केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने एक बार फिर सुनियोजित तरीके से पूरी तरह बनावटी और झूठी कहानी गढ़ी है।
गोयल ने कहा कि राहुल गांधी कांग्रेस के कुछ कार्यकर्ताओं के इशारों पर चल रहे हैं, जो किसान नेता होने का ढोंग कर रहे हैं, जबकि यह पूरी तरह से बनावटी और बेबुनियादी बातचीत है। अब मैं राहुल गांधी के झूठे दावों की सच्चाई सामने लाता हूं और उन्हें और उनके मित्रों को बेनकाब करता हूं, जो हमारे भोले-भाले, मेहनती अन्नदाताओं को गुमराह कर रहे हैं। मंत्री ने आगे कहा, मोदी सरकार ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में किसानों की हितों की पूरी तरह सुरक्षा की है। जब मैं कहता हूं कि पूरी सुरक्षा की गई है, तो मैं इसे रिकॉर्ड पर और पूरी जिम्मेदारी के साथ कह रहा हूं।
#WATCH | Union Minister Piyush Goyal says, “Mr Rahul Gandhi has once again rolled out a stage-managed, most artificial & fake narrative. This time, he is shooting from the shoulders of a few Congress Party activists, who are pretending to be farmer leaders – in a completely… pic.twitter.com/nTQ3yVVHQC
— ANI (@ANI) February 13, 2026
उन्होंने कहा, हमने सभी किसानों के हितों की रक्षा की है और यह एक ऐसा समझौता है जो हमारे किसानों, मछुआरों, मेहनती युवाओं, एमएसएमई, स्टार्टअप्स को लाभ पहुंचाएगा। राहुल गांधी, आज आप एक नाटकबाज और झूठे, बेबुनियाद आरोपों और मनगढ़ंत कहानियों को लगातार फैलाने वाले के रूप में पूरी तरह बेनकाब हुए हैं।
राहुल गांधी ने क्या कहा था?
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाया था कि उन्होंने भारत के किसानों के साथ धोखा किया है। उन्होंने कहा कि भारत-अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौता किसानों की आजीविका के लिए सीधा खतरा है।
रायबरेली सांसद ने पर लिखा, नरेंद्र सरेंडर मोदी ने भारत के किसानों को धोखा दिया है और किसानों ने इसे समझ लिया है। यह केवल एक व्यापार समझौता नहीं है। यह हमारे अन्नदाताओं की आजीविका पर सीधा हमला है। कांग्रेस नेता ने कहा कि संसद में किसानों के संगठनों के प्रतिनिधियों से हुई बैठक में यह चिंता स्पष्ट रूप से दिखाई दी। उन्होंने लिखा, आज संसद में किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक में उनकी चिंताएं स्पष्ट रूप से सामने आईं। महंगाई, बढ़ती लागत और एमएसपी की अनिश्चितता से जूझ रहे किसान अब विदेशी फसलों का सामना करने के लिए तैयार नहीं हैं, जो बड़ी सब्सिडी और यांत्रिक ताकत के साथ आती हैं।

