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Pocso Act: केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि सहमति की उम्र 18 साल बनाए रखना सरकार का सोच-समझकर लिया गया फैसला है. उन्होंने बताया कि कानूनों में एकरूपता बनाए रखने के लिए अलग-अलग कानूनों में वयस्क होने की उम्र 18 साल तय की गई है. उन्होंने कहा कि सहमति की उम्र कम करना या इसमें किसी तरह की छूट देना बच्चों की सुरक्षा को कमजोर करेगा.

केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि 18 साल से कम उम्र के लोग ऐसे फैसले लेने में सक्षम नहीं माने जाते.
नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि बच्चों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा और लोकसभा में ‘रोमियो-जूलियट क्लॉज’ (Romeo-Juliet Clause) की मांग को सिरे से खारिज कर दिया है. केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने दो टूक कहा कि पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) में 18 साल से कम उम्र में यौन संबंधों के लिए दी गई ‘सहमति’ (Consent) का कोई मतलब नहीं है, इसे अपराध ही माना जाएगा.
सुप्रीम कोर्ट की चिंता के बावजूद, सरकार का मानना है कि अगर सहमति की उम्र कम की गई तो इससे बाल शोषण (Child Abuse) का खतरा बढ़ जाएगा. सरकार ने स्पष्ट किया कि 18 से कम उम्र के बच्चे यौन फैसलों के दूरगामी परिणाम समझने में सक्षम नहीं होते, इसलिए कानून में ढील देना किशोर लड़कियों की सुरक्षा को खतरे में डालना होगा.
प्यार नहीं, सुरक्षा पहले: ‘रोमियो-जूलियट’ क्लॉज की मांग खारिज
सांसद के. सुब्बारायन और सेल्वराज वी. ने सुप्रीम कोर्ट की उस चिंता का हवाला दिया था, जिसमें कहा गया था कि पॉक्सो कानून का इस्तेमाल किशोर प्रेमी जोड़ों (Teenage Lovers) के खिलाफ हो रहा है. उन्होंने पूछा था कि क्या सरकार ‘रोमियो-जूलियट क्लॉज’ लाकर वास्तविक प्रेम संबंधों को सख्त धाराओं से बचाने पर विचार कर रही है. महिला एवं बाल विकास मंत्री ने स्पष्ट किया कि सहमति की उम्र 18 साल बनाए रखना एक सोच-समझकर लिया गया फैसला है. कानून में ‘कंसेंट’ शब्द की कोई स्पष्ट परिभाषा नहीं है, क्योंकि 18 से कम उम्र के बच्चे की सहमति कानूनी रूप से मान्य नहीं है.
कानून में एकरूपता: सभी एक्ट में 18 साल ही है पैमाना
सरकार ने तर्क दिया कि कानूनों में कन्फ्यूजन न हो, इसलिए बालिग होने की उम्र हर जगह समान रखी गई है. अगर पॉक्सो में उम्र घटाई गई, तो यह बाकी कानूनों के खिलाफ होगा. मंत्री ने उन कानूनों की लिस्ट भी दी जहां उम्र 18 साल है:
* भारतीय न्याय संहिता, 2023
* बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006
* किशोर न्याय (जेजे) एक्ट, 2015
* हिंदू दत्तक एवं भरण-पोषण अधिनियम, 1956
छल और दबाव का डर: बच्चे नहीं ले सकते सही फैसला
सरकार का मानना है कि 18 साल से कम उम्र के बच्चे मानसिक रूप से इतने परिपक्व (Mature) नहीं होते कि वे सेक्सुअल एक्टिविटी के नतीजों को समझ सकें. अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि अगर उम्र कम की गई, तो अपराधी बच्चों को बहला-फुसलाकर या दबाव डालकर ‘सहमति’ का बहाना बना लेंगे. बच्चों को धोखे और शोषण से बचाने के लिए यह सख्त लकीर खींचना जरूरी है. यह फैसला संयुक्त राष्ट्र (UN) की बाल अधिकार संधि के भी अनुरूप है.

