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S-400 की जरूरत नहीं! KALI बनेगा 5वीं पीढ़ी फाइटर जेट जे-20 का काल, यूनिक तकनीक देख चीन हैरान


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S-400 की जरूरत नहीं! KALI बनेगा 5वीं पीढ़ी फाइटर जेट जे-20 का काल, चीन हैरानभारत का डीईडब्ल्यू प्रोजेक्ट काली एक पुराना और सीक्रेट प्रोजेक्ट है.

KALI or Kilo Ampere Linear Injector: भारत अपने एयर डिफेंस की किले बंदी में लगा है. रूसी एस-400 और देसी आकाश सिस्टम की जोड़ी पहले से तैनात है. इसके अलावा भारत अपना सुदर्शन चक्र बना रहा है. इससे पूरा देश एक किले में तब्दील हो जाएगा. परिंदे भी पर नहीं मार पाएंगे. इस सबके बीच भारत एक और बड़ा काम कर रहा है. वह काली प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है. यह एक ऐसा डिफेंस सिस्टम है जिसके नजर में आने भर से चीनी 5वीं पीढ़ी के फाइटर जेट जे-20 जलकर भस्म हो जाएंगे. यह भारत का अपना बेहद यूनिक तकनीक है. चीन के पास भी इस तकनीक पर आधारित ऐसा कोई हथियार नहीं है.

क्या है काली

डायरेक्टेड एनर्जी वेपन्स आधुनिक युद्ध का नया चेहरा है. ये हथियार लेजर या हाई-पावर माइक्रोवेव से दुश्मन के इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम को बिना फिजिकल नुकसान पहुंचाए सॉफ्ट किल कर देता है. भारत का KALI (Kilo Ampere Injector) एक बेहद एडवांस सिस्टम है. चीन के पास भी ऐसा ही एचपीएम सिस्टम है. जहां तक इन दोनों हथियारों की तुलना की बात है तो काली की ताकत रॉ पावर है. जबकि चीनी सिस्टम मोबिलिटी और रैपिड फायर में शानदार है.

सबसे रहस्यमयी प्रोजेक्ट

कहा जाता है कि काली भारत का सबसे रहस्यमयी प्रोजेक्ट है. इसे डीआरडीओ और बार्क (भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर) ने 1989 में विकसित किया था. यह एक लीनियर इलेक्ट्रॉन एक्सीलरेटर है जो किलोएम्पियर रेंज में हाई-करंट इलेक्ट्रॉन बीम पैदा करता है. यह सिस्टम मार्क जेनरेटर से हाई-वोल्टेज पल्स बनाता है. काली सीरीज में कई मॉडल है. इसमें काली-5000, काली 10000 जैसे सिस्टम हैं.

क्या काली चीन के जे-20 को मार सकते हैं?

तकनीकी रूप से भारत का काली सिस्टम चीन के पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट जे-20 को मार सकता है. हालांकि जंग के मैदान या किसी युद्ध अभ्यास में ऐसा नहीं हुआ है.

कैसे काम करता है काली?

दरअसल, काली कैसे काम करता है. यह बड़ा सवाल है. यह एक हाई-पावर इलेक्ट्रॉन बीम बनाता है. यह बीम हाई-पावर माइक्रोवेव में बदल जाता है. अगर जे-20 जैसे एडवांस स्टील्थ फाइटर जेट पर ये बीम पड़ेंगे तो उसके महत्वपूर्ण सिस्टम जैसे AESA रडार, फ्लाई-बाय-वायर कंप्यूटर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम जल जाएंगे. वे एक तरह से फ्राई हो जाएंगे. इस तरह ये जेट हवा में ही क्रैश हो सकते हैं. यह एक सॉफ्ट किल तरीका है. इसमें विमान को फिजिकली कोई नुकसान नहीं होता लेकिन उसके तमाम इलेक्ट्रॉनिक्स खराब हो जाएंगे और ये विमान डब्बे बन जाएंगे.

काली के सामने चुनौतियां

काली के पास ताकत बहुत है, लेकिन असर युद्ध में कई दिक्कतें आती हैं. जे-20 एक स्टील्थ फाइटर जेट है. ये जेट बहुत दूर से बीवीआर मिसाइलें दाग सकते हैं. यहीं पर काली थोड़ा कम असरदार होता है. उसके घातक बीम अभी छोटी रेंज तक ही प्रभाव डालते हैं. इस सिस्टम की दूसरी सबसे बड़ी चुनौती है इसकी मोबिलिटी. काली-10,000 बेहद एडवांस है लेकिन इसका वजन काफी ज्यादा है. यह करीब 26 टन का सिस्टम है. इसको कूलिंग और पावर के लिए भी कई सुविधाएं चाहिए. यह भी एक स्टेशनरी यानी स्थिर सिस्टम है. इसको एक जगह से दूसरी जगह ले जाने में दिक्कत आती है. साथ ही इसकी रेंज कम है. ऐसे में मैक-2 की स्पीड से आने वाले स्टील्थ फाइटर को ट्रैक करना अपने आप चुनौती है. साथ ही काली एक शॉट के बाद रिचार्ज में समय लगाता है. स्टील्थ जेट पहले वार में बच जाए तो उस पर दूसरा शॉट दागने में समय लगता है.

इस तकनीक में कहां है चीन?

चीन के पास इसी तरह का एचपीएम सिस्टम है. लेकिन, इसकी तकनीक भारत की तकनीक से अलग है. यह भी डीईडब्ल्यू सिस्टम है. भारत की तुलना में इसकी क्षमता कम है. यह कम घातक है. लेकिन, उसका सिस्टम हल्का है. वहीं भारत का काली सिस्टम बहुत पावरफुल है. ये स्ट्रैटेजिक डिफेंस के लिए शानदार हैं. भारत अपने काली सिस्टम की मोबिलिटी को आसान बनाने और उसमें रैपिड फायर क्षमता लाने की कोशिश कर रहा है. अगर ऐसा हो जाए तो यह सिस्टम किसी भी देश के लिए एक चलता फिराता काल बन जाएगा.

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संतोष कुमार

न्यूज18 हिंदी में बतौर एसोसिएट एडिटर कार्यरत. मीडिया में करीब दो दशक का अनुभव. दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, आईएएनएस, बीबीसी, अमर उजाला, जी समूह सहित कई अन्य संस्थानों में कार्य करने का मौका मिला. माखनलाल यूनिवर्स…और पढ़ें

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