने मामले की जांच शुरू कर दी है. ये वीडियो 4 फरवरी को बनाया गया था.
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के चेंबर में वीडियो शूट किए जाने का मामला अब बड़े विवाद का रूप लेता दिख रहा है. 4 फरवरी को संसद परिसर में हुए घटनाक्रम से जुड़ा यह वीडियो सामने आने के बाद न सिर्फ जांच तेज कर दी गई है, बल्कि दोषी सांसदों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की भी तैयारी शुरू हो गई है.
वीडियो पर एक्शन की तैयारी क्यों?
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, 4 फरवरी को कुछ सांसद लोकसभा स्पीकर के चैंबर के भीतर पहुंचे थे, जहां उन्होंने कथित तौर पर मोबाइल फोन से वीडियो रिकॉर्ड किया. बाद में यह वीडियो मीडिया और सोशल मीडिया में प्रसारित हुआ. अब यह जांच की जा रही है कि वीडियो किस सांसद ने बनाया और किसने इसे बाहर साझा किया. दरअसल अधिकारियों का कहना है कि लोकसभा अध्यक्ष का कक्ष सदन का ही हिस्सा माना जाता है और वहां किसी भी तरह की वीडियो रिकॉर्डिंग संसदीय नियमों का उल्लंघन है.
स्पीकर के खिलाफ विपक्ष ने लाया अविश्ववास प्रस्ताव
दरअसल कांग्रेस सहित विभिन्न विपक्षी दल लगातार आरोप लगा रहे हैं कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला सदन की कार्यवाही का संचालन निष्पक्ष तरीके से नहीं कर रहे हैं और सत्तापक्ष के पक्ष में झुकाव दिखा रहे हैं. हालांकि, लोकसभा में संख्या बल को देखते हुए इस अविश्वास प्रस्ताव को राजनीतिक तौर पर अधिकतर प्रतीकात्मक माना जा रहा है, क्योंकि इसके पारित होने की संभावना बेहद कम है.
विपक्ष का ओम बिरला पर क्या आरोप?
विपक्षी दलों ने मंगलवार को संविधान के अनुच्छेद 94(सी) के तहत लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस सौंपा था. कांग्रेस के अनुसार, इस प्रस्ताव पर कुल 118 सांसदों के हस्ताक्षर हैं. कांग्रेस के साथ समाजवादी पार्टी और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) समेत कई विपक्षी दलों ने इसका समर्थन किया है. हालांकि, तृणमूल कांग्रेस ने अब तक इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं.
अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस में विपक्षी सांसदों ने आरोप लगाया है कि लोकसभा अध्यक्ष ने बार-बार उन्हें सदन में जनहित से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे उठाने का अवसर नहीं दिया. विपक्ष का कहना है कि इसी कारण उन्हें अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का कदम उठाना पड़ा. अब सभी की नजरें 9 मार्च पर टिकी हैं, जब बजट सत्र के दूसरे चरण के पहले दिन इस प्रस्ताव पर आगे की प्रक्रिया तय हो सकती है. (एजेंसी इनपुट के साथ)

