Tue. Feb 3rd, 2026

US Tariff On India | India-US Tariff Deal : भारत के वो 2 धुरंधर, जिनके आगे अमेरिका को भी यूटर्न लेना पड़ा: टैरिफ पर कब-कैसे पर्दे के पीछे हुआ खेल?


India-US Trade Deal: भारत-अमेरिका की दोस्ती फिर से पटरी पर आती दिख रही है. जिस टैरिफ से तकरार थी, उसी से अब रिश्ते ठीक होंगे. जी हां, अमेरिका ने भारत को टैरिफ वाली खुशखबरी दे दी है. टैरिफ पर भारत न कभी झुका और न टूटा. इसका नतीजा यह हुआ कि अब भारतीय सामानों पर अमेरिका में टैरिफ पाकिस्तान और चीन से भी कम लगेंगे. दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को भारत पर लगे भारी टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया. यह फैसला अचानक नहीं आया, बल्कि भारत के दो बड़े धुरंधरों- विदेश मंत्री एस. जयशंकर और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल- की स्मार्ट डिप्लोमेसी और कड़ी मेहनत का नतीजा है. एस जयशंकर और पीयूष गोयल ने दोनों ने पर्दे के पीछे कई महीनों तक मीटिंग्स, बातचीत और नेगोशिएशंस चलाए. इसका असर हुआ कि अमेरिका को अपना 50 प्रतिशत वाला टैरिफ घटाना पड़ा. आइए समझते हैं कि कैसे यह डील हुई और दोनों की क्या भूमिका रही.
सबसे पहले बैकग्राउंड को समझना होगा. जब से टैरिफ की बात आई, तब से ही भारत और अमेरिका के रिश्तों में खटास है. साल 2025 में डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 25 प्रतिशत रेसिप्रोकल टैरिफ लगाया और रूस से तेल खरीदने के कारण अतिरिक्त 25 प्रतिशत पेनल्टी टैरिफ भी जोड़ दिया. यानी भारत पर कुल टैरिफ 50 फीसदी हुआ. इससे भारत के कई सेक्टर्स मसलन टेक्सटाइल, स्टील, सीफूड, लेदर आदि को नुकसान हुआ. अमेरिका ने भारत को टैरिफ के जरिए झुकाने की कोशिश की. 50 फीसदी टैरिफ लगाकर तोड़ने की कोशिश की. मगर भारत ने हार नहीं मानी. भारत ने अपने और अपने नागरिकों की हितों से समझौता नहीं किया. जब भारत और अमेरिका के बीच रिश्ते गर्त में जा रहे थे, जब तनातनी सातवें आसमान पर थी, तब भारत की ओर से जयशंकर और पीयूष गोयल ने डिप्लोमेसी और ट्रेड नेगोशिएशंस की कमान संभाली.

कैसे दो धुरंधरों ने किया कमाल

वैसे भी एस जयशंकर की डिप्लोमेसी की कायल पूरी दुनिया रही है. इस टैरिफ मामले में भी उन्होंने अपनी इसी क्षमता का परिचय दिया. उनकी तरह पीयूष गोयल ने भी अहम भूमिका निभाई. एक तरह से देखा जाए तो ट्रेड डील पर नेगोशिएशंस यानी बातचीत के मुख्य कर्ता-धर्ता यही थे. दोनों ने मिलकर पर्दे के पीछे जो किया, उससे पूरी बाजी पलट गई और भारत के सामने अमेरिका को यूटर्न लेना ही पड़ा. आज नतीजा सामने है कि भारत पर अब 18 फीसदी टैरिफ लगेगा. जबकि पाकिस्तान पर 19 फीसदी और चीन पर 34 फीसदी टैरिफ लगेगा. इसका मतलब है कि भारत अब इन एशियाई देशों से आगे निकल चुका है. एक तरह से देखा जाए तो भारत के लिए यह विन-विन सिचुएशन है.
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एस जयशंकर ने टैरिफ मामले में अहम भूमिका निभाई है.

