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सिंधु जल संधि पर ताले के बाद चेनाब पर क्‍या है प्‍लान? मुनीर के मुंह पर भारत के 4 तमाचे, रेगिस्‍तान होगा गुलजार


नई दिल्‍ली. चिनाब की जिन लहरों पर अब तक पाकिस्तान अपना हक जताता था वे जल्‍द राजस्थान के रेतीले धोरों की प्यास बुझाने को बेताब हैं. पहलगाम हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि (IWT) को क्या स्थगित किया, पाकिस्तान के लिए ‘वॉटर स्ट्राइक’ शुरू हो गई. भारत 4 प्रोजेक्‍ट पर तेजी से काम कर रहा है, जिसके तहत पाकिस्‍तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर और पीएम शहबाज शरीफ की बोलती बंद होने वाली है. चेनाब के पानी का रुख पंजाब के रास्ते राजस्थान के प्यासे खेतों की ओर मोड़ जाएगा. सरकार ने चिनाब-रवि-व्यास-सतलज लिंक नहर परियोजना के लिए 3 साल यानी 2028 तक इस काम को पूरा करने का लक्ष्‍य है.

भारत पाकिस्‍तान को लेकर संयम की नीति छोड़कर रणनीतिक प्रहार के मोड में है. चिनाब नदी पर सालों से लटके प्रोजेक्ट्स अब रॉकेट की रफ्तार से आगे बढ़ रहे हैं. न डेटा साझा करने की मजबूरी, न पाकिस्तान को नोटिस देने का झंझट. भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि कश्मीर के पानी पर अब पहला हक उसका है. चिनाब की लहरों पर बन रहे भारत के ये बांध पाकिस्तान के लिए किसी जल-प्रलय की चेतावनी से कम नहीं हैं.

चिनाब पर भारत के ‘पावरफुल’ प्रोजेक्ट्स
भारत ने संधि को स्थगित मानते हुए चिनाब बेसिन में कई बड़े प्रोजेक्ट्स को ‘फास्ट ट्रैक’ मोड पर डाल दिया है:

· सवलकोट जलविद्युत परियोजना (1856 MW): यह जम्मू-कश्मीर का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट होगा. फरवरी 2026 में NHPC ने इसके लिए 5,129 करोड़ रुपये के अंतरराष्ट्रीय टेंडर जारी कर दिए हैं. इसे ‘राष्ट्रीय महत्व का प्रोजेक्ट’ घोषित किया गया है.

· पकल दुल (1000 MW): यह भारत का पहला ऐसा प्रोजेक्ट है जिसमें पानी को स्टोर करने की क्षमता है. इसकी डेडलाइन दिसंबर 2026 तय की गई है. इसके जरिए भारत पाकिस्तान जाने वाले पानी के प्रवाह को नियंत्रित कर सकेगा.

· दुलहस्ती स्टेज-II (260 MW): दिसंबर 2025 में इस प्रोजेक्‍ट को इस आधार पर मंजूरी दी गई कि अब पाकिस्तान को सूचना देने की कोई कानूनी बाध्यता नहीं है.

· रतले (850 MW) और किरू-कवार: इन विवादास्पद प्रोजेक्ट्स पर अब भारत किसी भी अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता को नहीं मान रहा है और इन्हें 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य है.

पाकिस्तान की बेचैनी की वजह
भारत ने न केवल नए बांध बनाना शुरू किया, बल्कि पुराने बांधों (सलाल और बगलिहार) की क्षमता बढ़ाने के लिए ‘डीसिल्टिंग’ भी शुरू कर दी है. मई 2025 में रख-रखाव के नाम पर जब भारत ने पानी रोका तो पाकिस्तान के मारला हेडवर्क्स पर जल स्तर 90% तक गिर गया था. इतना ही नहीं, भारत अब चिनाब के सरप्लस पानी को नहर के जरिए पंजाब और राजस्थान की ओर मोड़ने की तैयारी में है.

5 बड़े सवाल
भारत ने सिंधु जल संधि (IWT) को स्थगित क्यों किया?
अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए इस संधि को ‘अभयन्स’ (स्थगन) में डाल दिया.

सिंधु जल संधि रुकने से प्रोजेक्ट्स पर क्या असर पड़ा है?
अब भारत को पाकिस्तान के साथ डेटा साझा करने या किसी तकनीकी बदलाव के लिए पहले से सूचना देने की आवश्यकता नहीं है, जिससे निर्माण कार्य तेज हो गया है.

’पकल दुल’ प्रोजेक्ट पाकिस्तान के लिए चिंता का विषय क्यों है?
यह चिनाब पर भारत का पहला ‘स्टोरेज’ प्रोजेक्ट है. इसके जरिए भारत जरूरत पड़ने पर पाकिस्तान की ओर जाने वाले पानी को रोक सकता है या छोड़ सकता है.

भारत ने सिंधु जल संधि सस्‍पेंड करने के बाद जल प्रवाह को लेकर क्या नया रुख अपनाया है?
भारत अब बगलिहार और सलाल जैसे बांधों का आधुनिकीकरण कर रहा है और चिनाब के अतिरिक्त पानी को रवि-व्यास नदियों की ओर मोड़ने के लिए 113 किमी लंबी नहर का अध्ययन कर रहा है.

सिंधु जल संधि (1960) का मूल आधार क्या था?
यह संधि विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुई थी, जिसमें पूर्वी नदियों (रवि, व्यास, सतलज) पर भारत और पश्चिमी नदियों (सिंधु, झेलम, चिनाब) पर पाकिस्तान को अधिकार दिए गए थे.

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