विदेश मंत्री एस जयशंकर ने जर्मनी के म्यूनिख शहर में आयोजित सुरक्षा सम्मेलन में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने भारत की विदेश नीति, ऊर्जा खरीद और क्वाड समूह को लेकर उठ रहे सवालों पर विस्तार से जवाब दिया। उन्होंने साफ कहा कि भारत रणनीतिक स्वायत्तता से जुड़ा है और तेल खरीद जैसे फैसले राष्ट्रीय हित के आधार पर ही होंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि क्वाड नेताओं की बैठक रद्द नहीं हुई थी, बल्कि वह तय ही नहीं थी।
उन्होंने सम्मेलन में बातचीत के दौरान कहा कि भारत की विदेश नीति का मूल आधार स्वतंत्र फैसला लेने की क्षमता है। अमेरिका के साथ हालिया व्यापार समझौते के बाद यह सवाल उठ रहा था कि क्या भारत रूस से तेल खरीद कम करेगा। इस पर जयशंकर ने कहा कि भारत अपने इतिहास और नीति के कारण रणनीतिक स्वायत्तता के लिए प्रतिबद्ध है। भारत किसी दबाव में ऊर्जा फैसले नहीं लेगा। तेल खरीद का फैसला कंपनियां उपलब्धता, कीमत और जोखिम देखकर करती हैं।

तेल खरीद में बाजार और राष्ट्रीय हित अहम
जयशंकर ने कहा कि आज का वैश्विक ऊर्जा बाजार बहुत जटिल और तेजी से बदलने वाला है। भारत की तेल कंपनियां वही करती हैं जो उनके लिए व्यावसायिक रूप से सही हो। वे सप्लाई, लागत और खतरे का आकलन करके खरीद का फैसला लेती हैं। विदेश मंत्रालय की ओर से भी यह साफ किया गया कि भारत दर्जनों देशों से कच्चा तेल आयात करता है और किसी एक स्रोत पर निर्भर नहीं है। सरकार का लक्ष्य है पर्याप्त उपलब्धता, सही कीमत और भरोसेमंद आपूर्ति।
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क्वाड समिट पर स्थिति साफ
क्वाड समूह को लेकर उठे सवाल पर जयशंकर ने कहा कि नेताओं की शिखर बैठक रद्द नहीं हुई, क्योंकि उसे औपचारिक रूप से तय ही नहीं किया गया था। उन्होंने कहा कि इसे जरूरत से ज्यादा नहीं पढ़ना चाहिए। क्वाड के कार्य समूह और अन्य तंत्र लगातार काम कर रहे हैं। विदेश मंत्रियों की बैठकें हो चुकी हैं और सहयोग जारी है। भारत अगली क्वाड नेताओं की बैठक की मेजबानी करने वाला है।
भारत-यूरोप रिश्तों में गहराई की जरूरत
म्यूनिख सम्मेलन में जर्मनी के विदेश मंत्री के साथ चर्चा में जयशंकर ने कहा कि रिश्ते सिर्फ दौरों और समझौतों से नहीं बनते। उनके लिए भरोसा और सहजता जरूरी है। उन्होंने कहा कि भारत और यूरोप को आपसी समझ और सहयोग का स्तर बढ़ाना होगा। दुनिया अब बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर बढ़ रही है, जहां कई शक्ति केंद्र उभर रहे हैं और यूरोप की भूमिका भी बढ़ रही है।
वैश्विक सुरक्षा में भारत की भूमिका
सम्मेलन के दौरान जयशंकर ने जी7 देशों के विदेश मंत्रियों और अन्य नेताओं से भी मुलाकात की। उन्होंने समुद्री मार्गों की सुरक्षा, संकट के समय त्वरित सहायता, बंदरगाह सुरक्षा और समुद्र के नीचे के संचार केबल नेटवर्क की मजबूती में भारत की भूमिका गिनाई। भारत ने वैश्विक सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने और बहुपक्षीय सहयोग बढ़ाने का संदेश दिया।
भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौता भी हाल में अंतिम रूप ले चुका है। इसके तहत दोनों पक्ष अधिकतर वस्तुओं पर शुल्क कम या खत्म करेंगे। इससे कृषि, समुद्री उत्पाद और श्रम आधारित उद्योगों को फायदा होने की उम्मीद है, जबकि डेयरी और अनाज जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को सुरक्षा दी गई है।
अमेरिका के कुछ सांसदों ने भी अपने प्रशासन से क्वाड नेताओं की बैठक जल्द बुलाने की अपील की है। उनका कहना है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में संतुलन और खुली व्यवस्था बनाए रखने के लिए क्वाड जरूरी मंच है। पूरे घटनाक्रम के बीच जयशंकर का संदेश साफ है कि भारत साझेदारियों को आगे बढ़ाएगा, लेकिन हर बड़ा फैसला अपने राष्ट्रीय हित और स्वतंत्र सोच के आधार पर ही करेगा।
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