ट्रेड डील में जयशंकर की भूमिका क्या थी?
एस जयशंकर को डिप्लोमेसी का मास्टर कहा जाता है. उन्होंने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और अन्य सीनियर अधिकारियों से कई दौर की मीटिंग्स कीं. अमेरिका की ओर से सर्जियो गोर तो भारत की ओर से एस जयशंकर बैटिंग कर रहे थे. पिछले कई महीनों से एस जयशंकर अमेरिका के टच में थे. उन्होंने रूबियो से लेकर सर्जियो गोर तक से कई दौर की बातचीत की. पिछले साल और इस साल भी एस जयशंकर लगातार अमेरिका से ट्रेड डील पर बातचीत कर रहे थे. बैकचैनल से वह अमेरिका को भारत की शर्तों पर मनाने में जुटे थे. अभी भी जयशंकर अमेरिका में है. अपनी अमेरिका यात्रा के दौरान जयशंकर का फोकस क्रिटिकल मिनरल्स, डिफेंस और ट्रेड पर है. इस दौरान भी जयशंकर ने भारत की स्थिति साफ रखी. रुबियो से लेकर अमेरिकी अधकारियों संग उनकी मीटिंग्स ने विश्वास बनाया और ट्रेड डील की नींव रखी. एक ओर जब अमेरिका के नेता बयानबाजी में लगे थे, वह चुपचाप अपना काम कर रहे थे. उनकी साइलेंटली स्ट्रैटेजिक बातचीत ने अमेरिका को यूटर्न लेने पर मजबूर किया.

भारत-अमेरिका ट्रेड डील में पीयूष गोयल ने अहम भूमिका निभाई.

पीयूष गोयल की भूमिका की भूमिका तो और अहम
पीयूष गोयल भारत के वाणिज्य मंत्री हैं. पीयूष गोयल ट्रेड नेगोशिएशंस के फ्रंटलाइन प्लेयर थे. ट्रेड डील जब अधड़ में लटका और टैरिफ हाई हुआ तो सबकी नजर उन पर ही थे. उन्होंने अपना काम बखूबी किया. उन्होंने 2025 से ही वॉशिंगटन में कई दौर की मीटिंग्स कीं. मार्च, मई 2025 में अमेरिकी कमर्श सेक्रेटरी और ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव से मिले. पीयूष गोयल ने अमेरिका के सामने भारत की शर्तों को मजबूती से रखा. उन्होंने अमेरिका को साफ-साफ भारत के स्टैंड से अवगत कराया और अमेरिका के लिए भारत की अहमियत को भी बताया. उन्होंने ही सबसे पहले कहा था कि नेगोशिएशंस प्रोग्रेस कर रही हैं और अच्छी डील जल्द आएगी. ठीक अब वही हुआ है. पहले जहां टैरिफ 50 फीसदी था, अब यह 18 फीसदी हो गया है. वैसे बातचीत तो चल ही रही थी, मगर अमेरिका की तरफ से सर्जियो गोर के स्टैंड ने डील में मदद की. उनके आने से बातचीत की रफ्तार बढ़ी.

कैसे टैरिफ कम करने पर मजबूर हुआ अमेरिका?
भारत उधर अमेरिका संग नेगोशिएशन्स तो कर ही रहा था. दूसरी ओर भारत ने अपनी एक और चाल चल दी. जी हां, पीयूष गोयल की अगुवाई में भारत ने यूरोपीय यूनियन संग मदर ऑफ ऑल डील कर डाली. इससे यूरोपीय यून‍ियन (EU) के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट फाइनल करके भारत ने 27 देशों का विशाल बाजार अपनी मुट्ठी में कर लिया. इससे अमेरिका को छटपटाहट दिखी. इसका असर हुआ कि अमेरिका को लगा कि भारत का बड़ा बाजार उसके हाथ से चला जाएगा. ऐसे में उसने 50% टैरिफ को घटाकर 18% कर दिया.

चलिए जानते हैं टाइमलाइन कि कब-क्या हुआ?

