केरल चुनाव का शंखनाद: टिकट बंटवारे पर मंथन! कांग्रेस-बीजेपी की मैराथन मीटिंग
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Kerala Assembly Elections: केरल के नाजुक सामाजिक और सांप्रदायिक समीकरणों को देखते हुए यह माना जा रहा है कि मानना है कि कांग्रेस का अंतरिम अध्यक्ष एक ईसाई नेता हो सकते हैं. दूसरी ओर, राज्य भाजपा अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि पार्टी की उम्मीदवारों की पहली सूची भी इसी महीने के अंत तक जारी होने की उम्मीद है. सीपीआई (एम) के नेतृत्व वाला वाम लोकतांत्रिक मोर्चा उच्च स्तरीय विचार-विमर्श में लगा हुआ है.

केरल चुनाव के लिए बीजेपी और कांग्रेस ने कमर कस ली है. (फाइल फोटो)
तिरुवनंतपुरम. केरल विधानसभा चुनावों (Kerala Assembly Elections) को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है. राज्य में ‘इलेक्शन मोड’ ऑन हो चुका है. दोनों प्रमुख पार्टियां, कांग्रेस (Congress) और बीजेपी (BJP), अपनी-अपनी तलवारें म्यान से बाहर निकाल चुकी हैं. सूत्रों के मुताबिक, इस महीने के अंत तक दोनों ही पार्टियां अपने उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी कर सकती हैं. लेकिन कांग्रेस के खेमे में एक और बड़ा ड्रामा चल रहा है – केपीसीसी अध्यक्ष सनी जोसेफ (Sunny Joseph) के इस्तीफे और नए अंतरिम अध्यक्ष की तलाश.
केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) के अध्यक्ष सनी जोसेफ अपने गृह क्षेत्र कन्नूर के पेरावूर (Peravoor) से चुनाव लड़ने के लिए कमर कस चुके हैं. चुनाव लड़ने के लिए उन्हें अध्यक्ष पद छोड़ना होगा. कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चुनौती एक ऐसे चेहरे को ढूंढना है जो केरल के जटिल सामाजिक और सांप्रदायिक समीकरणों (Caste Equations) को साध सके.
कौन बनेगा नया बॉस? केसी जोसेफ रेस में सबसे आगे
सूत्रों की मानें तो अंतरिम अध्यक्ष की कुर्सी किसी अनुभवी ईसाई नेता को मिल सकती है. अनुभवी नेता केसी जोसेफ का नाम सबसे आगे चल रहा है. उनकी स्वीकार्यता और तजुर्बा उन्हें मजबूत दावेदार बनाता है. लोकसभा सांसद बेनी बेहनन का नाम भी चर्चा में था, लेकिन उन्हें हाल ही में घोषणापत्र समिति (Manifesto Committee) का अध्यक्ष बना दिया गया है. इससे केसी जोसेफ का रास्ता और साफ हो गया है. पूर्व अंतरिम अध्यक्ष एमएम हसन भी दौड़ में थे, लेकिन वे खुद भी चुनाव लड़ने के इच्छुक हैं, इसलिए उनका पत्ता कट सकता है.
कांग्रेस की सेफ स्ट्रेटजी: मौजूदा विधायकों पर दांव
कांग्रेस कोई रिस्क नहीं लेना चाहती. पहली लिस्ट में मौजूदा विधायकों (Sitting MLAs) को टिकट मिलने की पूरी संभावना है. इससे पार्टी स्थिरता का संदेश देना चाहती है और गुटबाजी से बचना चाहती है. आचार संहिता लगने से पहले ही कांग्रेस चुनावी मैदान में बढ़त बनाना चाहती है.
बीजेपी का मास्टरस्ट्रोक: लोकल जीत का फायदा
दूसरी तरफ, बीजेपी भी पीछे नहीं है. प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर (Rajeev Chandrasekhar) ने साफ कर दिया है कि उनकी पहली लिस्ट भी इसी महीने आ जाएगी. बीजेपी की नजर उन सीटों पर है जहां उसने हालिया स्थानीय निकाय चुनावों में अच्छा प्रदर्शन किया है. पार्टी अपनी पकड़ मजबूत करने और वाम मोर्चे के वोट बैंक में सेंध लगाने की रणनीति बना रही है.
वाम मोर्चा भी एक्टिव
सीपीआई (एम) के नेतृत्व वाला वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) भी खामोश नहीं है. उनकी हाई लेवल मीटिंग्स का दौर जारी है. वे अपनी सत्ता बचाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते.
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राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें

