Wed. Feb 18th, 2026

Opposition Politics:क्या विपक्ष के पास नेतृत्व संकट? सामना के लेख में कई तीखे सवाल; राहुल-cm ममता का जिक्र – Opposition Under Scanner India Bloc Leadership Saamana Questions Rahul Gandhi Cm Mamata And Stalin Know Detail


महाराष्ट्र में मुख्य विपक्षी दल शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे (यूबीटी) ने बुधवार को दावा किया कि इंडिया ब्लॉक अब एक चौराहे पर खड़ा है, और उसे आंतरिक बहस से आगे बढ़कर यह तय करना होगा कि ममता बनर्जी, एमके. स्टालिन या कोई अन्य व्यक्ति राष्ट्रीय संकट में उनका नेतृत्व करेगा या नहीं। महत्वपूर्ण क्षेत्रीय चुनावों से पहले ब्लॉक और कांग्रेस पार्टी के भीतर आंतरिक कलह और नेतृत्व को लेकर चल रही बहसें एकता को कमजोर करने की धमकी दे रही हैं।

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सामना के संपादकीय में क्या कहा गया?

संपादकीय में कहा गया कि


  • गठबंधन के अंदर आपसी मतभेद और अंदरूनी लड़ाई बढ़ रही है।

  • आने वाले राज्यों के चुनाव से पहले यह स्थिति विपक्ष की एकता को कमजोर कर सकती है।

  • इसे ‘फ्रेंडली फायर’ यानी अपने ही साथियों के बीच टकराव बताया गया।

कहां आपसी टकराव की स्थिति?

संपादकीय के मुताबिक अलग-अलग राज्यों में गठबंधन के दल एक-दूसरे के खिलाफ ही चुनाव लड़ते दिख रहे हैं। इसमें पश्चिम बंगाल में तृणमूल और कांग्रेस आमने-सामने हैं, वहीं केरल में लेफ्ट और कांग्रेस में भी मुकाबला है। इसके साथ महाराष्ट्र में स्थानीय स्तर पर विभाजन से भाजपा को फायदा हुआ है। शिवसेना यूबीटी का कहना है संसद का हंगामा अलग है, लेकिन देश में लोगों की सोच बदल रही है। विपक्षी इंडिया गठबंधन को जल्द फैसला करना होगा कि उनका नेतृत्व कौन करेगा- ममता, स्टालिन या कोई तीसरा नेता?

नेतृत्व पर अलग-अलग राय

विपक्षी इंडिया गठबंधन के अंदर कई नेताओं ने अलग-अलग नाम आगे किए हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री मणिशंकर अय्यर ने तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन का समर्थन किया है। वहीं पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के सचिव रहे संजय बारू ने पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी को बेहतर राष्ट्रीय नेता बताया है। इनका कहना है कि गठबंधन को मजबूत बनाने के लिए जल्द एक चेहरा तय करना जरूरी है।

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कांग्रेस की चुनौती और भाजपा पर आरोप

संपादकीय में कहा गया है कि कांग्रेस में भी अंदरूनी मतभेद दिख रहे हैं, उनके वरिष्ठ नेता अलग-अलग राय दे रहे हैं, इससे पार्टी की एकजुटता पर असर पड़ रहा है हालांकि, राहुल गांधी की लड़ने की भावना की तारीफ भी की गई। संपादकीय में यह भी कहा गया कि सरकार धार्मिक भावनाओं का इस्तेमाल कर रही है। इससे जनता की सोच प्रभावित हो रही है और विपक्ष को इसका जवाब देने के लिए मजबूत नेतृत्व चाहिए।

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