13 फरवरी, 2025: एक संयुक्त बयान में कहा गया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप व्यापार संबंधों को और मजबूत करने पर सहमत हुए हैं. दोनों नेताओं ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को मौजूदा 191 अरब डॉलर से बढ़ाकर 500 अरब डॉलर से अधिक करने का एक साहसिक लक्ष्य निर्धारित किया.

4-6 मार्च: वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने वाशिंगटन डीसी का दौरा किया और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीर तथा अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लटनिक के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं.

2 अप्रैल, 2025: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय वस्तुओं पर 26 प्रतिशत का अतिरिक्त आयात शुल्क (10 प्रतिशत आधार शुल्क और 16 प्रतिशत जवाबी शुल्क) लगाने की घोषणा की.

9 अप्रैल, 2025: अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं पर लगने वाले 26 प्रतिशत के जवाबी शुल्क को 90 दिनों (नौ जुलाई, 2025 तक) के लिए स्थगित कर दिया.

23-29 अप्रैल, 2025: तत्कालीन भारतीय मुख्य वार्ताकार राजेश अग्रवाल (अब वाणिज्य सचिव) ने प्रस्तावित व्यापार समझौते के लिए अमेरिकी समकक्षों के साथ पहली व्यक्तिगत बैठक के लिए वाशिंगटन का दौरा किया। उन्होंने शुल्क, गैर-शुल्क बाधाओं और सीमा शुल्क सरलीकरण सहित 19 अध्यायों को कवर करने वाले संदर्भ की शर्तों पर चर्चा की.

17-20 मई, 2025: वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने वाशिंगटन का दौरा किया और यूएसटीआर ग्रीर और अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लटनिक से मुलाकात की.

4-10 जून, 2025: अतिरिक्त अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि ब्रेंडन लिंच के नेतृत्व में एक अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने सप्ताह भर चलने वाली चर्चाओं के लिए भारत का दौरा किया.

26 जून, 2025: अग्रवाल के नेतृत्व में एक भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने नौ जुलाई की समयसीमा से पहले मतभेदों को दूर करने के लिए अगले दौर की बातचीत के लिए फिर से वाशिंगटन का दौरा किया.

27 जून, 2025: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका भारत के साथ एक बहुत बड़ा व्यापार समझौता करने जा रहा है.

31 जुलाई, 2025: अमेरिका ने सात अगस्त, 2025 से प्रभावी होने वाले 25 प्रतिशत शुल्क की घोषणा की.

6 अगस्त, 2025: ट्रंप ने भारत से आने वाले सामानों पर दंडात्मक कार्रवाई के रूप में अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क लगा दिया, क्योंकि नई दिल्ली ने रूस से तेल की खरीद जारी रखी थी.

16 सितंबर, 2025: अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि के कार्यालय के अधिकारियों ने भारत में व्यापार समझौते के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की और इस संबंध में प्रयासों को तेज करने का निर्णय लिया गया।

22 सितंबर, 2025: पीयूष गोयल ने व्यापार वार्ता के लिए न्यूयॉर्क का दौरा किया. उनके साथ राजेश अग्रवाल भी थे.

15-17 अक्टूबर, 2025: भारतीय टीम वार्ता के लिए वाशिंगटन में रही, अब तक औपचारिक रूप से छह दौर की बातचीत हो चुकी थी.

10 दिसंबर, 2025: उप अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) रिक स्विट्जर के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने अपने भारतीय समकक्ष राजेश अग्रवाल के साथ दो दिवसीय व्यापार वार्ता के लिए राजधानी का दौरा किया.

12 जनवरी, 2026: भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने दावा किया कि दोनों पक्ष व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं.

2 फरवरी, 2026: भारत और अमेरिका एक व्यापार समझौते पर सहमत हुए जिसके तहत वाशिंगटन भारतीय वस्तुओं पर पारस्परिक शुल्क को मौजूदा 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर देगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ फोन पर बातचीत के बाद यह घोषणा की.

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