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Rahul Gandhi Meets Congress Chief Kharge After Bihar Election 2025 Defeat | बिहार में करारी हार के बाद बंद कमरे में राहुल-खरगे की इमरजेंसी मीटिंग, वेणुगोपाल ने चुनाव आयोग पर फोड़ा ठीकरा


नई दिल्ली: बिहार में मिली करारी शिकस्त के सिर्फ एक दिन बाद दिल्ली में राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बंद कमरे में बैठक की. बिहार चुनाव में कांग्रेस केवल 61 में से 6 सीट जीत पाई और यह पार्टी का पिछले 15 साल में दूसरा सबसे बुरा प्रदर्शन रहा. इस हार ने कांग्रेस को ही नहीं, पूरे महागठबंधन को सदमे में डाल दिया है. इस अहम बैठक में राहुल और खरगे के साथ केसी वेणुगोपाल, अजय माकन और बिहार के प्रभारी कृष्णा अल्लावरु शामिल हुए. अंदर की चर्चा चुनावी हार के कारण, संगठन की कमजोरी और सबसे ज्यादा चुनाव आयोग की भूमिका पर रही. बैठक के बाद राहुल मीडिया से बिना कुछ कहे निकल गए, लेकिन कांग्रेस नेताओं की बयानबाज़ी ने साफ कर दिया कि पार्टी इस हार को स्वीकार करने के मूड में नहीं है.

वेणुगोपाल का चुनाव आयोग पर बड़ा हमला

केसी वेणुगोपाल ने साफ शब्दों में कहा कि बिहार का नतीजा ‘अविश्वसनीय’ है और इस पर भरोसा करना मुश्किल है. उनका दावा था कि NDA का 90% से अधिक स्ट्राइक रेट भारतीय चुनाव इतिहास में लगभग असंभव है. वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि पूरा चुनावी प्रोसेस संदिग्ध है और चुनाव आयोग की भूमिका एकतरफा दिखी. उन्होंने कहा कि पार्टी जल्द ही डेटा इकट्ठा कर ‘कंक्रीट प्रूफ’ पेश करेगी.

वेणुगोपाल ने आगे कहा कि जनता भी इन नतीजों को मानने को तैयार नहीं है. उनका दावा था कि कांग्रेस को बिहार भर से शिकायतें मिली हैं. उन्होंने याद दिलाया कि हरियाणा के चुनाव में भी कांग्रेस ने ‘रिगिंग’ का आरोप लगाया था और वह सबूत चुनाव आयोग के सामने रख चुकी है.
कांग्रेस ने ECI पर ‘पक्षपात’ का बड़ा आरोप लगाया. (File Photo : PTI)

राहुल गांधी के चुनावी नैरेटिव पर बढ़ता दबाव

  • राहुल की पूरी बिहार कैंपेन ‘वोट चोरी’ आरोपों पर टिकी थी. EVM, वोटर लिस्ट और चुनाव आयोग, इन तीनों पर राहुल बार-बार निशाना साधते रहे. लेकिन जब नतीजे NDA के पक्ष में बाढ़ की तरह आए और कांग्रेस लगभग साफ हो गई, तो सवाल उठने लगे कि क्या यह नैरेटिव जमीन पर असर कर पाया या नहीं.
  • शुक्रवार को राहुल ने कहा था कि चुनाव शुरू से ही ‘फेयर’ नहीं था और इसी वजह से नतीजे ऐसे आए. लेकिन कांग्रेस की अंदरूनी चर्चा का फोकस अब यह है कि पार्टी खुद को कैसे संभाले, और क्या हार का ठीकरा सिर्फ ECI पर फोड़ना सुरक्षित रणनीति है.

महागठबंधन में ‘अविश्वास’ की दरार

NDA की सुनामी ने केवल कांग्रेस को ही नहीं, महागठबंधन को भी हिला दिया है. तेजस्वी यादव की उम्मीदें टूट चुकी हैं, वाम दल भी सिमट गए और कांग्रेस लगभग मिट गई. कई साथी दलों ने अंदरखाने कांग्रेस की कमजोर कैंपेनिंग की आलोचना शुरू कर दी है. यह हार विपक्ष के लिए बड़ा मनोवैज्ञानिक झटका बनी, जिससे उबरना आसान नहीं होगा.

कांग्रेस का अगला कदम, डेटा वॉर?

पार्टी अब आने वाले 1–2 हफ्तों में चुनाव आयोग पर सीधा हमला बोलते हुए तथाकथित ‘सबूत’ पेश करने की रणनीति बना रही है. सवाल यह है कि क्या कांग्रेस एक बार फिर वही रास्ता अपनाएगी, जिसने हरियाणा के बाद भी उसे फायदा नहीं दिया? या फिर बिहार की हार पार्टी के भीतर बड़े बदलावों की शुरुआत बनेगी?

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