Sun. Feb 15th, 2026

West Bengal SIR: बंगाल में बिहार से ज्यादा वोटरों के कटेंगे नाम, किसको होगा फायदा, आखिर टीएमसी क्यों बौखलाई?


पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले वोटर लिस्ट में बड़ी छंटनी हो सकती है. बिहार में जहां विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के बाद वोटर लिस्ट से 48 लाख नाम काटे गए थे. वहीं अब खबर है कि बंगाल में वोटर्स की संख्या 2024 के लोकसभा चुनावों की तुलना में कम से कम 68 लाख यानी करीब 9 प्रतिशत घट सकती है. यह संशोधित अंतिम मतदाता सूची 28 फरवरी को प्रकाशित की जाएगी.

16 दिसंबर को जारी राज्य की ड्राफ्ट SIR लिस्ट में करीब 7.1 करोड़ मतदाता दर्ज थे. इस सूची से लगभग 58 लाख ऐसे वोटर्स के नाम हटाए गए थे, जो अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या डुप्लिकेट पाए गए. टाइम्स ऑफ इंडिया ने भारत निर्वाचन आयोग के सूत्रों के हवावे से बताया कि अब करीब 10 लाख और नाम हटाए जाने की तैयारी है.

डेढ़ करोड़ वोटर्स के रिकॉर्ड में गड़बड़ियां

अखबार के मुताबिक, निर्वाचन आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ड्राफ्ट सूची में करीब 1.5 करोड़ मतदाताओं के रिकॉर्ड में तार्किक गड़बड़ियां पाई गईं या वे ‘अनमैप्ड’ चिह्नित किए गए थे. इन सभी को व्यक्तिगत सुनवाई के लिए बुलाया गया. इनमें से करीब 3.6 लाख मतदाताओं को बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) नोटिस ही नहीं दे पाए, क्योंकि वे उन्हें ढूंढ नहीं सके.

अधिकारी के अनुसार, ‘इन 3.6 लाख मतदाताओं के नाम सीधे अंतिम सूची से हटा दिए जाएंगे. इसके अलावा, करीब 5.2 लाख मतदाताओं को सुनवाई का नोटिस मिला, लेकिन वे शनिवार दोपहर 2 बजे तक ईआरओ या एईआरओ के सामने पेश नहीं हुए. उनके नाम भी हटाए जाएंगे.’

फाइनल वोटर लिस्ट में घट जाएंगे 10.4 लाख नाम

सुनवाई के बाद दस्तावेज़ों की जांच के चरण में करीब 1.6 लाख और नाम ‘अयोग्य’ पाए गए. इस तरह अंतिम सूची में मतदाताओं की संख्या कम से कम 10.4 लाख और घटने की बात कही जा रही है.

पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी, विशेष रोल पर्यवेक्षकों और जिलाधिकारियों के साथ शुक्रवार को हुई बैठक में आयोग ने कुछ गंभीर गड़बड़ियों की ओर भी ध्यान दिलाया. अधिकारियों के मुताबिक, कई मामलों में सिस्टम पर अखबार की कतरनें, खाली पन्ने या साफ नजर न आने वाली तस्वीरें अपलोड कर दी गई थीं और उन्हें सत्यापित भी कर दिया गया था. ऐसे 15-20 मामलों को पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन के जरिए दिखाया गया. इन सभी की सुपर-चेकिंग के दौरान दोबारा जांच होगी, जिससे अयोग्य मतदाताओं की संख्या और बढ़ सकती है.

28 फरवरी को जारी होगी फाइनल वोटर लिस्ट

इस बीच, 16 दिसंबर से 19 जनवरी के बीच नए मतदाता बनने के लिए फॉर्म-6 और 6A के तहत करीब 7.4 लाख आवेदन मिले. इसके अलावा, मौत या पता बदलने के कारण नाम हटाने के लिए 42,501 फॉर्म-7 जमा किए गए. वोटर आईडी में सुधार या छोटे बदलावों के लिए 3.4 लाख से ज्यादा फॉर्म-8 भी आए हैं. आयोग का कहना है कि अंतिम सूची जारी होने से पहले सभी आवेदनों का निपटारा कर लिया जाएगा.

निर्वाचन आयोग के अनुसार, सुनवाई के दौरान जमा दस्तावेजों की जांच और मामलों का निस्तारण 21 फरवरी तक पूरा करना है. इसके बाद 25 फरवरी तक मतदान केंद्रों का युक्तिकरण किया जाएगा और तीन दिन बाद, यानी 28 फरवरी को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होगी.

SIR का क्यों विरोध कर रही टीएमसी?

पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) एसआईआर का लगातार विरोध करती रही हैं. उन्होंने आशंका जताई है कि यह प्रक्रिया राजनीतिक रूप से प्रेरित है और इससे वैध मतदाताओं के नाम गलत तरीके से काटे जा सकते हैं.

टीएमसी का कहना है कि SIR के नाम पर लाखों मतदाताओं खासकर गरीब, प्रवासी मजदूर, अल्पसंख्यक और सीमावर्ती इलाकों के लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जा रहे हैं. पार्टी का आरोप है कि ये लोग दस्तावेज़ या सुनवाई में समय पर पहुंचने में सक्षम नहीं होते, जिससे उनका वोटिंग अधिकार छिन सकता है.

दरअसल वर्ष 2021 में हुए पिछले विधानसभा चुनाव के नतीजों पर नजर डालें तो पश्चिम बंगाल की 294 सीटों में से टीएमसी ने 215 सीटें जीती थी, जबकि बीजेपी के खाते में 77 सीटें ही आई थीं. हालांकि इसमें से 35 विधानसभा सीटें ऐसी थीं, जिनके नतीजे 5000 से भी कम वोटों के अंतर से तय हुए थे. इन 35 सीटों में से भारतीय जनता पार्टी ने 22, और तृणमूल कांग्रेस 12 सीटें जीत पाई थी. ऐसे में पार्टी को आशंका है कि वोटर के नाम कटने से चुनाव रिजल्ट प्रभावित होंगे.

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